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देखो टीम इंडिया को किस ओर ले जाता है ड्रेसिंगरूम का यह ‘नशा’

द्रविड़ का कद भारतीय क्रिकेट में काफी बड़ा है लेकिन सत्ता के इस खेल में वह खुद को ढाल पाएंगे

Jasvinder Sidhu Updated On: Jul 16, 2017 07:25 PM IST

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देखो टीम इंडिया को किस ओर ले जाता है ड्रेसिंगरूम का यह ‘नशा’

कहा जाता है कि सत्ता का नशा बहुत निर्दयी होता है. इसमें न तो रिश्ते मायने रखते हैं और न ही कोई भावना. श्रीलंका के आगामी दौरे से भारतीय क्रिकेट टीम के ड्रेसिंगरूम में एकदम नई तरह की सत्ता काबिज होगी. कप्तान विराट कोहली ने अनिल कुंबले को पहले ही बाहर कर दिया है और उसकी जगह जो आया है, वह अपनी काबलियत को हर स्तर पर साबित कर चुके दो दिग्गजों को स्वीकार करने के इनकार कर रहा है.

गौर से देखने पर अगले दो साल तक टीम इंडिया का ड्रेसिंग रूम किसी कंपनी के बोर्डरूम जैसा होगा जिसमें सत्ता के नशे में चूर डायरेक्टर्स अपनी शक्तियों के बचाने और बढ़ाने के लिए हर वह कुछ करता है जो उन्हें और पावरफुल बनाता है.

विराट कोहली ने तो दिखा दिया कि बॉस कौन है. अब जब सात करोड़ से भी अधिक की  सालाना सेलरी के साथ रवि शास्त्री भी काबिज होंगे तो उनकी भी वही कोशिश पूरा कंट्रोल अपने हाथ में रखने की होगी.

जाहिर है कि कप्तान ने ही उनके नाम की पैरवी की है, लिहाजा शास्त्री की हद में वह कभी नहीं आने वाले. ऐसे में राहुल द्रविड़ और जहीर खान के आने की स्थिति में कप्तान और कोच की सत्ता का संतुलन बिगड़ने का डर है. इस लिहाज से लगता नहीं कि भारतीय टीम में इन दो महान खिलाड़ियों का कभी दिल से स्वागत होगा. जहीर और द्रविड़ के नाम पर अब भी कवायद चल रही है. लेकिन हम मान लेते हैं कि ये होंगे.

 ड्रेसिंगरूम की अर्थव्यवस्था को भी समझना जरूरी

यहां टीम के ड्रेसिंगरूम की अर्थव्यवस्था को भी समझना जरूरी है. ड्रेसिंग रूम में खेल के हर पहलू पर काम करने लिए एक विशेषक्ष है. कोच को सात करोड़ से ज्यादा मिलने हैं तो असिस्टेंट बैटिंग कोच, फील्डिंग कोच, ट्रेनर, फीजियो, थ्रो डाउन कोच को दो-दो करोड़ सालाना मिलने हैं.

टीम के लिए एक सिक्योरिटी इंचार्ज, लॉजिस्टिक मैनेजर, एडमिनिस्ट्रेटर और दो मालशिए भी हैं. इंडियन ड्रेसिंगरूम में कोच व सहायक स्टाफ की कुल सैलरी 20 करोड़ के आसपास बनती है.

कुल मिला कर 15 खिलाड़ियों की एक टीम के लिए 12 सहायक हैं और द्रविड़ व जहीर के आने के बाद यह संख्या 14 हो जाएगी. साफ है कि भारतीय क्रिकेट में इस समय खेल से बड़ा पैसा है और पैसे के खेल के कोई भी बाहर जाना नहीं चाहेगा. सभी उनके इर्दगिर्द ही रहेंगे जो पावरफुल है और कप्तान व कोच यह साबित कर चुके हैं कि वे ही बॉस हैं.

राहुल द्रविड़ और जहीर के आने के बाद स्थिति बदलना तय है. द्रविड़ और शास्त्री के क्रिकेट में जमीन-आसमां का अंतर है. द्रविड़ ऐसे खिलाड़ी नहीं हैं जिसे किसी कप्तान की सिफारिश की जरूरत पड़े. अगर वह अपने बल्लेबाजी के आंकड़ों की शीट शास्त्री के सामने रखेंगे तो नए कोच के पास सिर खुजाने के सिवा कोई चारा नहीं होगा.

क्या कुंबले की तरह किसी और को खारिज कर पाएंगे कोहली?

अनिल कुंबले एक गेंदबाज थे. लेकिन द्रविड़ जैसे टॉप क्लास बल्लेबाज को सिरे से खारिज करना कप्तान कोहली के लिए आसान नहीं होगा. और न ही उनकी सलाह को.

यह देखना रोचक होगा कि कप्तान और कोच द्रविड़ और जहीर के साथ कैसे निपटते हैं. रवि इन दोनों को सालों से जानते हैं और कोहली ने उनके साथ खेला है लेकिन कंट्रोल के इस जालिम खेल में इन रिश्तों के क्या मायने होंगे, यह अभी देखना बाकी है.

पॉलिटिक्स की तरह भारतीय क्रिकेट भी जालिम है. दो साल पहले तक बीसीसीआई द्रविड़ को सीनियर टीम की जिम्मेदारी देने को तैयार था. लेकिन समझदार द्रविड़ ने पहले अंडर-19 के साथ काम करने का बड़ा फैसला किया.

अब हालात यह है कि उन्हें विदेशी दौरों के लिए बैटिगं कंसलटेंट बनाए जाने पर ही सवाल किया जा रहा है. द्रविड़ का कद भारतीय क्रिकेट में काफी बड़ा है लेकिन सत्ता के इस खेल में वह खुद को ढाल पाएंगे, यह देखना बाकी है.

वैसे यह काफी आसान है. सभी की तरह उन्हें भी बड़ी रकम मिलनी हैं. वह चींटी की तरह चुपचाप चीनी की बोरी चट्ट कर सकते है.

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