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क्या अश्विन को आईपीएल से अलग रखने की हिम्मत दिखाएगा बीसीसीआई

बेहद व्यस्त शेड्यूल के बीच अश्विन को तरोताजा रखना है बहुत जरूरी

Vedam Jaishankar Updated On: Mar 14, 2017 07:50 PM IST

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क्या अश्विन को आईपीएल से अलग रखने की हिम्मत दिखाएगा बीसीसीआई

अगर रविचंद्रन अश्विन खुद ही इस साल आईपीएल से दूर रहने का फैसला नहीं करते, तो उनसे ऐसा करने को कहा जाना चाहिए. ऐसा होना भारतीय क्रिकेट के लिए बहुत अच्छा होगा. यकीनन, किसी अहम खिलाड़ी को हटा देना उनकी आईपीएल फ्रेंचाइजी राइजिंग पुणे सुपरजायंट्स के लिए अच्छा नहीं होगा. लेकिन पिछले कुछ समय से ये बिल्कुल साफ है कि भारत के इस मैच विनर और बेहतरीन स्पिन गेंदबाज को आराम की सख्त जरूरत है. खासतौर पर ऐसा करना बहुत जरूरी है, अगर आप राष्ट्रीय टीम को लेकर फिक्रमंद रहते हैं.

अश्विन पिछले साल जुलाई से लगातार खेल रहे हैं. तब भारतीय टीम चार टेस्ट की सीरीज खेलने के लिए वेस्टइंडीज गई थी. इसके बाद वो न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन टेस्ट मैच खेले. फिर इंग्लैंड के खिलाफ पांच, बांग्लादेश के खिलाफ एक और अब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेल रहे हैं. अभी दो टेस्ट खेले हैं, दो खेलने बाकी हैं. रांची का टेस्ट गुरुवार से शुरू हो रहा है. 25 मार्च से चौथा टेस्ट धर्मशाला में होना है.

सीजन में 17 टेस्ट खेल लेंगे अश्विन

वेस्टइंडीज दौरे से लेकर अश्विन 17 टेस्ट खेल लेंगे. उसके बाद साल के आखिर तक काफी क्रिकेट होनी है. इसलिए जरूरी है कि बीसीसीआई अपने इस खिलाड़ी को बचाकर रखे.

अश्विन ने 269 विकेट ले लिए हैं. वो इस मामले में भारत में पांचवें नंबर पर हैं. पिछले 15 टेस्ट में वो बेहद कामयाब रहे हैं. इसमें उन्होंने 93 विकेट लिए हैं. प्रति टेस्ट उनके हिस्से छह विकेट ज्यादा आए हैं. इस दौरान उन्होंने पारी में पांच विकेट नौ बार लिए हैं. दो बार मैन ऑफ द सीरीज बने हैं और तीन बार मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार पाया है.

जिस समय ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज खत्म होगी, अश्विन 700 ओवर से ज्यादा गेंदबाजी कर चुके होंगे. एक घरेलू सीजन में किसी भारतीय गेंदबाज की ये सबसे ज्यादा गेंदबाजी होगी. इस तरह वो अनिल कुंबले के 612 ओवर्स को पीछे छोड़ देंगे. घरेलू सीजन के 11 टेस्ट में वो 72 विकेट ले चुके हैं. इससे पहले 13 टेस्ट में 63 विकेट का रिकॉर्ड कपिल देव के नाम था, जो उन्होंने 1979-80 में बनाया था.

किसी भी नजरिए से देखें, तो पाएंगे कि अश्विन ने बहुत गेंदबाजी की है. जितनी गेंदबाजी उन्हें अभी और करनी है, उससे यकीनन उनके कंधों पर और असर पड़ेगा. दोनों मैच और उसके अलावा नेट्स में गेंदबाजी करने से उनकी उंगली तो थकेगी ही. इसके अलावा, मानसिक थकान को भी अलग नहीं रख सकते. हालांकि अश्विन लगातार कमाल का प्रदर्शन किया है. विकेट लेने की क्षमता दिखाई है और टीम को जीत दिलाई है.

आगे का शेड्यूल है बेहद मुश्किल

इसके बावजूद, जिस तरह का शेड्यूल है, जिसमें एक के बाद एक लगातार मैच होने हैं, उसमें अपने सबसे अहम गेंदबाज के लिए चिंता होना लाजमी है. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चौथा टेस्ट 29 मार्च को खत्म हो रहा है. आईपीएल का व्यस्त कार्यक्रम 5 अप्रैल से शुरू होकर 29 मई तक चलेगा. तेज गर्मी और उमस होगी. भारतीय टीम इसके ठीक बाद इंग्लैंड रवाना हो जाएगा. 1 से 18 जून तक उसे चैंपियंस ट्रॉफी का हिस्सा होना है. इसके ठीक बाद वेस्ट इंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज होनी है. उसके बाद तीन टेस्ट, पांच वनडे और एक टी 20 श्रीलंका के खिलाफ खेला जाएगा. फिर दक्षिण अफ्रीका के साथ चार टेस्ट, पांच वनडे और दो टी 20 मुकाबले होंगे.

इन सबके साथ कहा जा रहा है कि ऑस्ट्रेलिया भारत को वनडे और टी 20 सीरीज के लिए आमंत्रित करना चाह रहा है. ये सीरीज इंग्लैंड के खिलाफ एशेज सीरीज के बाद होगी.

क्रिकेट मैचों की बाढ़ आने वाली है और ऐसे में अपने बेस्ट बॉलर को खोना कोई भी नहीं चाहेगा. ऐसे में शेड्यूल और बोझ को ऐसा बांटने की जरूरत है, जो किसी गेंदबाज की क्षमता को बढ़ाता हो.

इसमें कुछ छिपा नहीं है कि भारत के पास भले ही रफ्तार के मामले में काफी विकल्प हों, लेकिन स्पिन गेंदबाजी का थैला खाली है. ऐसा कोई भी गेंदबाज नहीं है, जो अश्विन की जगह ले सके. हरभजन सिंह अपने उतार पर हैं. जयंत यादव किसी भी तरह से अश्विन के आसपास नहीं हैं. बाएं हाथ के स्पिनर रवींद्र जडेजा विदेश में पिचों पर संघर्ष करेंगे. दूसरी तरफ लेग स्पिनर अमित मिश्रा सिर्फ सपोर्ट बॉलर जैसे ही हैं.

इससे पहले भी बोझ से टूटे हैं गेंदबाज

अतीत में भारत को अपने प्रमुख गेंदबाज के टूट जाने की समस्या से जूझना पड़ा है. बोझ की वजह से ऐसा होता रहा है. जवागल श्रीनाथ को वेस्ट इंडीज दौरे से वापस आना पड़ा था. कुंबले को अपने घर में रोटेटर कफ की समस्या हुई थी. किस्मत की बात है कि सौरव गांगुली के लिए हरभजन सिंह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज में कुंबले की जगह लेने में कामयाब हुए. वेस्ट इंडीज में बेचारे सचिन तेंदुलकर को श्रीनाथ की जगह नोएल डेविड से काम चलाना पड़ा था.

ऐसे में अगर बीसीसीआई अश्विन को आईपीएल से बाहर रहने को कहे, तो बिल्कुल सही होगा. ये कहा जा सकता है कि आईपीएल फॉरमेट में तो गेंदबाज को महज चार ओवर एक मैच में करने होते हैं. लेकिन 14 लीग मैचों के लिए लगातार सफर करना होगा. अभ्यास करना होगा. छोटे मैदान और फ्लैट पिच पर बिग हिटर से बचने का दबाव होगा. इन सबका असर गेंदबाज पर पड़ता है. वो भी ऐसे, जिसके कंधे ने वैसे ही पिछले कुछ महीनों में बड़ा बोझ झेला है.

आदर्श तरीका यही है कि अश्विन को दो महीने आराम करने दिया जाए. तरोताजा अश्विन को 50 ओवर फॉरमेट वाले चैंपियंस ट्रॉफी में लाया जाए, जहां भारत चैंपियन है. लेकिन क्या बोर्ड इस तरह का फैसला करेगा?

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