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बंद करो सचिन और कोहली की तुलना, क्या कोहली ने कभी कहा, मैं सचिन से बेहतर हूं?

कोहली की क्या गलती अगर अब अच्छे गेंदबाज नहीं ?

Lakshya Sharma Updated On: Sep 04, 2017 02:00 PM IST

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बंद करो सचिन और कोहली की तुलना, क्या कोहली ने कभी कहा, मैं सचिन से बेहतर हूं?

कुछ साल पहले की ही बात है जब कहा जाता था कि सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड कोई नहीं तोड़ सकता. उस समय ये सवाल वाजिब भी था क्योंकि क्रिकेट की दुनिया में सचिन के रिकॉर्ड्स को माउंट एवरेस्ट कहा जाता था.

उसके बाद एक बल्लेबाज आया जिसका नाम है विराट कोहली. विराट कोहली जिस तरह वनडे में खेल रहे हैं इसे देखकर अब लोगों का सवाल है कि कितने समय में कोहली सचिन के रिकॉर्ड को तोड़ पाएंगे. खासकर शतकों के रिकॉर्ड को. अब है ना अजीब, कहां तो सचिन के रिकॉर्ड को तोड़ने की बात करना भी बेमानी होती थी और अब सवाल ये पूछा जा रहा है कि कोहली कितने समय में सचिन के शतकों का रिकॉर्ड तोड़ देंगे.

सचिन के नाम वनडे में 49 शतक है. जो उन्होंने 463 मैच खेलकर बनाए थे. वहीं विराट कोहली 194 मैचों में ही 30 शतक लगा लिए हैं. अब अगर कोहली इसी स्पीड से चलते रहे तो निश्चित तौर पर सचिन से आगे निकल जाएंगे.

30 शतक का सफर तय करने में सचिन को कोहली से सौ मैच ज्यादा यानि 294 मुकाबले खेलने पड़े थे. पारियों के लिहाज से भी कोहली, सचिन से काफी आगे हैं. कोहली ने अपना 30वां शतक 186 पारियों में पूरा कर लिया. वहीं सचिन को 30 शतक ठोंकने में 267 पारियां लग गई थीं.

सचिन का तीसवां शतक साल 2001 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बना था. उस वक्त सचिन की उम्र भी कोहली के बराबर यानि 28 साल थी. लेकिन कोहली ने इस आंकड़े को छूने में सचिन से 100 मैच कम खेले.

अपने तीसवें शतक की मदद से कोहली ने विदेशी जमीन पर अपना 19वां शतक पूरा करते हुए पूर्व कप्तान सौरव गांगुली की बराबरी कर ली. हालांकि इस फेहरिस्त में भी सचिन 29 शतकों के साथ नंबर वन हैं.

क्या सचिन से हो सकती है विराट कोहली की तुलना?

आजकल विराट कोहली के हर शतक की तुलना सचिन के रनों से की जाती है लेकिन क्रिकेट फैंस और क्रिकेट एक्सपर्ट को यह समझना चाहिए कि किसी भी हाल में इन दोनों दिग्गजों की तुलना करना सही नहीं है.

बेशक वनडे में विराट कोहली इस समय दुनिया के सबसे बड़े खिलाड़ी कहे जा सकते हैं लेकिन ये दौर है और सचिन का दौर बिल्कुल अलग था.

आप जरा खुद सोचिए इस समय दुनिया में ऐसा कौनसा अच्छा तेज गेंदबाज है जिसके सामने बल्लेबाज डरा हुआ दिखे. हां जेम्स एंडरसन को हम इस लिस्ट में शामिल कर सकते हैं लेकिन वह भी तब जब वह इंग्लैंड में खेल रहे हों.

आपके जहन में डेल स्टेन का भी नाम आ सकता है लेकिन सोचिए स्टेन अपने करियर के आखिरी पड़ाव में हैं और ज्यादातर समय चोट के कारण मैदान से बाहर बैठे हैं. कोहली ने भी उनका सामना ज्यादा नहीं किया है.

इसके बाद आजकल की पिच ही रनों का अंबार लगाने के लिए बनाई जाती है. ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की पिच को पहले तेज गेंदबाजी का स्वर्ग माना जाता था लेकिन अब वहां भी सपाट पिच बनाई जा रही है.

अब सचिन के दौर की बात करते हैं, आप बताएं सचिन ने ऐसे कौन-से महान गेंदबाजों का सामना नहीं किया. वेस्टइंडीज के  एम्ब्रोस, वॉल्श न्यूजीलैंड के रिचर्ड हैडली, पाकिस्तान के इमरान खान, वसीम अकरम, वकार यूनुूस, ऑस्ट्रेलिया के ग्लैन मैकग्रा और ब्रेट ली, साउथ अफ्रीका के एलन डोनाल्ड ऐसे तमाम गेंदबाज हैं जिनका सामना सचिन ने किया. सचिन ने तो स्पिन में वॉर्न और मुरली को बड़ी आसानी से खेला.

उस दौर में साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया की पिच भी काफी तेज होती थी. पिच में तेजी के साथ उछाल भी अच्छा खासा मिलता था.

कोहली की क्या गलती अगर अब अच्छे गेंदबाज नहीं ?

विराट कोहली इस समय हर जगह, हर फॉर्मेट में हर बना रहे हैं और इसका श्रेय उनसें कोई नहीं छीन सकता. अब उनकें दौर में कोई अच्छा गेंदबाज नहीं है तो इसमें भी उनका क्या कसूर है?

अब हर जगह सपाट पिच बन रही है इसमें भी विराट कोहली को कसूरवार ठहराया जाएगा? पिच कैसी भी हो, गेंदबाज कोई भी हो रन तो बल्लेबाजों को ही बनाने पड़ते है. दुनिया के बाकी सभी बल्लेबाजों को भी तो इसी तरह के गेंदबाज और इसी तरह की कंडीशन मिल रही है. ऐसा तो नहीं है कि टीम इंडिया या विराट कोहली के लिए ही बल्लेबाजों के मददगार पिच बनाई जाती है.

गलत है सचिन और कोहली की तुलना

आप एक वाक्या भी बता दें जब कोहली ने कहा हो कि वह सचिन से बेहतर हैं. उन्होंने हमेशा ये कहा कि अगर मैं सचिन के रिकॉर्ड के आसपास भी पहुंचा तो वह भी खुदकिस्मती होगी. लोगों को समझना चाहिए कि सचिन का दौर अलग था और आज का दौर अलग. किसी भी दो खिलाड़ी की तुलना नहीं की जा सकती. दोनों ही खिलाड़ी अपने अपने दौर के टॉप के बल्लेबाज हैं.

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