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आखिरकार गांगुली ने बांध ही दिए शास्त्री के हाथ

कोच को कहानी में कुछ यूं शामिल हुए नए किरदार

Sumit Kumar Dubey Sumit Kumar Dubey | Published On: Jul 11, 2017 11:17 PM IST | Updated On: Jul 12, 2017 09:11 AM IST

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आखिरकार गांगुली ने बांध ही दिए शास्त्री के हाथ

अंग्रेजी के मशहूर नाटककार विलियम शेक्सपियर के नाटकों की तरह टीम इंडिया के नए कोच के चयन की कहानी ने अपने क्लाइमैक्स तक पहुंचने से पहले कई मोड़ लिए. मंगलवार का दिन भारतीय क्रिकेट में ऐसे कई घटनाक्रमों का गवाह बना जिसकी तुलना शेक्सपियर के किसी नाटक की कहानी से ही की जा सकती है. एक बढ़िया नाटक की पटकथा की तरह  टीम इंडिया के कोच की कहानी में भी क्लाइमैक्स से पहले दो नए किरदारों की एंट्री हो गई. वो एंट्री है पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज जहीर खान और पूर्व क्रिकेटर राहुल द्रविड़ की.

भारतीय टीम के चीफ कोच के मसले पर जहीर खान और द्रविड़ के किरदार की एंट्री ऐसी है, जिसने मंगलवार के दिन कोच एपिसोड के क्लाइमैक्स को बेहद दिलचस्प बना दिया.

पिछली बार चीफ कोच बनने की रेस मे अनिल कुंबले से मात खा गए रवि शास्त्री सोमवार को एक बार फिर उसी पद के लिए क्रिकेट एडवायजरी कमेटी यानी सीएसी के सामने थे. पिछली बार सीएसी के सदस्य सौरव गांगुली के चलते चीफ कोच बनने से रह गए शास्त्री का दावा इस बार पहले से ज्यादा मजबूत था.  कप्तान कोहली का खुला सपोर्ट तो था ही, साथ ही सीएसी के सदस्य सचिन तेंदुलकर भी उनके पक्ष में थे.

बोर्ड से जुड़े सूत्रों के मुताबिक स्काइप के जरिए हुए इस इंटरव्यू में शास्त्री ने गांगुली के हर सवाल का बेहद सटीक जवाब दिया. अगले दो साल यानी 2019 वर्ल्डकप तक के लिए शास्त्री ने टीम इंडिया के लिए अपनी योजनाओं का खाका भी सामने रख दिया. जब सब कुछ ठीक था तो फिर अचानक गांगुली ने शास्त्री से सपोर्ट स्टाफ पर सवाल उठा दिए.

बतौर टीम डायरेक्टर शास्त्री अपने साथ बैटिंग कोच के तौर पर संजय बांगड़ और बॉलिंग कोच के तौर पर भरत अरुण को साथ लाए थे. कुंबले के कार्यकाल के दौरान भी संजय बांगड़ टीम इंडिया के साथ ही रहे थे. अपुष्ट सूत्रों की खबर है कि कोहली-कुंबले विवाद में बहुत बड़ा रोल संजय बांगड़ का भी था.

शास्त्री ने जब अपने सपोर्ट स्टाफ की बात की तो गांगुली ने ऐसा दांव चल दिया कि शास्त्री और उनको कोच बनाने में जुटी लॉबी के पास कोई जवाब ही नहीं बचा. गांगुली ने बतौर बॉलिंग कोच जहीर खान का नाम सामने रखा. सूत्रों के मुताबिक मीटिंग में सचिन ने वीवीएस लक्ष्मण को तो शास्त्री के नाम पर राजी कर लिया लेकिन जब बात जहीर की आई तो लक्ष्मण, गांगुली के साथ हो गए. सोमवार की मीटिंग में जब बात फाइनल नहीं हो सकी तो गांगुली ने विराट से बात करने की बात कहकर फैसले को टाल दिया.

मंगलवार की सुबह एक नई खबर आई कि विनोद राय की अगुआई वाली सीओए मंगलवार शाम को ही कोच का अनाउंसमेंट चाहती है. वक्त की इस कमी ने इस नाटक के सभी किरदारों को एक बार फिर से हरकत में ला दिया.

शाम होते-होते मीडिया में खबर भी आई कि शास्त्री का नाम फाइनल हो गया है. लेकिन गांगुली फिर से एक्शन में आए और बोर्ड के सेक्रेटरी ने इस खबर को नकार दिया. एक बार फिर से शास्त्री के साथ बात की गई और उन्हें जहीर के साथ-साथ द्रविड़ के नाम पर भी राजी होना पड़ा.

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