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...तो गांगुली को खुली चुनौती दे ही दी रवि शास्त्री ने!

शास्त्री ने कहा, मैं तय करूंगा फुल टाइम सपोर्ट स्टाफ

FP Staff | Published On: Jul 13, 2017 12:29 PM IST | Updated On: Jul 13, 2017 01:12 PM IST

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...तो गांगुली को खुली चुनौती दे ही दी रवि शास्त्री ने!

सौरव गांगुली का करियर बाएं हाथ के स्पिनर्स को परेशान करने वाला रहा है. गांगुली ने अपने करियर में कभी ऐसे स्पिनर्स का सम्मान नहीं किया. मुरली कार्तिक जैसे लोग गांगुली के साथ ज्यादा नहीं खेल पाए, इसकी वजह यही थी. बाएं हाथ के स्पिनर्स को गांगुली हमेशा बहुत आराम से खेलते थे. ये सिलसिला करियर के बाद भी जारी रहा, जब पिछले साल एक और बाएं हाथ के स्पिनर रवि शास्त्री को उन्होंने कोच की रेस से ‘आउट’ किया.

एक साल बाद हालात बदले हैं. शास्त्री कोच हैं. गांगुली ने यहां भी खेल किया. जहीर खान को बॉलिंग और राहुल द्रविड़ को बैटिंग कंसल्टेंट बनवा दिया. इसे शास्त्री के पर कतरने के कदम के तौर पर देखा गया. लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि शास्त्री इस लड़ाई को आगे ले जाने के मूड में हैं. बाएं हाथ के इस स्पिनर ने एक दिन पहले कहा था कि मुझे चैलेंजेस पसंद हैं. जितने मर्जी चैलेंज ले आओ.

अब एक दिन बाद उन्होंने अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में कहा है कि सपोर्ट स्टाफ नियुक्त करना मेरा हक है. शास्त्री से जहीर और द्रविड़ की नियुक्ति पर पूछा गया. उनका जवाब था, ‘यकीनन बीसीसीआई बीच-बीच मे जहीर और द्रविड़ को कंसल्टेंट के तौर पर ला सकता है. उनका अनुभव बहुत काम  आएगा. लेकिन जहां तक फुल टाइम सपोर्ट स्टाफ का सवाल है, वो मैं तय करूंगा, क्योंकि अगले दो साल मुझे ही उनके साथ काम करना है.’

उनके इस बयान ने सवाल उठाए हैं. क्या जहीर खान का रोल फुलटाइम नहीं होगा? राहुल द्रविड़ के मामले में बीसीसीआई ने साफ किया था कि वो सिर्फ विदेशी दौरों के लिए ही कंसल्टेंट होंगे. लेकिन जहीर के मामले में ऐसा नहीं था. बीसीसीआई की तरफ से यही बताया गया था कि जहीर बॉलिंग कंसल्टेंट होंगे. माना जा रहा था कि जहीर फुल टाइम ही टीम के साथ होंगे. लेकिन अब शास्त्री के बयान ने इस बात को साफ करने की कोशिश की है कि जहीर फुलटाइम नहीं होंगे.

माना यही जा रहा है कि सौरव गांगुली को कुछ बातों पर आपत्ति थी. जब क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी (सीएसी) के बाकी दो सदस्यों वीवीएस लक्ष्मण और सचिन तेंदुलकर ने शास्त्री का पक्ष लिया, तो सौरव ने जहीर खान और राहुल द्रविड़ को लाने की बात की. कहा यही जा रहा है कि खासतौर पर संजय बांगड़ को लेकर सौरव को आपत्ति थी. लेकिन अब शास्त्री का बयान जहीर के रोल पर सवाल खड़े कर रहा है. दरअसल, शास्त्री की पसंद भरत अरुण हैं. लेकिन उन्हें लिए जाने को लेकर कमेटी राजी नहीं थी.

जितने लोग रवि शास्त्री और सौरव गांगुली का जानते हैं, वे मान सकते हैं कि मामला थमने वाला नहीं है. दोनों की शख्सियत ऐसी है कि वे आसानी से हार नहीं मानने वाले. भले ही क्रिकेट करियर में सौरव को किसी लेफ्ट आर्म स्पिनर ने परेशान न किया हो, लेकिन अब शास्त्री ऐसा करने के लिए तैयार हैं.

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