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रामचंद्र गुहा का लेटर आया सामने, धोनी, द्रविड़, गावस्कर पर लगाए गंभीर आरोप

गुहा ने धोनी और सुनील गावस्कर पर उठाए सवाल

FP Staff | Published On: Jun 02, 2017 12:48 PM IST | Updated On: Jun 02, 2017 05:44 PM IST

रामचंद्र गुहा का लेटर आया सामने, धोनी, द्रविड़, गावस्कर पर लगाए गंभीर आरोप

बीसीसीआई की प्रशासनिक कमेटी से इस्तीफा देने के बाद रामचंद्र गुहा ने बड़ा लेटर बम फोड़ा है. इस लेटर में गुहा ने टीम इंडिया के स्टार खिलाड़ियों पर जमकर हमला बोला है. उन्होंने टीम के शीर्ष खिलाड़ियों को खास महत्व देने और उन्हें नियमों की अनदेखी करके लाभ पहुंचाने की जमकर आलोचना की है.

इस्तीफा देने के बाद बीसीसीआई के चेयरमैन विनोद राय को एक पत्र लिखकर बेहद ही अहम मुद्दों को सामने लाने की कोशिश की है.

रामचंद्र गुहा को सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासनिक कमेटी का सदस्य बनाया था, लेकिन गुहा ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. 2 जून 2017 के अपने पत्र में गुहा ने अपने इस्तीफे के पीछे सात अहम कारणों को गिनाया है. अपने पत्र में गुहा ने बीसीसीआई में पारदर्शिता नहीं होने का सवाल खड़ा किया है, उन्होंने टीम इंडिया के शीर्ष खिलाड़ियों पर जमकर हमला बोला है. उन्होंने इन खिलाड़ियों को बीसीसीआई और प्रशासनिक कमेटी द्वारा दी जा रही सुविधाओं पर भी सवाल खड़ा किया है.

गुहा ने पत्र में लगाए बड़े आरोप

प्रशासनिक कमेटी हितों के टकराव को खत्म करने में विफल रहा है. राष्ट्रीय कोच आईपीएल के लिए राष्ट्रीय टीम की अनदेखी कर रहे हैं, दिल्ली डेयर डेविल्स के कोच राहुल द्रविड़ टीम इंडिया ए और जूनियर भारतीय टीम के भी कोच हैं.

सुनील गावस्कर एक खिलाड़ियों के मैनेजमेंट कंपनी के मुखिया है. बावजूद इसके उन्हें बीसीसीआई ने कमेंट्री के लिए चुना है.टेस्ट टीम में नहीं होने के बाद भी महेंद्र सिंह धोनी को ए ग्रेड में रखा गया है. भारतीय टीम के कोच के मुद्दे को गलत तरीके से संभाला गया, बतौर कोच कुंबले के बेहतरीन प्रदर्शन के बाद भी चैंपियंस ट्रॉफी से ठीक पहले उनपर विवाद खड़ा किया गया है .

प्रशासनिक कमेटी घरेलू क्रिकेटरों की अनदेखी करता है और अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों और इनके बीच मैच फीस का बहुत ज्यादा अंतर है. निष्कासित अधिकारी बीसीसीआई की बैठकों में शिरकत करते हैं, लेकिन प्रशासनिक कमेटी पर इस पर चुप्पी साधे हुए है.  प्रशासनिक कमेटी में एक भी पुरुष क्रिकेटर नहीं है, जवागल श्रीनाथ को कमेटी में शामिल किया जाना चाहिए.

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