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केरल हाईकोर्ट ने पलटा फैसला, श्रीसंत का आजीवन प्रतिबंध बहाल किया

एकल पीठ के फैसले के खिलाफ बीसीसीआई ने दायर की थी याचिका

FP Staff Updated On: Oct 17, 2017 09:39 PM IST

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केरल हाईकोर्ट ने पलटा फैसला, श्रीसंत का आजीवन प्रतिबंध बहाल किया

केरल हाईकोर्ट ने अपने फैसले को पलटते हुए एक बार फिर तेज गेंदबाज एस श्रीसंत पर आईपीएल  स्पॉट फिक्सिंग मामले में बीसीसीआई द्वारा लगाए आजीवन प्रतिबंध को बहाल कर दिया.

इसी साल अगस्त में केरल हाईकोर्ट की एकल पीठ ने क्रिकेटर श्रीसंत को राहत देते हुए बीसीसीआई द्वारा लगाए आजीवन प्रतिबंध को खत्म कर दिया था. इसके बाद बीसीसीआई ने कोर्ट से इस मामले पर फिर से विचार करने की अपील करते हुए याचिका दायर की थी.

इसी पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश नवनीति प्रसाद सिंह और न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन की पीठ ने एकल न्यायाधीश की पीठ के खिलाफ बीसीसीआई की याचिका पर मंगलवार को यह फैसला सुनाया.

बीसीसीआई ने अपनी अपील में कहा था कि इस क्रिकेटर पर प्रतिबंध लगाने का फैसला उसके खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर लिया गया था. न्यायमूर्ति ए मोहम्मद मुश्ताक की एकल पीठ ने सात अगस्त को श्रीसंत पर लगे बीसीसीआई के आजीवन प्रतिबंध को हटा दिया था और बोर्ड द्वारा उनके खिलाफ चलाई जा रही सभी तरह की कार्रवाई पर भी रोक लगा दी थी.

बीसीसीआई ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि कोर्ट केवल इस आधार पर श्रीसंत पर लगाए गए प्रतिबंध को नहीं हटा सकता कि दिल्ली की एक निचली अदालत ने उसे दोषमुक्त करार दिया है. बीसीसीआई की ओर से दायर याचिका में सीईओ जौहरी ने कहा कि जिन सबूतों के आधार पर किसी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है उन्हीं के आधार पर उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई.

हाईकोर्ट ने कहा कि प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन नहीं हुआ है और श्रीसंत के पक्ष में दिए गए एक सदस्यीय बेंच के आदेश को रद्द कर दिया. श्रीसंत, अंकित चव्हाण और अजित चंदीला सहित स्पॉट फिक्सिंग मामले में सभी 36 आरोपियों को जुलाई 2015 में पटियाला हाउस अदालत ने आपराधिक मामले से बरी कर दिया था.

श्रीसंत ने 2005 में श्रीलंका के खिलाफ नागपुर में एकदिवसीय मैच के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था. उन्होंने 2006 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट पदार्पण किया. श्रीसंत ने 27 टेस्ट में 37.59  के औसत से 87 विकेट जबकि वनडे में 53 मैचों में 33.44 की औसत से 76 विकेट चटकाए.

 तेज गेंदबाज ने कहा, अब तक का सबसे बदतर फैसला

श्रीसंत ने इस फैसले को ‘अब तक का सबसे बदतर फैसला’ करार दिया और कहा कि वह अपना संघर्ष नहीं छोड़ेंगे. श्रीसंत ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, ‘‘यह अब तक का सबसे बदतर फैसला है... मेरे लिए विशेष नियम, असली गुनहगारों का क्या. चेन्नई सुपरकिंग्स का क्या हुआ और राजस्थान का.’

श्रीसंत ने अपने प्रशंसकों को समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि वह अपनी लड़ाई जारी रखेंगे. उन्होंने लिखा, ‘‘अब तक दिए समर्थन और उत्साहवर्धन के लिए सभी को धन्यवाद. मैं आश्वासन देता हूं कि मैं हार नहीं मानूंगा. मेरे पास सिर्फ मेरा परिवार और कुछ करीबी लोग हैं जो अब भी मेरे ऊपर विश्वास करते हैं. मैं संघर्ष जारी रखूंगा और सुनिश्चित करूंगा कि मैं हार नहीं मानूं.’’

श्रीसंत ने आगे लिखा, ‘‘और लोढा समिति की रिपोर्ट के 13 आरोपियों का क्या. कोई इसके बारे में जानना नहीं चाहता. मैं अपने अधिकार के लिए संघर्ष जारी रखूंगा. भगवान महान है.’’ इस बीच केरल क्रिकेट संघ (केसीए) के सचिव जयेश जार्ज ने कहा कि केसीए श्रीसंत का समर्थन कर रहा था.

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