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महिला क्रिकेट: नॉन वेज नहीं, तो इस पावर का राज़ क्या है

इंटरनेशनल क्रिकेट में कामयाबी के लिए मीट जरूरी नहीं है. हां, कड़ी मेहनत जरूरी है

Snehal Pradhan | Published On: Jul 17, 2017 12:43 PM IST | Updated On: Jul 17, 2017 12:43 PM IST

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महिला क्रिकेट: नॉन वेज नहीं, तो इस पावर का राज़ क्या है

2017 के महिला वर्ल्ड कप की खासियत है पावर. लीग में कुल 97 छक्के लग चुके हैं. ये पूरे साल हुए महिलाओं के वनडे से ज्यादा हैं. पूरे साल कुल 79 छक्के लगे थे. कई छक्के तो ऐसे रहे, जो दर्शकों के बीच स्टैंड मे जाकर गिरे.

छह भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 12 छक्के इस टूर्नामेंट में लगाए हैं. पिछले जितने विश्व कप हुए हैं, उनमें कुल मिलाकर भारत की तरफ से 14 छक्के लगे थे. सबसे ज्यादा दक्षिण अफ्रीका ने छक्के लगाए हैं. उनके दो बल्लेबाजों ने ही 18 छक्के लगा दिए हैं.

डिनर टेबल पर अक्सर ये बात होती है कि भारतीय खिलाड़ियों ने ताकत की कमी है. इसे लेकर सलाह आती है कि आपको मजबूत होने के लिए मीट खाना चाहिए. सबूत के तौर पर पुलेला गोपीचंद की एकेडमी का उदाहरण दिया जाता है. वहां से लगातार चैंपियन निकल रहे हैं. कहा यही जाता है कि वहां चिकन खाने के लिए प्रेरित किया जाता है.

इसके बाद ये भी लोग बताते ही हैं कि पाकिस्तान से ज्यादा तेज गेंदबाज इसलिए आते हैं, क्योंकि वे बीफ खाते हैं. लेकिन भारतीय टीम में ऐसी खिलाड़ी हैं, जो शाकाहारी हैं. इसके बावजूद पावरफुल नजर आती हैं.

स्मृति मंधाना पिछले दिनों सोशल मीडिया पर छाई थीं. उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 72 गेंद में 90 रन की पारी खेली थी. उस पारी में 11 बार उन्होंने गेंद को बाउंड्री के बाहर पहुंचाया था. इस पारी में दो छक्के थे. इनमें दूसरा छक्का बैकफुट ड्राइव था, जो उन्होंने एन्या श्रबसोल ने लगाया था.

मंधाना ने इस पारी के बाद वेस्टइंडीज के खिलाफ शतक जमाया था. इसमें भी दो छक्के थे. ये सब उन्होंने बगैर मांसाहार के किया है. मंधाना कहती हैं, ‘एक बच्चे के तौर पर मैंने कभी घर में किसी को नॉन-वेज खाते नहीं देखा.’ वह पूरी तरह शाकाहारी मारवाड़ी कम्युनिटी से हैं.

मंधाना अब शुद्ध शाकाहारी नहीं रहीं. उन्होंने कोच और साथियों की सलाह पर अंडा खाना शुरू कर दिया है. लेकिन इससे ज्यादा नहीं. वह कहती हैं, ‘मैंने कभी न खाया, न किसी को खाते देखा. इसलिए इसकी महक मुझे अच्छी नहीं लगती.’

इसी तरह दीप्ति शर्मा हैं. दीप्ति भारतीय टीम की सबसे फिट और एथलेटिक सदस्यों में हैं. थ्रोइंग के मामले में उन्हें टीम में बेस्ट माना जा सकता है. टूर्नामेंट में डायरेक्ट हिट पर दो रन आउट कर चुकी हैं. 177 रन बनाए हैं और नौ विकेट लिए हैं. उन्होंने फर्स्टपोस्ट से बातचीत में कहा, ‘मैं हमेशा अंडे खाती रही हूं. लेकिन मीट नहीं. मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि ताकतवर होने के लिए नॉन-वेज खाना जरूरी है.’

बाकी खेल दुनिया में आपको कई ऐसे दिग्गज मिलेंगे, जो शाकाहारी हैं. कार्ल लुइस ने करियर के बीच वेजीटेरियन होने का फैसला किया था. क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज पीटर सिडल पिछले कुछ समय से शाकाहारी हैं.

भारत में 90 के दशक के टॉप बॉलर अनिल कुंबले, जवागल श्रीनाथ और वेंकटेश प्रसाद वेजीटेरियन थे. आईपीएल के टॉप बॉलर जयदेव उनाद्कट भी. इशांत शर्मा भी शाकाहारी हैं. महिलाओं में दुनिया की सबसे तेज गेंदबाज दक्षिण अफ्रीका की मारियाने कैप शाकाहारी हैं.

भारतीय टीम में कुछ और खिलाड़ी हैं, जो धार्मिक या सांस्कृतिक वजहों से मीट नहीं खातीं. तेज गेंदबाज शिखा पांडेय इनमें से एक हैं, ‘मैं अपने खाने के लिए किसी जानवर को मार देने का सोच भी नहीं सकती.’ शिखा के मां-बाप भी वेजीटेरियन हैं. शिखा गोवा में रहती हैं, लेकिन उत्तर भारतीय हैं. उत्तर भारत में बिना रोटी के खाना ऐसा ही है, जैसे पारले जी के बगैर चाय. लेकिन अब शिखा को रोटी को लेकर वैसा प्यार नहीं रहा. उन्होंने चार किलो वजन कम किया है. शिखा कहती हैं, ‘अगर इससे मैं फिट और बेहतर महसूस करती हूं, तो कोई दिक्कत नहीं है.’

शिखा पांडे और स्मृति मंधाना, दोनों ही अपने खेल और पावर के लिए कंडीशनिंग, जिम सेशन और संतुलित आहार को श्रेय देती हैं. उनके मुताबिक इंटरनेशनल क्रिकेट में कामयाबी के लिए मीट जरूरी नहीं है. हां, कड़ी मेहनत जरूरी है.

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