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आईपीएल टीवी राइट्स: आर-पार की लड़ाई, आमने सामने हैं सोनी और स्टार

आईपीएल मीडिया अधिकारों के लिए नीलामी प्रक्रिया 28 अगस्त को शुरू होने वाली है

Neeraj Jha Updated On: Jul 29, 2017 11:55 AM IST

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आईपीएल टीवी राइट्स: आर-पार की लड़ाई, आमने सामने हैं सोनी और स्टार

पिछले दस सालों में इंडियन प्रीमियर लीग यानी की आईपीएल ने क्रिकेट को पूरी तरह से बदल दिया है. शायद ही कुछ लोगों को पता होगा की जब टवेंटी - टवेंटी का फॉर्मेट दूसरे कई देशों में लोकप्रिय हो रहा था, उस समय भारतीय क्रिकेट बोर्ड यानी बीसीसीआई इस नए फॉर्मेट को लागू करने के पक्ष में नहीं था. बोर्ड के नज़रिये में बदलाव तो तब आया जब भारत ने 2007 में महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में पहली वर्ल्ड टी 20 पर कब्ज़ा जमाया. शायद तब भी वो पूरी तरह से इस फॉर्मेट को लेकर आश्वस्त नहीं थे. लेकिन जब ज़ी ग्रुप के मालिक सुभाष चंद्रा ने  एक बागी क्रिकेट लीग यानी आईसीएल की शुरुआत की और इसके साथ जब बहुत सारे खिलाडियों ने पाला बदलना शुरू किया तो मजबूरन बोर्ड को आईपीएल जैसी लीग शुरू करनी पड़ी.

पर शायद बीसीसीआई को भी नहीं पता था की ये भविष्य में इतना बड़ा लीग हो जायेगा. ये कहना गलत नहीं होगा की बोर्ड की करीब 60 से 70 प्रतिशत कमाई आईपीएल से आती है. आज की तारीख़ में एडवरटाइजर और ब्रॉडकास्टर,सबकी नज़र इसी एक लीग पर टिकी है. वजह साफ़ है - पैसा. अगर हम इसे इंडियन पैसा लीग कहे तो ये कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी.

आईपीएल हमेशा से रहा है फायदे का सौदा

आईपीएल शायद ही एकमात्र क्रिकेट की प्रॉपर्टी है जिसमे निवेश करने वालों ने कभी भी खेद व्यक्त किया है.  पूरी मीडिया और मनोरंजन उद्योग का 10 प्रतिशत विज्ञापन जो की करीब 55,000 करोड़ है, स्पोर्ट्स प्रोग्रामिंग पर खर्च होता है -जिसमे आईपीएल का एक बहुत बड़ा हिस्सा होता है.

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वर्तमान में, 60 मैचों के साथ, ब्रॉडकास्टर एक सीजन में अनुमानित 1,000 करोड़ रुपये कमाता है. जनवरी 2008 में, सिंगापुर स्थित वर्ल्ड स्पोर्ट्स ग्रुप को आईपीएल के 10 साल के लिए करीब 5900 करोड़ में  प्रसारण अधिकार मिला. डब्ल्यूएसजी ने बाद में पहले पांच वर्षों का अधिकार करीब 1900 करोड़ रुपये में सोनी को बेच दिया. ललित मोदी से जुड़े विवादों के बाद इसमें बदलाव करते हुए  बीसीआईआई और सोनी-डब्ल्यूएसजी के बीच 8,200 करोड़ रुपये का  एक नया अनुबंध किया गया.

हालांकि, आईपीएल के साथ सोनी के 10 साल का अनुबंध अब खत्म हो गया है. प्रसारण और डिजिटल समेत बीसीसीआई आईपीएल के मीडिया अधिकारों के अगले पांच सालों का चक्र इस साल अगस्त में नीलामी के लिए तैयार होगा. और इसमें कोई गारंटी नहीं है कि सोनी को फिर से ये राइट्स मिल जाएगा.

पिछले साल बीसीसीआई ने सोनी से राइट्स ऑफ़ रेफुजल और मैचिंग राइट्स का अधिकार छीन लिया - इसका मतलब यह हुआ की अब जो भी सबसे ज्यादा पैसा बिड करेगा, संभवतः उसी को टेलीकास्ट राइट्स मिलेगा.

कंटेंट इज़ द किंग

अगर खेल की लोकप्रियता की बात करें तो आईपीएल के दसवें सीजन में 22.5% की वृद्धि देखी गई. 2016 में, टूर्नामेंट में पांच मैचों में सोनी मैक्स, सोनी सिक्स, सोनी सिक्स एचडी, सोनी ईएसपीएन और सोनी ईएसपीएन एचडी के 60 मैचों में 120 करोड़ का इंप्रेशन थे - इसका मतलब पुरे आईपीएल को करीब 120 करोड़ लोगों ने देखा (टीवी व्यूअरशिप मापन एजेंसी ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक)

 

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सिर्फ 2 महीने की आईपीएल की बदौलत सोनी ने पिछले दस सालों से स्पोर्ट्स बुके में अपनी जगह मुख्या स्पोर्ट्स चैनल के तौर पर बरकरार रखने में कामयाब रही है.

चाहे पिछले दस सीजंस में कितने भी  विवाद हुए हो, लेकिन आईपीएल पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ा और ये और भी मजबूत होती गयी. क्योंकि आईपीएल दर्शकों के लिए क्रिकेट से ज्यादा  'क्रिकेटमेंट' है और इसलिए शायद विवाद इसको और भी बेहतर बनाता है.

सोनी बनाम स्टार

टेलीकास्ट राइट्स की  बीडिंग में देश के दो सबसे बड़े ब्रॉडकास्टर - स्टार इंडिया और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क खुले तौर पर एक दूसरे के आमने सामने है. ये दोनों क्रिकेट में 90 प्रतिशत टेलीविजन बाजार को नियंत्रित करते हैं.  इसके अलावा डिस्कवरी के डी स्पोर्ट्स के भी मैदान में आने की संभावना है.

हाल फिलहाल में सोनी ने ज़ी टेलीफिल्म्स से टेनस्पोर्ट्स नेटवर्क को करीब 2600 करोड़ में खरीद कर स्टार स्पोर्ट्स  सामने बड़ी चुनौती पेश की है. इसका यह भी अर्थ है कि सोनी के पास अब अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी स्टार इंडिया की तुलना में एक  चैनल ज्यादा है. हाल फिलहाल में  नए खेल चैनलों के अधिग्रहण, पुन: ब्रांडिंग और लॉन्च से एक बात तो साफ़ है की सोनी बाजार में स्टार के वर्चस्व को तोड़ने के लिए प्रयासरत है. बात अगर 2017 की करें तो सोनी का बाज़ार पर कब्ज़ा करीब 55 प्रतिशत रहा है जबकि स्टार का 35 प्रतिशत. हालांकि, यहाँ यह बताना जरूरी है की इस अवधि में आईपीएल भी सोनी ने दिखाया था.

दोनों नेटवर्क के चॅनेल बुके प्रभावशाली हैं, लेकिन उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि स्टार एक बेहतर स्थिति में है क्यूंकि उनके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है. आईपीएल को छोड़कर, स्टार के पास  क्रिकेट, फुटबॉल, कबड्डी, टेनिस और बैडमिंटन में प्रमुख प्रॉपर्टी हैं, जो यकीनन भारत में शीर्ष पांच खेल हैं.

सोनी 2016 के मुकाबले वर्ष की दूसरी छमाही से भी बेहतर उम्मीद कर रहा है. चूंकि उनके पास कई बिग टिकट इवेंट्स है - जैसा कि अभी चल रहा भारत में श्रीलंका क्रिकेट , इसके अक्टूबर में यू -17 फीफा विश्व कप और साल के आखिरी में भारत बनाम दक्षिण अफ़्रीका.

डिजिटल राइट्स 

डिजिटल राइट्स में भी सोनी और स्टार के बीच ही मुक़ाबला होने की उम्मीद है. ब्रॉडकास्ट राइट्स के लिए शायद इनके सामने भले ही ज्यादा कम्पटीशन ना हो लेकिन डिजिटल राइट्स के लिए कई और भी खिलाडी होंगे. संभावित खिलाडियों में इस बार रिलायंस जियो, ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज, टाइम्स इंटरनेट, ग्रुपएम, डिस्कवरी स्पोर्ट्स, अमेज़ॅन इंडिया, फेसबुक और ट्विटर भी शामिल होंगे.

पिछली बार 2008 में आईपीएल राइट्स को लेकर काफी विवाद हुआ था.  इसी मद्देनज़र बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने 11 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय में आईपीएल मैचों के मीडिया अधिकारों की ई-नीलामी की मांग की थी. इस पर न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने बीसीसीआई से दो हफ्तों के भीतर प्रतिक्रिया मांगी है.

जानकारों का मानना है की बीसीसीआई को इस बार आईपीएल मीडिया राइट्स से करीब 16000 करोड़ से लेकर 20000 करोड़ का फायदा होगा. सोनी  ने 2008 में 10 वर्षों के लिए 8,200 करोड़ रुपये का भुगतान किया - सालाना 820 करोड़ रुपये. अगर इस बार 16,000 करोड़ रुपये में राइट्स बिकते है यानी सालाना 1600 करोड़. इतनी बड़ी राशि खर्च कर ब्रॉडकास्टर्स के लिए रेवेन्यू लाना इतना आसान नहीं होगा.  लेकिन यहाँ तो पैसे से भी ज्यादा - यह एक वजूद की लड़ाई है - ऐसे में स्टार और सोनी दोनों ही अपना पूरा दमखम लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी.

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