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आईपीएल 2017: 'नकल बॉल' के बारे में जानते हैं... नहीं तो इसे जरूर पढ़िए

आईपीएल में तेज गेंदबाजों ने अपने वेरिएशन से किस तरह छकाया है बल्लेबाजों को

FP Staff Updated On: May 12, 2017 03:02 PM IST

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आईपीएल 2017: 'नकल बॉल' के बारे में जानते हैं... नहीं तो इसे जरूर पढ़िए

मान लिया गया है कि टी 20 का मतलब है चौके-छक्के. ये भी मान लिया गया है कि गेंदबाजों का काम सिर्फ मार खाना है. ऐसे में गेंदबाजों के लिए हर कदम पर कुछ नया करना बड़ी चुनौती है. पिछले कुछ समय में गेंदबाजों ने अपने तरकश में नए-नए तीर जोड़े हैं.

तेज गेंदबाजों के लिए इन स्विंगर, आउट स्विंगर, बाउंसर, यॉर्कर, रिवर्स स्विंग, इन कटर जैसी गेंदें हमेशा से बल्लेबाजों को परेशान करती रही हैं. लेकिन टी 20 ने ऐसी गेंदों की काट ढूंढने में कामयाबी पाई, जहां बाउंड्री छोटी होती हैं. बल्ले का अंदरूनी और बाहरी किनारा गेंदबाजों के लिए हताशा और बल्लेबाजों के लिए रन ही रन लेकर आता है.

इन हालात में स्लो बॉल काम आती है. ये भी अरसे से गेंदबाजों का एक अस्त्र रहा है. याद कीजिए भारतीय गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद. उनकी धीमी गेंदों ने लगातार बल्लेबाजों को परेशानी में डाला. या उससे पहले मनोज प्रभाकर, उनकी स्लो ऑफ ब्रेक तेज गेंदबाजों के एक्शन जैसी ही होती थीं. आईपीएल में भी इस तरह की गेंदें देखी गई हैं. अंग्रेजी अखबार द हिंदू से वेंकटेश प्रसाद ने तेज गेंदों की वेरायटी पर बात की.

नकल बॉल

ये नकल हिंदी का नहीं, अंग्रेजी का शब्द है. गेंदबाज आमतौर पर कोशिश करता है कि बॉलिंग हैंड में गेंद न रखे. यानी अगर दाएं हाथ का गेंदबाज है, तो बाएं हाथ में गेंद रहती है. आखिरी समय पर गेंद दूसरे हाथ में ली जाती है. ऐसा करने के बीच कोशिश की जाती है कि बल्लेबाज को हाथ में गेंद नजर न आए.

इसके बाद बारी ग्रिप की आती है. आमतौर पर गेंदबाज जब गेंद पकड़ता है, तो हाथ की पहली उंगली यानी तर्जनी, मिडिल फिंगर यानी मध्यमा और अंगूठे का  इस्तेमाल होता है. नकल बॉल में गेंदबाज तर्जनी और अंगूठे का इस्तेमाल करता है. मध्यमा और रिंग फिंगर यानी अनामिका मुड़ी रहती हैं. ऐसे मे जब गेंद हाथ से छूटती है, तो एक्शन तो वही रहता है. लेकिन गेंद में रफ्तार नहीं आती. इससे बल्लेबाज चकमा खा जाता है.

बैक ऑफ द हैंड बॉल

SYDNEY, AUSTRALIA - MARCH 08: James Faulkner of Australia bowls a slower ball during the 2015 ICC Cricket World Cup match between Australia and Sri Lanka at Sydney Cricket Ground on March 8, 2015 in Sydney, Australia. (Photo by Ryan Pierse/Getty Images)

आमतौर पर जब गेंदबाज गेंद करता है, तो उसकी हथेली बल्लेबाज की तरफ होती है. बैक ऑफ द हैंड का मतलब है कि गेंद रिलीज होने पर हथेली का पिछला हिस्सा बल्लेबाज की तरफ होता है. उंगलियों से गेंद को रोल किया जाता है. ऐसे में घूमती हुई गेंद धीमी रफ्तार से जाती है, जो बल्लेबाज को छकाती है. वेंकटेश प्रसाद के मुताबिक हाई आर्म एक्शन की वजह उन्हें ऐसी गेंदों पर बाउंस भी अच्छा मिलता था.

स्प्लिट फिंगर स्लोअर बॉल

ये गेंद करना मुश्किल है. इसमें अंतिम लम्हे में आपको ग्रिप बदलना होता है. आमतौर पर जब तेज गेंदबाज गेंद को पकड़ता है, तो दोनों उंगलियां (तर्जनी और मध्यमा) साथ होती हैं. लेकिन जब आप स्प्लिट फिंगर बॉल करते हैं, तो दोनों उंगलियों के बीच दूरी बढ़ जाती है. यानी गेंद की सीम पर दोनों उंगलियां दूर-दूर होती हैं. इन्हीं दोनों उंगलियों से गेंद पकड़ी जाती है. ऐसे में जब गेंद की जाती है, तो उसमें रफ्तार नहीं होती. आमतौर पर दिलहारा फर्नांडो इसे बहुत अच्छी तरह करते हैं.

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