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भारत-ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट सीरीज: वो पांच टेस्ट जो भूल नहीं पाएंगे

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच क्रिकेट मुकाबलों का रोमांच

Manoj Chaturvedi Updated On: Feb 21, 2017 10:07 AM IST

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भारत-ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट सीरीज: वो पांच टेस्ट जो भूल नहीं पाएंगे

क्रिकेट के लिहाज से भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट रोमांच के चरम को छूते हैं. कुछ टेस्ट बहुत ही रोमांचक अंदाज में खत्म होते हैं, जिन्हें क्रिकेटप्रेमी सालों साल याद रखते हैं. ऐसे टेस्ट मैचों की जब चर्चा होती है तो ऐसे लगता है कि मानो ये खुद की नजरों के सामने खेले गए हों. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच भी कुछ इस तरह के टेस्ट खेले गए हैं, जिनमें से कुछ को हम यहां ले रहे हैं। -

जसू पटेल टेस्ट (कानपुर 1959)

कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में खेले गए टेस्ट को जसू पटेल टेस्ट के तौर पर याद किया जाता है. इस स्पिनर के कमाल से भारत ने ऑस्ट्रेलिया पर पहली जीत दर्ज की थी. भारत पहले बल्लेबाजी करने को उतरा तो उसके बल्लेबाज एलन डेविडसन की गेंदबाजी के आगे टिक नहीं सके और पारी 152 रन पर सिमट गई. डेविडसन ने 31 रन पर पांच विकेट निकाले. इसमें रिची बेनो ने भी चार विकेट लेकर अहम योगदान किया.

ऑस्ट्रेलिया की जवाबी पारी जसू पटेल की गेंदबाजी के आगे ध्वस्त हो गई. पर वह फिर भी मैक्डोनाल्ड और नील हार्वी के अर्धशतकों से 219 रन बनाकर 67 रन की बढ़त लेने में सफल हो गई. जसू पटेल ने जादुई गेंदबाजी करके 69 रन देकर नौ विकेट निकाले. भारतीय बल्लेबाज दूसरी पारी में जरा टिककर खेले. खासतौर पर नरी कॉन्ट्रैक्टर ने 74, रामनाथ कैनी ने 51 और बापू नादकर्णी  ने 46 रन बनाकर स्कोर को 291 बनाकर ऑस्ट्रेलिया के सामने 225 रन का लक्ष्य रखा. ऑस्ट्रेलिया टीम की क्षमता को देखकर लक्ष्य बहुत कठिन नहीं लग रहा था पर जसू पटेल को कुछ और ही मंजूर था. उन्होंने साथी स्पिनर पॉली उमरीगर के साथ उम्दा गेंदबाजी करके ऑस्ट्रेलिया की पारी 105 रन पर समेटकर भारत को 119 रन से पहली जीत दिला दी. जसू पटेल ने पूरे मैच में 124 रन देकर 14 विकेट निकाले.

टाई टेस्ट (चेन्नई 1986)

चेपक स्टेडियम का विकेट बल्लेबाजों के अनुकूल था. खेल जिस तरह से चल रहा था, उससे पहले चार दिन तो मैच की रोमांचक समाप्ति की कोई कल्पना तक नहीं कर सकता था. डीन जोंस के दोहरे शतक के सहयोग से ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 7 विकेट पर 574 रन बना डाले. भारत के जवाब में सात विकेट 245 रन पर निकल जाने पर लगा कि कहीं भारत को फॉलोआन न हो जाए. पर कपिल देव के शतक से भारत 397 रन बनाकर संकट से अपने को किसी हद तक बचाने में सफल हो गया.

ऑस्ट्रेलिया ने दूसरी पारी में तेजी से रन बनाने का प्रयास किया. पर भारतीय गेंदबाज बहुत ही नपी-तुली गेंदबाज कर रहे थे. इसलिए यह संभव नहीं हो सका. एलन बोर्डर ने पांच विकेट पर 170 रन पर पारी घोषित करके सभी को हतप्रभ कर दिया. उन्होंने भारत को 87 ओवर में 348 रन बनाने का लक्ष्य दिया. श्रीकांत ने तेजी से 39 रन की पारी खेलकर जीत की राह बनाई. गावस्कर ने 90 और मोहिंदर अमरनाथ ने 51 रन बनाकर भारत का जीत की तरफ बढ़ना तय कर दिया. लेकिन अजहर और चंद्रकांत पंडित के विकेट फटाफट निकल जाने पर भारत पर हार का खतरा बना. शिवलाल यादव ने छक्का लगाकर जताया कि जीत अभी पकड़ में है. लेकिन आखिरी से पहली गेंद पर मनिंदर के आउट हो जाने पर टेस्ट टाई हो गया.

जादुई टेस्ट (मेलबर्न- 1981)

इस टेस्ट में परिणाम निकलने का अंदाज ऐसा था कि इसे जादुई टेस्ट कहा जाने लगा. ऑस्ट्रेलिया की टीम ने सीरीज का पहला टेस्ट जीता था और दूसरे में वह जीत पाने से किसी तरह रह गई थी. इसलिए तीसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को जीत का हकदार माना जा रहा था. भारत के पहली पारी में गुंडप्पा विश्वनाथ के शतक के सहयोग से 237 रन बनाने का जब आस्ट्रेलिया ने 419 रन बनाकर जवाब दिया तो सभी ने मान लिया कि भारत की इसमें भी हार पक्की है.

भारत ने गावस्कर के 70 और चेतन चौहान के 85 रन के सहयोग से 324 रन बनाकर ऑस्ट्रेलिया को 143 रन का लक्ष्य दिया. इस सीरीज में इससे पहले ऑस्ट्रेलिया ने किसी भी पारी में 400 से कम रन नहीं बनाए थे. इसलिए उनके लक्ष्य पाने में किसी को कोई शक नहीं था. लेकिन कपिल देव की अगुआई में भारतीय गेंदबाजों ने कमाल करके ऑस्ट्रेलिया की पारी 83 रन पर समेट दी और 59 रन से टेस्ट जीत लिया. इस तरह भारत पहली बार ऑस्ट्रेलिया से उनके घर में 1-1 से सीरीज बराबर कराने में सफल हो गया.

भारत की मुश्किल जीत (मुंबई 1969)

इस टेस्ट में पलड़ा कई बार इधर उधर होने के बाद आखिर में भारत के पक्ष में झुक गया. इस टेस्ट को ऑस्ट्रेलिया 10 खिलाड़ियों के साथ खेला. नॉर्म ओ नील के मैच शुरू होने के बाद पेट खराब होने की वजह से यह दिक्कत आई. इस ऊंचे स्कोर वाले मैच में भारत ने ऑस्ट्रेलिया के 320 रन के जवाब में 341 रन बनाकर 21 रन की बढ़त बना ली. ऑस्ट्रेलिया ने दूसरी पारी में बेदी, प्रसन्ना और चंद्रशेखर की तिकड़ी से प्रभावित हुए बगैर 274 रन बनाकर भारत को 254 रन का लक्ष्य दिया. लेकिन भारत ने 122 रन पर छह विकेट खोकर जीत की उम्मीदें लगभग खो दीं. इस मुश्किल स्थिति में नवाब पटौदी जूनियर (53) ने विजय मांजरेकर और चंदू बोर्डे के साथ मिलकर भारत को दो विकेट से अप्रत्याशित जीत दिला दी.

भारत की करीबी हार (ब्रिस्बेन 1977)

इस टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के छह खिलाड़ियों ने पदार्पण किया. इनमें से एक पीटर टूही ने 82 रन की पारी खेली. बाकी बल्लेबाजों पर बेदी का प्रदर्शन इस कदर हावी रहा कि पारी मात्र 166 रन पर सिमट गई. बिशन सिंह बेदी ने 55 रन पर 5 विकेट निकाले. लेकिन भारत इस स्थिति का फायदा नहीं उठा सका और उसकी खुद की पारी 153 रन पर ध्वस्त हो गई. ऑस्ट्रेलिया ने दूसरी पारी में 327 रन बनाकर भारत को 341 रन का लक्ष्य दिया. सुनील गावस्कर ने 113 और सैयद किरमानी ने 55 रन की पारी खेलकर भारत की जीत की उम्मीदें बना दीं. पर भारतीय टीम लक्ष्य से 16 रन पहले भटक गई.

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