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जिम्मेदारियों से भागती एक शर्मिंदगी है टीम इंडिया का नंबर वन फैन

घर की टूटी छत में पिता की मदद करने के बजाय, सीरीज के लिए श्रीलंका चले आए सुधीर

Jasvinder Sidhu Updated On: Aug 06, 2017 06:48 PM IST

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जिम्मेदारियों से भागती एक शर्मिंदगी है टीम इंडिया का नंबर वन फैन

सुधीर गौतम को जानते हैं आप! अरे आपके पड़ोस के अंकल या स्कूल के साथी की बात नहीं हो रही है. अगर आपकी क्रिकेट में रुचि है और आप टीवी पर कोई भी मैच मिस नहीं करते, तो यकीनन सुधीर गौतम कभी न कभी आपके ड्राइंगरूम में भी दिखा होगा.

उसने सिर के बालों की कटाई को देश के नक्शे के रूप में बदला है. उसके सीने पर पेंट से तिरंगा बना है. माथे पर ‘इंडिया’ और सीने पर ‘मिस यू तेंदुलकर’ लिखा है. टीवी पर आप ने उसे पागलों की तरह से तिरंगा फहराते या शंख बजाते हुए देखा जरूर देखा होगा.

टीम इंडिया के लिए उसका जूनुन सिर चढ़ कर बोलता है. उसकी जेब में पैसा नहीं है. लेकिन वह हर उस देश में गया है, जहां भारतीय टीम ने सफर किया है और उसके पासपोर्ट पर वीजा की स्टंप के लिए जगह नहीं बची हैं.

यकीनी तौर पर 36 साल का सुधीर देश में क्रिकेट का नंबर फैन है. लेकिन बिहार के मुजफ्फरपुर के गांव दामोदरपुर के इस नौनिहाल की इस दुनिया के पीछे एक काला सियाह सच छिपा है.

एक ऐसा सच जो खुलासा करता है कि कैसे क्रिकेट के नाम पर एक शख्स अपने परिवार की जिम्मेदारियों से भाग कर क्रिकेट के मैदान पर सुख, सुकून और कामयाबी तलाश रहा हैं.

पिछले महीने सुधीर इंग्लैंड से टीम इंडिया का हौसला बढ़ाने के बाद अपने घर पहुंचा. करीब आठ महीने बाद उसने घर में कदम रखा था. जिस दिन वह घर पहुंचा, तेज बारिश थी जो रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी. जब रुकी तो छोटे से मकान की छत जमीन पर थी. बूढ़े बाप को उम्मीद थी कि बेटा कोई मदद करेगा. लेकिन सुधीर चुपचाप घर से निकल गया और अपने किसी जानकार के घर रुकने के बाद श्रीलंका के लिए रवाना हो गया.

इधर-उधर से पैसों का जुगाड़ करके विदेशी जमीं पर टीम के लिए शंखनाद करने वाले सुधीर बताते है, ‘मैं क्या कर सकता था. जब मैं पहुंचा तो छत गिर गई. मेरे पास कुछ नहीं है परिवार की मदद करने के लिए. इसलिए मैंने चुपचाप घर छोड़ दिया क्योंकि मुझे श्रीलंका आना था.’

यहां एक सवाल लाजमी थी. क्या आपके पिताजी ने आपको डांटा नहीं?

जवाब मिलता है, ‘नहीं, क्योंकि मेरी उनसे पिछले कई सालों से कोई बात ही नहीं होती. अगर मैं घर पर हूं और वह भी, तो मैं कभी उनके सामने नहीं जाता. न ही वह मुझ से बात करते हैं. मेरे पास भी ज्यादा समय नहीं है.’

लेकिन भाई- बहनों से तो संबंध ठीक होगा ?

सुधीर बिना किसी हिचक के जवाब देता है, ‘भाइयों से तो नहीं, कभी बहन के घर चला जाता हूं. मैं अपनी बहन और भाई की शादी में नहीं जा सका, क्योंकि इत्तेफाक ही था कि जब उनकी शादियां थीं, भारतीय टीम कोई न कोई सीरीज खेल रही थी. दस साल पहले छोटे भाई की शादी थी, लेकिन उस दिन कानपुर में मैच था,’

असल में सुधीर के पागलपन की शुरुआत 2003 में हुई जब उसने सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट खेलते देखा. वही से दिमाग में आ गया कि सचिन सर से मिलना है.

उस समय ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ त्रिकोणीय सीरीज चल रही थी. सुधीर अपने गांव से साइकिल चला कर 16 दिन के सफर के बाद मुंबई सचिन के घर के बाहर पहुंच गया. वहां से हर किसी ने उसे दौड़ा दिया.

फिर किसी ने बताया कि शाम को सचिन का मीडिया से मिलने प्रोग्राम है. सुधीर वहां पहुंचा और सारी बाधाएं पार करके न केवल सचिन तक पहुंचा बल्कि वह उनके कदमों में लेट गया. उसकी कहानी से प्रभावित हो कर सचिन ने उसे खाने पर आने के न्योता दे दिया.

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उस दिन भारतीय टीम को एक जुनूनी फैन मिल गया लेकिन बाप ने बेटा और भाई व बहनों ने अपना भाई खो दिया.

ऐसा नहीं था कि उसे एक सामान्य इंसान की तरह जिम्मेदारी बेटे की भूमिका निभाने का मौका नहीं मिला. 2004 में उसे शिक्षा मित्र के पद पर पक्की नौकरी मिली. लेकिन फरवरी में ट्रेनिंग पर जाने की बजाय उसने साइकिल से पाकिस्तान जाना जरूरी समझा, जहां भारतीय टीम कई सालों बाद खेलने वाली थी.

ठीक एक साल बाद इंडियन रेलवे के लिए उसने फिजिकल और प्रिलिमिनरी टेस्ट पास कर लिया. लेकिन जिस दिन उसे इंटरव्यू के लिए जाना था, वह दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर भारत और पाकिस्तान के बीच वनडे मैच में तिरंगा लहरा कर और शंख बजा कर टीम इंडिया का हौसला बढ़ा रहा था.

सुधीर बताता है, ‘टीम के खिलाड़ियों से मदद मिल जाती है. सचिन सर ने काफी मदद की है. विदेशी दौरे के लिए कभी कोई पैसा दे देता है. कभी कभार प्रायोजक भी मिल जाते हैं. मैं अब यहां से वापस नहीं जाने वाला. मैं आखिरी सांस तक ऐसे ही टीम के लिए झंडी फहराता रहूंगा.’

लेकिन आपके पिता को आपकी जरुरत हैआपके परिवार को आपकी जरूरत है. क्या आपको ऐसा कुछ नहीं लगता?

इन सवालों का जवाब सुधीर के पास है लेकिन वह देना नहीं चाहता. असल में वह इन सब से भाग रहा है. देखना सिर्फ इतना बाकी है कि वह कब औंधे मुंह गिरने का बात सच्चाई से रू-ब-रू होता है.

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