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भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट: पुणे, बेंगलुरु नहीं, रांची जैसी पिच है टेस्ट पर असली खतरा

पांचवें दिन ऑस्ट्रेलिया ने कुल चार विकेट खोए, ड्रॉ हुआ मैच

Peter Miller | Published On: Mar 20, 2017 05:40 PM IST | Updated On: Mar 20, 2017 05:40 PM IST

भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट: पुणे, बेंगलुरु नहीं, रांची जैसी पिच है टेस्ट पर असली खतरा

चार दिन तक दोनों टीमों को पहली पारी में 347 ओवर्स खेलते देखने के बाद मुकाबले ने चौंकाया. हैरत थी कि रांची टेस्ट इस तरह के रोमांचक अंत तक पहुंचा. भारत ने 210 ओवर बल्लेबाजी की. 152 रन की बढ़त पा ली. यहीं तय हो गया कि अगर कोई टीम जीत सकती है, तो वो भारत है. ऑस्ट्रेलिया को पांचवें दिन इतने लंबे समय बल्लेबाजी करने की जरूरत थी, ताकि मैच ड्रॉ हो जाए. वे ऐसा करने में कामयाब हुए.

हालांकि ये पांचवें दिन की पिच थी. लेकिन पुणे में पहले दिन और बैंगलुरु में तीसरे दिन के मुकाबले इस पर बल्लेबाजी आसान थी. यहां तक कि जब रवींद्र जडेजा बाएं हाथ के बल्लेबाज के लिए ऑफ स्टंप के बाहर रफ पर गेंदबाजी कर रहे थे, तो भी टर्न बहुत ज्यादा नहीं था. हालांकि ये भी जडेजा के लिए बुरी बात नहीं थी.

हमने भारत के होम सीजन में देखा है कि जहां पिच मे ज्यादा टर्न हो, वहां जडेजा उतने घातक नहीं नजर आते. वहां गेंद जरूरत से ज्यादा हरकत करती है. वो अपने बेस्ट पर तब होते हैं, जब गेंद सिर्फ उतना टर्न हो, जितनी जरूरत है. इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में हमने देखा है कि बेहतर पांचवें दिन की पिच पर भारत के गेंदबाज बहुत खतरनाक हैं.

दोनों छोर से स्पिनर्स को न लगाना अजीब फैसला

जडेजा ने दिन की शुरुआत से ही गेंदबाजी की. विराट कोहली ने दूसरे छोर से तेज गेंदबाज को गेंद दी. न तो इशांत और न ही उमेश यादव पहले घंटे के खेल में बहुत खतरनाक दिखाई दिए. इन दोनों ने लगातार ऑफ स्टंप के बाहर गेंद की. ऑस्ट्रेलियन बल्लेबाज आराम से गेंद छोड़ते रहे.

तमाम थ्योरी रहीं कि कप्तान ने ऐसा क्यों किया. लेकिन बहुत समझदारी भरा फैसला नहीं था. रविचंद्रन अश्विन भारत के बेहतरीन गेंदबाज हैं. इससे पहले भारत ने जो 11 टेस्ट खेले, उनमें अश्विन ने 76 विकेट लिए. सीरीज के पहले दो टेस्ट में उनके नाम 18 विकेट थे. भारत की जीत के सबसे अच्छे मौके उनकी गेंदबाजी पर बनते. सही है कि इशांत ने विकेट लिया. एक बार उन्होंने स्टंप्स पर गेंदबाजी का फैसला किया, तो वो ज्यादा बड़ा खतरा नजर आए. रेनशॉ ऐसी गेंद पर आउट हुए, जो थोड़ा नीची रह गई. एलबीडबल्यू होने से पहले वह बहुत अच्छी बल्लेबाजी करते दिखाई दिए.

इसके बाद भी स्टीव स्मिथ क्रीज पर थे. स्मिथ ने पहली पारी में 361 गेंदें खेली थीं और नॉट आउट रहे थे. उनके 178 नॉट आउट की पारी चेतेश्वर पुजारा की मैराथन पारी की परछाईं में दब गई. रेनशॉ के आउट होने के तीन गेंद बाद स्मिथ ने जडेजा की लाइन और लेंथ को मिस किया. उन्होंने ऐसी गेंद को छोड़ा, जो लेग स्टंप के बाहर पिच हुई थी. गेंद ऑफ स्टंप पर जाकर लगी. ऑस्ट्रेलिया ने लगभग पूरे सेशन जो अच्छा काम किया था, तो तीन मिनट के अंदर खत्म होता दिखाई दिया.

Ranchi: Indian bowler Ravindra Jadeja celebrates after dismissing Australian skipper Steve Smith during 5th day of 3rd Test Match in Ranchi on Monday. PTI Photo by Swapan Mahapatra(PTI3_20_2017_000031B)

अश्विन ने लंच ब्रेक से पहले सिर्फ एक ओवर किया. शुरू से ही वो खतरनाक लगे. ऑस्ट्रेलिया का स्कोर चार विकेट पर 63 था. ऐसा लग रहा था कि बेहद रोमांच होने वाला है. लेकिन अंत में विकेट ने अपना काम किया. चौथे और पांचवें दिन तीन सेशन थे, जिनमें कोई विकेट नहीं गिरा. विकेट पूरी तरह खराब होने की उम्मीद कभी पूरी नहीं हुई. भले ही पुणे और बेंगलुरु की विकेट को लेकर बहुत कुछ कहा गया हो, लेकिन दरअसल यहां जैसी पिच है, जो टेस्ट क्रिकेट के लिए असली खतरा है.

धीमी और नीची रहती पिच जहां गेंदबाज के लिए कुछ नहीं. ऐसी पिच, जहां स्ट्रोक प्ले लगभग नामुमकिन हो, वहां खराब क्रिकेट की तरफ ही जा सकते हैं. पांच दिन में 437.3 ओवर, 1258 रन और 25 विकेट जैसा प्रदर्शन टेस्ट को ज्यादा नुकसान पहुंचाएगा. उसके मुकाबले, जहां पहली गेंद से टर्न मिले और मैच तीन दिन में खत्म हो जाए.

हैंड्सकॉम्ब और मार्श की साझेदारी ने तय कराया ड्रॉ

श्रेय ऑस्ट्रेलिया को जाता है, जिस तरह उसने 210 ओवर फील्डिंग के बाद प्रदर्शन किया. रेनशॉ और स्मिथ के विकेट निकल गए थे. उसके बाद भी मैच को ड्रॉ कराना प्रभावशाली था. पीटर हैंड्सकॉम्ब ने अपने छोटे से टेस्ट करियर में प्रभावित किया है. सात टेस्ट में 25 साल के इस बल्लेबाज ने दो शतक और तीन अर्ध शतक जमाए हैं. इस पारी से पहले इस सीरीज में उन्हें स्टार्ट मिल रही थी. लेकिन उसे बड़ी पारी में तब्दील नहीं कर पा रहे थे. यहा उन्होंने दृढ़ता दिखाई. 200 गेंद खेलकर नॉट आउट 72 रन बनाए. अपनी टीम को वहां से ड्रॉ तक पहुंचाया, जहां से वे हार की तरफ बढ़ सकते थे.

शॉन मार्श को सीरीज मे उस्मान ख्वाजा पर तरजीह दी गई थी. उन्होंने सीरीज में अपना दूसरा अर्ध शतक जमाया. उन्होंने अपने ऊपर उठाए सवालों के लगातार जवाब दिए हैं. हैंड्सकॉम्ब और मार्श ने 62.1 ओवर्स में 124 रन जोड़े. इसने ड्रॉ तय कर दिया. मार्श और मैक्सवेल के जल्दी-जल्दी आउट होने से लोगों में थोड़ा उत्साह जरूर आया, लेकिन मैच के नतीजे के लिहाज से बहुत देर हो गई थी.

कोहली ने आखिरी लम्हों तक अपने खिलाड़ियों को मैदान पर रखा. यहां तक कि अंपायर इयन गुड भी थोड़ा हड़बड़ी में दिखे. ऐसा लग रहा था कि वो जल्दी मैदान से बाहर जाकर बीयर पीना चाहते हैं. अब टीमें धर्मशाला जाएंगी. सीरीज 1-1 से बराबर है. उम्मीद करें कि ऐसी पिच मिले, जो किसी एक टीम को वहां जीतने का मौका दे.

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