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वर्ल्डकप फाइनल से पहले हरमनप्रीत का इंटरव्यू : सपने पूरी होने जैसी थी यह पारी

सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हरमनप्रीत ने खेली थी 171 रनों की पारी

FP Staff Updated On: Jul 22, 2017 02:21 PM IST

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वर्ल्डकप फाइनल से पहले हरमनप्रीत का इंटरव्यू : सपने पूरी होने जैसी थी यह पारी

महिला वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में नॉट आउट 171 रन की पारी खेलकर सबका दिल जीत चुकी हरमनप्रीत कौर ने न्यूज18 के विमल कुमार से खास बातचीत की. इस दौरान उन्होंने कई खुलासे किए. करिश्माई पारी के बारे में उन्होंने कहा कि अब भी मुझे विश्वास नहीं हो रहा.

सवाल - इंडिया में आपकी ही धूम है. बहुत-बहुत बधाइयां आपको. हरमनप्रीत कौर: हां जी हां जी... धन्यवाद...

सवाल- ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जो पारी आपने खेली.. यकीन हो रहा है कि ये सपना है या हकीकत? हरमनप्रीत कौर: जी हां... मुझे तो अब भी सपने जैसा ही फील हो रहा है... वर्ल्ड कप फाइनल खेलना सपना लग रहा है...

सवाल- अपने रोल मॉडल सहवाग के 'सिट डाउन' वाले ट्वीट के बारे में क्या कहेंगी? हरमनप्रीत कौर: बहुत अच्छा लगा... वो ट्वीट देखकर. मैं उन्हें तब से फॉलो कर रही हूं, जब मुझे खेलना भी नहीं आता था. उन्हें बड़ी-बड़ी इनिंग खेलते देखा.. मैं सोचती थी कि मुझे भी वैसा चांस मिले. अब मैंने अच्छा किया तो उनका प्रोत्साहन मिला.

सवाल- सहवाग से कभी मुलाकात या बात हुई आपकी? हरमनप्रीत कौर: हां जी. हमारी अक्सर बात होती है. किसी टूर्नामेंट या इवेंट में जब भी जाती हूं तो बात होती है.

सवाल- कई लोगों का मानना है कि बिगबैश की वजह से आपको फायदा मिला और उसी की वजह से ऐसी धमाकेदार पारी खेल सकीं? हरमनप्रीत कौर: हां जी. जब भी किसी भी प्लेयर को बड़ा मौका मिलता है तो हमेशा रिजल्ट अच्छे ही होते हैं. बिगबैश में स्कोर करने के बाद कॉन्फिडेंस मिला.

यह भी पढ़े- महिला क्रिकेट के बारे में हर वो बात, जो आपको जाननी चाहिए सवाल- ऑस्ट्रेलिया का इतना स्ट्रॉन्ग रिकॉर्ड है और सभी मिताली के बारे में बात कर रहे थे. स्कोर 38\2 हो गया तो आप बैटिंग करने आई. उस वक्त आपके मन में क्या था? हरमनप्रीत कौर: उस वक्त तो हम सिर्फ यही सोच रहे थे कि हम कितना स्कोर कर लें कि जीत मिले. ओपनर्स अच्छा नहीं कर पाए थे. मैं समझ चुकी थी कि मुझे बड़े स्कोर के लिए जाना है. हमारे पास सिर्फ अटैक की ही ऑप्शन भी बचा था. मैंने वैसा किया भी.

सवाल- जिस अंदाज में आपने बैटिंग की. क्या आपने पहले से ही कैल्कुलेट कर रखा था.. पहले 50 रन आराम से बनाए फिर थोड़ी तेजी दिखाई और अंतिम 50 रन तो सिर्फ 17 बॉल में बना डाले. हरमनप्रीत कौर: जी हां. शुरुआत में हमारे दो विकेट जल्दी गिर गए थे. एक बड़ी पार्टनरशिप की जरूरत थी. फिर थोड़े रन बने तो मिताली दी का विकेट गिर गया. मैं शुरुआत में अटैक करती तो साथी खिलाड़ी भी वैसा ही खेलने में विकेट गंवा देते. रन भी बनाने थे. जब थोड़ा रन बना लिए तो मैंने अपने पार्टनर से कहा कि अब वो मुझे मौका दे. पार्टनर दीप्ति ने वैसा ही किया भी.. जब मुझे मौका मिला तो तेजी से रन बनाए.

सवाल- बेस्ट कॉम्प्लिमेंट किसका रहा? हरमनप्रीत कौर: पापा का. वो कब से वेट कर रहे थे कि हम कब बड़ा स्कोर बनाएंगे और इस तरह से मैच जीतेंगे. मैच जीतने के बाद उन्हें फोन किया तो वो काफी खुश थे. उन्होंने पूरा मैच देखा.

सवाल- फाइनल के लिए क्या आपकी टीम पर प्रेशर होगा? हरमनप्रीत कौर: नहीं.. हमारे ऊपर कोई प्रेशर नहीं है. हम एंजॉय कर रहे हैं. हम चाहते थे कि फाइनल खेलें और वैसा हो भी रहा है.

सवाल- लॉर्ड्स में ही 1983 में वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद मेंस टीम का भविष्य बदल गया था. अब 37 साल बाद महिला टीम भी वैसा ही खेल रही है तो क्या लगता है टीम फिर इतिहास को दोहरा पाएंगे? हरमनप्रीत कौर: बिल्कुल. इंग्लैंड को हमने लीग मैच में हराया है. हम फिर उसे हरा सकते हैं.

यह भी पढ़े- सचिन तेंदुलकर की चिट्ठी के बाद ही मिली थी हरमनप्रीत को नौकरी सवाल- आपकी टीम की सबसे बड़ी ताकत क्या है? हरमनप्रीत कौर: कोई भी प्लेयर प्लेटफॉर्म सेट कर देता है तो हम पीछे नहीं हटते. जीतकर ही आते हैं. यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है.

सवाल- इंग्लैंड को अपने घर में खेलने का एडवांटेज मिलेगा या नहीं? हरमनप्रीत कौर: हां. उन्हें थोड़ा बहुत एडवांटेज तो मिलेगा ही. लेकिन, जब आपके साथ सबकुछ अच्छा चल रहा होता है तो ये चीजें मायने नहीं रखतीं. हमारी कोशिश है कि हम ही मैच जीतें.

सवाल- यंग प्लेयर्स की सफलता में कप्तान मिताली राज का योगदान कितना रहता है? हरमनप्रीत कौर: जी उनसे और झूलन (गोस्वामी) दी से हमने काफी कुछ सीखा है. वह हमें हमेशा प्रोत्साहित करती हैं. जब भी टीम की जरूरत होती है वह तैयार रहती हैं.

सवाल- दीप्ति शर्मा जैसी यंगस्टर्स को किस तरह देखती हैं? हरमनप्रीत कौर: जी वो बहुत अच्छा कर रही है. अपनी मेहनत की वजह से ही वह हमारी टीम की मुख्य बॉलर बन चुकी है.

सवाल- दीप्ति आपको खुद के दिनों की याद दिलाती हैं क्या? हरमनप्रीत कौर: जब मैंने डेब्यू किया था 2009 में. उस वक्त हमारे सीनियर कहते थे कि एंजॉय करो. जो भी मौके मिल रहे हैं उन्हें भुनाओ. जो हमारे साथ यंगेस्टर्स हैं. उनसे भी हम वही कहते हैं. वो भी अच्छा कर रही हैं और यह सबसे अच्छी बात है.

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