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चैंपियंस ट्रॉफी 2017: पाकिस्तान के साथ बार-बार खेलना क्यों ज़रूरी है

क्रिकेट के जरिए पाकिस्तान को दिखाओ आईना

Sandipan Sharma | Published On: Jun 05, 2017 01:14 PM IST | Updated On: Jun 05, 2017 05:45 PM IST

चैंपियंस ट्रॉफी 2017: पाकिस्तान के साथ बार-बार खेलना क्यों ज़रूरी है

भारत को पाकिस्तान के साथ क्रिकेट क्यों खेलना चाहिए, इस सवाल का जवाब रविवार को चैंपियंस ट्रॉफी के मैच में मिल गया. जैसा वीरेंद्र सहवाग ने एक बार रावलपिंडी एक्सप्रेस से यानी शोएब अख्तर से कहा था कि बाप, बाप होता है, बेटा, बेटा होता है.

या कुछ यूं कहें, भारत को पाकिस्तान के साथ इसलिए खेलना चाहिए ताकि ये साबित किया जा सके की खेल जगत के महारथी हम ही हैं.

बिना कोई गोली चलाए, एक पड़ोसी देश की नाक को मिट्टी में रगड़ने का इससे बेहतर तरीका क्या हो सकता है? बिना अपने बारूद को गीला किए, एक दुश्मन देश को ये बताने कि एक शांतिपसंद जम्हूरियत और आतंक के प्रायोजक में क्या अंतर है, इससे आसान क्या संदेश हो सकता है? निस्संदेह , उसे ऐसे खेल में हराना, या यूं कहिए तबाह करना, जो उसकी नाक का सवाल है.

बकौल ग़ालिब, अब पाकिस्तान को क्रिकेट खेलते देख कर लगता है, बाज़ीचा-ए -अत्फाल है क्रिकेट का मैदान हमारे आगे, होता है शब-औ -रोज़ तमाशा हमारे आगे.

रविवार को ये साबित हो गया की क्रिकेट में अब पाकिस्तान के भीतर भारत से टकराने का माद्दा नहीं बचा. क्रिकेट अब दोनों देशों के बीच खेल, समाज, अर्थव्यवस्था और कला के बीच की दूरी का आईना बन गया है. पाकिस्तान को ये गाहे-बगाहे भारत को दिखाना चाहिए.

वक्त ने किया क्या जालिम सितम, देखिये जरा. वो भी एक मंजर था, जब भारत अपने पड़ोसी को क्रिकेट में कुछ तवज्जो देता था, थोड़ी इज्जत बख्शता था. याद कीजिये जावेद मियांदाद का वह छक्का और वो पाकिस्तान का अंदाज और अब देखिये, ये कहां आ गए हम, यूं ही साथ चलते चलते! पाकिस्तान का क्रिकेट गर्त में जा रहा है, भारत का अर्श पे. शायद दोनों मुल्कों की भी यही कहानी है.

India's Bhuvneshwar Kumar (L) celebrates the wicket of Pakistan's Ahmed Shehzad with India's captain Virat Kohli during the ICC Champions trophy match between India and Pakistan at Edgbaston in Birmingham on June 4, 2017. / AFP PHOTO / PAUL ELLIS / RESTRICTED TO EDITORIAL USE

सिलसिला-ए-हार से भी सबक नहीं लेता पाकिस्तान

भारत अब तक आईसीसी के टूर्नामेंट में पाकिस्तान को आठ बार हरा चुका है. 1990 के बाद की पीढ़ी को तो शायद अब याद ही नहीं होगा कि आखिरी बार भारत को क्रिकेट के मैदान में कब हराया था.

तो, या इलाही, ये हंगामा क्या है? अब तो बांग्लादेश की टीम भी कुछ बेहतर नज़र आती है हमें. उनकी सरजमीं भी पाकिस्तान से बेहतर नजर आती है हमें. हर मुलाक़ात का अंजाम, पाकिस्तान की हार क्यों है, अब तो ये बात कभी कभी सताती है हमे!

चैंपियंस ट्रॉफी में दोनों टीमों की रैंकिंग भी कुछ पुरानी मुलाकातों की तरह है, भारत दूसरे नंबर पर जबकि पाकिस्तान आठवें, यानी निचले पायदान पर .

रविवार को पूरे दिन पाकिस्तान के खिलाड़ी फटी फटी आंखों से भारत को खेलते देखते रहे. जब रोहित शर्मा, गब्बर धवन, युवराज सिंह, विराट कोहली और हार्दिक पंड्या, बॉल को मैदान के बहार गगनचुम्बी छक्कों के लिए भेज रहे थे, पाकिस्तान के खिलाड़ी अवाक खड़े देखते रहे. दर्शक दीर्घा में, पाकिस्तान समर्थक मुंह भी नहीं खोल पा रहे थे. वहीं भारत के समर्थक पाकिस्तान को एक बार फिर हारते देख कर जम्हाइयां लेते रहे. इतनी की अब तक जबड़े में दर्द हो रहा है.

पाकिस्तान के डर का मंज़र देखिए. भारत की पारी के आखिरी ओवर में पंड्या से पीटने के बाद, पाकिस्तान के कप्तान सरफराज खान बारिश की बूंदों में रहनुमा तलाश रहे थे. जब सिर्फ दो गेंद बची थी और बारिश गिरने लगी, सरफराज अपने हाथ हिला-हिला कर अंपायर से कुछ इस तरह मिन्नतें कर रहे थे की अब तो चलो, अब तो बचाओ, मैदान को भी और हमे भी. ये पलायन की तस्वीर देख कर इमरान खान, वसीम अकरम और इंजमाम उल हक शायद जमीन फटने की दुआ कर रहे होंगे.

Birmingham : Indian cricket captain Virat Kohli congratulates teammate Yuvraj Singh for scoring fifty runs during the ICC Champions Trophy match between India and Pakistan at Edgbaston in Birmingham, England, Sunday, June 4, 2017. AP/PTI(AP6_4_2017_000185B)

हर खेल में भारत से पिटता पाकिस्तान

एक जमाना था जब पाकिस्तान सितारों की बारात के साथ मैदान में आता था. क्या बल्लेबाज, क्या गेंदबाज, क्या कप्तान. अब भारत की टीम पूरी कायनात के सितारों का घर लगती है, और पाकिस्तान एक टिमटिमाता हुआ चिराग, जो भारत की हर फूंक से बुझ जाता है.

असल में, हर खेल का यही हाल है. हॉकी में कभी पाकिस्तान के नाम से डर लगता था. हसन सरदार, समीउल्लाह, कलीमुल्लाह और शाहबाज अहमद के ज़माने तक, पाकिस्तान का खौफ था. अब वो हॉकी में अक्सर पिटते रहते है. कबड्डी में भी ईरान से हमारा कभी कभी मुकाबला हो जाता है, पाकिस्तान की सांस तो कभी की फूल गई.

फिर क्यों ना खेलें हम पाकिस्तान से अक्सर? ऐसी टीम जो आसानी से हार जाती है, उसे क्यों न हारने का गम देने से हम महरूम रहें? क्यों न अक्सर हम साबित करें जो सहवाग कहते हैं?

मेरे खयाल में, उन्हें रोज बुलाओ, खिलाओ और दिखाओ की खेल, मेहमाननवाजी, सभ्यता में हम कितने आगे और विराट हृदय हैं. उन्हें दिखाओ, हम टैलेंट बना रहे हैं, और वह सिर्फ आतंक पनपा रहे हैं.

बुलाओ उन्हें. वो आएं, खेलें, फिल्मों में काम करें, गाने गाएं, हमारे शहर देखें, समाज देखे, डेमोक्रेसी देखें, शांतिप्रियता देखें और अपने घर जा कर हुए सॉफ्ट पावर का गुणगान करें, उसे पे रश्क करें. अगर हार जाएं तो अपने टीवी तोड़ें, अपना स्यापा करें. सोचे की दो देश साथ साथ चले, और एक कहां पहुंच गया और दूसरा कहां जा रहा है.

बुलाओ उन्हें, तब तब खिलाओ जब तक बेटा काबिल ना हो जाए. और किसी दिन हो जाए, तो हम नाज करें कि हमने चलना सिखाया.

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