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आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2017, भारत-पाकिस्तान फाइनल : हमेशा याद रहेगा 18 जून का 'चेतन शर्मा मोमेंट'

बुमराह के नो बॉल ने 18 जून 2017 को याद दिलाया 18 अप्रैल 1986 का दिन

Shailesh Chaturvedi Updated On: Jun 18, 2017 09:47 PM IST

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आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2017, भारत-पाकिस्तान फाइनल : हमेशा याद रहेगा 18 जून का 'चेतन शर्मा मोमेंट'

क्या किसी को रविवार के इस दिन 18 अप्रैल 1986 याद आया? उस दिन भी भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला हुआ था. ये रविवार है. वो शुक्रवार था. ये मुकाबला इंग्लैंड के लंदन में हुआ. वो शारजाह में हुआ था. वहां भी पाकिस्तान जीता था. यहां भी पाकिस्तान जीता है. तब भी 18 तारीख थी, यहां भी 18 ही थी. लेकिन सवाल यह है कि 18 अप्रैल 1986 की याद 18 जून 2017 को क्यों आएगी?

सवाल सही है. रिजल्ट भले ही एक जैसा हो. लेकिन हालात पूरी तरह अलग थे. वहां भारत ने पहले बल्लेबाजी की थी. यहां भारत ने पहले बल्लेबाजी की. वहां भारत की बैटिंग ने अच्छा प्रदर्शन किया था. यहां भारत की बल्लेबाजी पूरी तरह फेल हो गई. वहां भारतीय गेंदबाजों ने भी कुल मिलाकर अच्छा प्रदर्शन किया था. यहां गेंदबाज भी फेल थे. वो मुकाबला आखिरी गेंद तक गया था. अभी हुए मैच में यह याद करना आसान नहीं कि कब भारत मुकाबले में था.

ज्यादातर भारतीय अब भी वो मुकाबला भूले नहीं होंगे. 31 साल पहले का मैच क्यों याद आया, इसकी चर्चा से पहले उस मैच को फिर से याद कर लेते हैं. भारत ने पहले बल्लेबाजी की थी. 50 ओवर में सात विकेट पर 245 रन बनाए थे. उस जमाने में ये रन काफी हुआ करते थे. गावस्कर ने सबसे ज्यादा 92 और श्रीकांत ने 75 रन बनाए थे.

 

पाकिस्तान ने पारी शुरू की, तो ज्यादातर वक्त ऐसा लग रहा था कि भारत जीत जाएगा. एक शख्स था, जिसे पाकिस्तान के जीतने का यकीन था. वो थे जावेद मियांदाद. आखिरी गेंद पर चार रन बनाने थे. नौ विकेट गिर चुके थे. मियांदाद स्ट्राइक पर थे. चेतन शर्मा गेंदबाजी कर रहे थे. वो यॉर्कर करना चाहते थे. चूक गए. फुलटॉस गई. मियांदाद का शॉट बाउंड्री के बाहर गिरा. छक्का लगा. उसके बाद कभी चेतन शर्मा के लिए जिंदगी वैसी नहीं रह गई. उन्होंने वर्ल्ड कप में हैट्रिक ली, वनडे में शतक जमाया. लेकिन उन्हें आखिरी गेंद पर छक्का खाने वाले गेंदबाज के तौर पर याद किया जाता रहा.

अब वापस 18 जून पर आते हैं. इस मैच में जसप्रीत बुमराह गेंदबाजी कर रहे थे. मैच का चौथा ओवर था. फखर जमां बल्लेबाजी कर रहे थे. बुमराह ने तब तक एक ओवर में तीन रन दिए थे. तेज, उछाल भरी लेंथ बॉल पर फखर जमां के बल्ले का किनारा लगा. धोनी ने आसान कैच किया. लेकिन वो नो बॉल थी.

मुकाबला यहां से बदल गया. फखर जमां तब तीन रन पर खेल रहे थे. फखर जमां ने 114 रन बनाए. जसप्रीत बुमराह ने अगले आठ ओवर में 65 रन दिए. वो कभी उस तरह के गेंदबाज नहीं दिखे, जैसे वो हैं. बुमराह को इस भारतीय टीम में ऐसा गेंदबाज माना जाता है, जिसे मारना सबसे मुश्किल है. लेकिन एक नो बॉल ने पूरा मैच बदल दिया. पाकिस्तान का स्कोर तब आठ रन था. उसके बाद पहले विकेट की साझेदारी में 128 रन बने. उसमें सबसे बड़ा योगदान फखर जमां का था, जिन्होंने हर गेंदबाज की पिटाई की.

Britain Cricket - Pakistan v India - 2017 ICC Champions Trophy Final - The Oval - June 18, 2017 India’s MS Dhoni speaks with Jasprit Bumrah at the end of an over during which he took a wicket with a no ball Action Images via Reuters / Andrew Boyers Livepic EDITORIAL USE ONLY. - RTS17J23

बुमराह पर रन बनाना मुश्किल था, तो कुछ इसी तरह की बात चेतन शर्मा के लिए भी कही जाती थी. वो सबसे तेज गेंदबाज माने जाते थे. उस दौर के सबसे कामयाब गेंदबाज. हालांकि तबसे अब में हालात काफी बदले हैं. उसके बावजूद बुमराह वो गेंद आसानी से नहीं भुला पाएंगे.

भारत के महानतम ऑलराउंडर कहे जाने वाले कपिल देव हमेशा कहते हैं कि किसी मैच में नो बॉल करना गुनाह है. कहा जाता है कि कपिल देव नेट्स में भी कभी नो बॉल नहीं करते. उनकी बात का मतलब क्या है, ये आज हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी को समझ आ रहा होगा. खासतौर पर बुमराह को, जिनके साथ नो बॉल की समस्या रही है. लेकिन ये नो बॉल बाकियों के मुकाबले बहुत ज्यादा महंगी साबित हुई. ठीक वैसे ही, जैसे चेतन शर्मा की गेंद पर लगा छक्का क्रिकेट में लगे बाकी हजारों छक्कों के मुकाबले बेहद महंगा रहा. ये नो बॉल भारतीय नहीं भूल पाएंगे. जैसे वो छक्का नहीं भूल पाए.

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