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Exclusive: फिक्सिंग के आरोप में सजा झेल रहे वारनावीरा ने क्या कहा अपने बचाव में?

‘जानकारियां शायद दे दी होंगी लेकिन गॉल की पिच को लेकर फिक्सिंग नहीं की’

Jasvinder Sidhu Updated On: Jul 24, 2017 10:17 PM IST

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Exclusive: फिक्सिंग के आरोप में सजा झेल रहे वारनावीरा ने क्या कहा अपने बचाव में?

गॉल के बस स्टॉप के सामने वाले मेन गेट से गॉल इंटरनेशल क्रिकेट स्टेडियम में प्रवेश करते ही दाएं हाथ पर लॉबी चीफ पिच क्यूरेटर के कमरे में लेकर जाती है. दरवाजा खुलने पर वह खुद ही स्वागत करते हैं. लेकिन यह जज्बा पिच के बारे में बात शुरू होते ही फुर्र हो जाता है.

नीले समंदर के किनारे पर स्थित इस खूबसूरत गॉल क्रिकेट स्टेडियम में पिच के बारे में कुछ भी पूछना अपराध है. कारण? पिछले साल जनवरी में इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने इस स्टेडियम के क्यूरेटर जयनंदा वारनावीरा को 2015 में पिच फिक्सिंग में शामिल होने के लिए तीन साल का प्रतिबंध लगाया था. हालांकि आईसीसी ने यह कभी नहीं बताया कि वारनावीरा ने किस मैच में फिक्सिंग की या वह किसके संपर्क में था.

लेकिन उस प्रतिबंध के बाद पहली बार फर्स्टपोस्ट को दिए साक्षात्कार में वारनावीरा ने कहा कि उनके साथ जो कुछ भी हुआ, उन्हें लगता है कि वह किसी गलतफहमी का परिणाम है.

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वारनवीरा ने अपनी स्थिति को साफ करते हुए कहा, ‘जैसा कि आपने मुझे फोन किया, बाकी के पत्रकार भी मुझे फोन करके पिच के बारे में पूछते थे. मैंने कई लोगों को बताया भी. यह हो सकता है. यह मुझे लगता है. लेकिन आईसीसी का कहना है कि मैंने बुकीज को जानकारी मुहैया करवाई. यह बात बिलकुल गलत है. मैंने अपने पद पर रहते कभी कोई गलत काम नहीं किया.’

आईसीसी के सूत्रों के अनुसार वारनवीरा भारत के बुकीज के साथ संपर्क में था और वह पिच के बारे में हर अहम जानकारी मुहैया करवा रहा था. आईसीसी की एंटी करप्शन यूनिट के अधिकारी आईपी सिंह ने वारनवीरा को समन भेज कर कई बार अपनी स्थिति साफ करने को कहा लेकिन वारनवीरा एक भी मौके पर जांच समिति के सामने पेश नहीं हुए.

वारनवीरा कहते हैं, ‘मेरे जांच समिति के सामने का कोई मतलब नहीं बनता था. मुझ पर आरोप क्या है, मुझे कभी नहीं बताया गया. मैंने आईसीसी से चार्जशीट की कॉपी मांगी जो मुझे कभी नहीं मिली. मैं उसकी मदद से अपना केस तैयार करना चाहता था. इसके अलावा मेरी अंग्रेजी भी इतनी अच्छी नहीं है.’

वैसे आईसीसी के फैसले की कॉपी के अनुसार वारनवीरा को दुभाषिए की सेवा देने की पेशकश की गई थी लेकिन इसके बावजूद वो नहीं आए. वारनवीरा श्रीलंका के लिए भी खेल चुके हैं और इस समय अपने परिवार के साथ कैंडी में रहते हैं. खेल से उनका नाता पूरी तरह से खत्म हो चुका है.

वह कहते हैं कि, ‘गॉल में आ कर मैच देखने का मेरा कोई इरादा नहीं है. इस मैदान को मैंने अपना पूरा जीवन दिया लेकिन बदले में मुझे सिर्फ जलालत मिली है. इसलिए कभी मेरा मन भी गॉल स्टेडियम को लेकर विचलित नहीं होता.’

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यह भी रोचक है कि वारनवीरा को अपनी सफाई देने के लिए कई मौके मिले और तीन साल के प्रतिबंध के खिलाफ अपील करने का अधिकार भी उसके पास था. लेकिन इसमें से किसी का भी उपयोग उन्होंने नहीं किया.

वो कहते हैं, ‘मैंने इसलिए अपील नहीं कि क्योंकि मैंने कोई गलत काम नहीं किया था. मुझे लग गया था कि ये लोग मुझे टांगने का फैसला कर चुके हैं. इसलिए मैंने उनके सामने गिड़गिडाने का फैसला नहीं किया. मेरा भी आत्मसम्मान हैं. मुझे कभी भी नहीं लगता कि मैंने कुछ गलत किया हैं.’

भारतीय महाद्वीप में टेस्ट मैचों के परिणामों पर पिच का प्रभाव रहता है. ऐसा कोई भी शख्स जिसे अंदाजा है कि पिच तीसरे, चौथे या पांचवें दिन कैसा व्यवहार करेगी या पहले बल्लेबाजी करने का फायदा है या नुकसान, वह बुकीज के खजाने भरने में मददगार हो सकता है. वारनवीरा पर यही आरोप लगा और सजा हुई.

लेकिन रोचक पहलू यह भी है कि आईसीसी के जनवरी 2016 के फैसले में कहीं नहीं लिखा है कि वारनवीरा ने क्या किया या उसने किसे सूचनाएं मुहैया करवाई.

तस्वीरें - जसविंदर सिद्धू

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