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चैंपियंस ट्रॉफी 2017, फाइनल : कौन जीतेगा दो वर्ल्ड चैंपियन कप्तानों का मुकाबला

दो ऐसे कप्तानों की टीम आमने-सामने, जिन्होंने जीते हैं वर्ल्ड कप

Shailesh Chaturvedi | Published On: Jun 17, 2017 11:01 AM IST | Updated On: Jun 17, 2017 11:01 AM IST

चैंपियंस ट्रॉफी 2017, फाइनल : कौन जीतेगा दो वर्ल्ड चैंपियन कप्तानों का मुकाबला

19 फरवरी 2006 का दिन था. भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला था. वो भी फाइनल. उसमें एक टीम के कप्तान का नाम था रविकांत शुक्ला. पाकिस्तान टीम के कप्तान थे सरफराज अहमद. उससे दो साल बाद दो मार्च 2008 का दिन था. तब एक और फाइनल हुआ. इस बार टीमें थीं भारत और दक्षिण अफ्रीका. भारतीय टीम के कप्तान का नाम विराट कोहली था.

2006 से 11 और 2008 से नौ साल बीत चुके हैं. वो समय था, जब अंडर 19 टीम की कप्तानी सरफराज और विराट संभाल रहे थे. अब दोनों सीनियर टीम के कप्तान हैं. दोनों के पास अंडर 19 क्रिकेट वर्ल्ड कप का खिताब है. लेकिन इन सालों में दोनों की दुनिया बदली हुई है.

सरफराज जब रविवार को चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में उतरेंगे, तो धुंधली ही सही, लेकिन 11 साल पहले की याद तो उनके दिमाग में होगी. तब भारत ने पाकिस्तान को महज 109 रन पर ढेर कर दिया था. लेकिन उसका बाद हुआ कुछ यूं कि कि महज 18.5 ओवर में भारत 71 पर आउट हो गया. पाकिस्तान ने मुकाबला जीत लिया.

वो यह बिल्कुल नहीं चाहेंगे कि उनकी टीम 11 साल पहले की तरह 109 पर आउट हो जाए. ऐसा हुआ, तो वे उस बार की तरह इस टीम इंडिया के खिलाफ तो नहीं जीत सकते. सरफराज यह जरूर चाहेंगे कि नतीजा दोहराया जाएगा.

तबसे अब तक हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. तब दुनिया की तमाम पाकिस्तान जाया करती थीं. अब नहीं जातीं. एक मुल्क की तरह पाकिस्तान जितना बिखरा है, उसी तरह टीम के तौर पर भी बिखरा है. दूसरी तरफ भारतीय टीम लगातार बेहतर हुई है. विराट कोहली दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाजों में शुमार किए जाते हैं. ऐसे में हालात कतई पहले की तरह नहीं होंगे.

एक विकेट कीपर और दूसरा विशुद्ध बल्लेबाज है, इसलिए और किसी तरह से तो तुलना नहीं हो सकती. लेकिन सिर्फ एक बल्लेबाज के तौर पर जरूर बात की जा सकती है. हालांकि तुलना यहां भी नहीं की जा सकती. सरफराज का औसत टेस्ट में 41 के करीब है, जबकि विराट 50 के करीब हैं. वनडे में ये अंतर और बढ़ जाता है. सरफराज का औसत 36 है, तो विराट 54 के करीब हैं. ऐसे में सरफराज और विराट की तुलना उनकी टीम या उनके व्यक्तिगत खेल के लिहाज से की ही नहीं जा सकती.

एक फील्ड है, जिसमें तुलना हो सकती है. वो है कप्तानी. दोनों के पिछले मैच देखें, तो दोनों का एक मास्टर स्ट्रोक दिखता है. इंग्लैंड के खिलाफ शुरुआती विकेट लेने के बाद सरफराज अपने स्पिनर्स को लाए थे. उसकी दो वजह थीं. एक, इंग्लैंड की टीम स्पिनर को अच्छा नहीं खेलती. दूसरी इस्तेमाल की हुई पिच पर स्पिनर को लाकर वे गेंद को ‘तैयार’ कर सकते थे, जिससे रिवर्स स्विंग मिले.

सरफराज के दोनों तीर निशाने पर लगे. या कहें कि एक तीर से दो शिकार किए. स्पिनर्स ने अच्छी गेंदबाजी की. इंग्लैंड को बांधे रखा. उसके बाद जब तेज गेंदबाज आए, तो गेंद रिवर्स स्विंग हो रही थी. यही वो समय था, जब हसन अली ने उस बॉलिंग अटैक की याद दिला दी, जिसमें वसीम अकरम और वकार यूनुस हुआ करते थे.

विराट का मास्टर स्ट्रोक बांग्लादेश के खिलाफ था. हालांकि इंग्लैंड के मुकाबले बांग्लादेश को कमजोर माना जाना चाहिए. लेकिन तमीम इकबाल खतरनाक दिख रहे थे, जब केदार जाधव को गेंद दी गई थी. जाधव की गेंदों ने बांग्लादेश के मुख्य बल्लेबाजों को ललचाया और विकेट गंवाने पर मजबूर कर दिया.

रविवार को भी इन दोनों की कप्तानी स्किल का मुकाबला होगा. सरफराज अपने गेंदबाजों का कैसा इस्तेमाल कर पाते हैं, ये खास बात होगी. भारत की बैटिंग बहुत मजबूत है. ऐसे में भारत की बैटिंग या पाकिस्तान की बॉलिंग में से जो हावी होगा, वही जीतेगा. ऐसे में सरफराज का मास्टर स्ट्रोक देखना रोचक होगा. दूसरी तरफ, विराट ने पिछले मैच में दिखाया है कि उनका बल्ला पूरे रंग में है. उनका बल्ला चला, तो बाकी किसी मास्टर स्ट्रोक की जरूरत नहीं है.

मुकाबला दो ऐसी टीमों में है, जिनमें से एक को खिताब के सबसे बड़े दावेदारों मे गिन रहे थे. दूसरे को कोई भाव नहीं दे रहा था. दो ऐसे कप्तानों में है, जिनमें से एक पर पूरी दुनिया की निगाह रहती है. दूसरा हमेशा तलवार के साए तले काम करता है. फिर भी दोनों अंडर-19 विश्व कप चैंपियन हैं. दोनों एक बार फिर चैंपियन बनना चाहेंगे.

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