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क्रिकेट पर गौरक्षकों का आतंक, आपके सीने पर लगने वाली है क्रिकेट बॉल

अगले कुछ महीनों में क्रिकेट की गेंद के दाम तीन से चार गुणा बढ़ने का अनुमान हैं

Jasvinder Sidhu | Published On: Jun 01, 2017 11:53 AM IST | Updated On: Jun 01, 2017 04:37 PM IST

क्रिकेट पर गौरक्षकों का आतंक, आपके सीने पर लगने वाली है क्रिकेट बॉल

अगर आप या आपके परिवार में बेटा या बेटी क्रिकेट खेलते हैं या आपकी अपनी क्रिकेट एकेडमी है तो यह एलर्ट आपके लिए है. सरकार के गाय व भैस की खरीद फरोख्त पर बैन लगाने के बाद अगले कुछ महीनों में क्रिकेट की गेंद के दाम तीन से चार गुणा बढ़ने का अनुमान हैं. यानी जो गेंद अभी दो सौ में मिल रही है, अगले कुछ महीनों में इसके लिए छह सौ से आठ सौ भी देने पड़ सकते हैं.

मेरठ और जालंधर से मिल रही खबरों के अनुसार कई यूनिटों में क्रिकेट बॉल बनाने के लिए जरुरी हाइड यानी खाल नहीं है और उनमें काम रुक गया है.

मेरठ में हर दिन करीब 50 दर्जन क्रिकेट बॉल बनाने वाली यूनिट के मालिक बताते हैं, ‘कारीगर खाली बैठे हैं क्योंकि मेरे यहां काम रुक गया है. हाइड मिल नहीं रही है. इसे बैन के बाद मेरठ की फैक्ट्रियों में काम करने वाले हजारों कारीगरों का क्या होगा, यह भगवान ही बता सकता है. जिस तरह के हालात हैं, हम लोग अपना भी मुंह नहीं खोल सकते.’

फर्स्ट पोस्ट हिंदी ने कई यूनिट के मालिकों से इस बारे में बात की लेकिन किसी ने भी रिकॉर्ड पर आने से इनकार कर दिया. इनमें से कुछ को डर था कि इस बारे में बोलने पर यूपी में सक्रिय कुछ गौरक्षक एनजीओ उनकी यूनिटों को नुकसान पहुंचा सकती हैं.

सरकार ने 23 मई को अध्यादेश जारी करके कटाई के लिए गाय और भैसों की बिक्री पर पूर तरह से प्रतिबंध लगा दिया है.

क्रिकेट बॉल के लिए गाय लेदर ही उपयुक्त

सॉफ्ट होने के कारण क्रिकेट बॉल के लिए गाय लेदर ही उपयुक्त माना जाता है. लेकिन बाजार में हाइड केवल उन ही जानवरों की ही खाल उपलब्ध थी जो अपनी दुध देने की क्षमता गंवा देती थीं और उनका प्रयोग वैध रुप से मांस व खाल के लिए किया जाता था लेकिन नए नियम के अनुसार कटाई के लिए गाय की बिक्री प्रतिबंधित हो गई है.

क्रिकेट की गेंद बनाने में उपयुक्त खाल तैयार करने के लिए उसे ‘एल्लम टन्ड’ प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है और काउ लेदर ही उसके लिए उपयुक्त मानी जाती है.

भैंसे की खाल मोटी होती है और यह किसी भी तरह से गेंद बनाने के लायक नहीं है. कुछ यूनिटों इससे गेंद बनाती भी हैं. लेकिन कड़ा लेदर होने के कारण खिलाड़ियों के हाथों में चोटें लगने की संभावना मजबूत है. इसके अलावा इस भैंसे की खाल की गेंद की बनाने के में समय भी ज्यादा लगता है.

यानी एक कारीगर अगर दिन में गाय की खाल से दस बॉल बनाता है, भैंस की खाल के छह ही बन पाएंगी.

गौरक्षकों के कारण बढ़ी कीमत?

क्रिकेट का सामान बनाने वाली एक अन्य कंपनी के निदेशक बताते हैं, ‘गौरक्षकों के हमलों के कारण पिछले एक-दो साल में हाइड की एक शीट का दाम 600-700 से बढ़कर 2500-3000 तक पहुंच गया है. इस नए आदेश के बाद क्या होगा, किसी को नहीं पता. हमारे लिए इंग्लैंड या अन्य देशों के आयात ही आखिरी रास्ता है लेकिन इससे गेंद के दोमों में आग लगना तय है.’

मौजूदा स्थिति की मार सबसे अधिक उन छोटी यूनिटों पर पड़ रही है जो गली लोकल लेबल पर खेले जाने वाले क्रिकेट मैचों के लिए सस्ती क्रिकेट गेंदें बनाते हैं.

एक अन्य यूनिट के मैनेजर ने बताया,’बड़ी और निर्यात करने वाली यूनिटों के पास पैसे की कोई कमी नहीं है. वे खाल का आयात करने की स्थति में हैं. लेकिन सस्ती गेंद बनाने वाली यूनिटें मर जाएंगी. अभी सीजन शुरु होना है और अभी से ही हाइड की कमी शुरु हो गई है.’

क्रिकेट बॉल इंडस्ट्री में गौरक्षकों के हमलों के कारण पिछले एक साल के अवैध रुप से हाइड बेचने वालों की सक्रियता भी मेरठ से लगभग खत्म हो गई है. इसके कारण बॉल के दाम पहले से ही साल भर में दोगुने बढ़ चुके हैं लेकिन नए नियम आने के बाद क्रिकेट बॉल इंडस्ट्री के हालात और खराब होने का आंकलन लगा रहे हैं.

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