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बुधवार को नेहरा खेलेंगे अपना आखिरी इंटरनेशनल मैच, इस कारण जाना जाएगा ये खिलाड़ी

नेहरा, अजहरुद्दीन, धोनी, द्रविड़, गंभीर, गांगुली और सहवाग की कप्तानी में खेल चुके हैं

Lakshay Sharma Updated On: Oct 31, 2017 07:03 PM IST

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बुधवार को नेहरा खेलेंगे अपना आखिरी इंटरनेशनल मैच, इस कारण जाना जाएगा ये खिलाड़ी

टीम इंडिया के तेज गेंदबाज आशीष नेहरा 1 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह देंगे. नेहरा अपना आखिरी मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने होम ग्राउंड दिल्ली के फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में खेलेंगे.

आशीष नेहरा मोहम्मद अजहरुद्दीन से लेकर टीम इंडिया के वर्तमान कप्तान विराट कोहली की कप्तानी में खेल चुके हैं. इनके अलावा नेहरा ने धोनी, द्रविड़, गंभीर, गांगुली और सहवाग की कप्तानी में भी टीम इंडिया की ओर से खेल चुके हैं. बता दें कि आशीष नेहरा टीम इंडिया में इस समय सबसे उम्रदराज खिलाड़ी है और मौजूदा भारतीय कप्तान विराट कोहली से वह 10 साल बड़े है.

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई टी20 सीरीज में जब नेहरा को जगह दी गई तो क्रिकेट प्रेमियों से लेकर कई क्रिकेट विशेषज्ञ हैरान थे. 38 साल के नेहरा ने श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 1999 से अपने सफर की शुरुआत की.

वहीं 2001 में नेहरा ने अपना पहला वनडे मैच जिम्बाब्वे के खिलाफ खेला था जिसमें उन्होंने 2 विकेट लिए थे. नेहरा ने टीम इंडिया को कई मैच अपनी गेंदबाजी के दम पर जिताए. ऐसे में मन में एक सवाल उठता है कि आखिर बाकी गेंदबाजों की भीड़ में क्यों खास है आशीष नेहरा? चलिए आपको बताते हैं कि आखिर ऐसा क्यों है.

2003 वर्ल्डकप में इंग्लैंड के खिलाफ आया नेहरा का तूफान

2003 वर्ल्ड कप में साउथ अफ्रीका में भारत और इंग्लैंड के बीच एक अहम मुकाबला खेला गया. इस मैच में टीम इंडिया ने अपनी पहली पारी में 250 रन बनाए. इस मैच को भारतीय टीम को हर हाल में जीतना जरूरी था. जिसके बाद कप्तान सौरव गांगुली ने गेंद आशीष नेहरा को थमाई क्योंकि कप्तान चाहते थे कि 250 रनों का बचाव किया जा सके.

नेहरा ने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया और 10 ओवर में सिर्फ 23 रन देकर 6 बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाया. इस मैच में गेंदबाजी के दौरान नेहरा को उल्टी भी आई थी. एक वक्त तो ऐसा लग रहा था कि आशीष अपना स्पैल खत्म नहीं कर पाएंगे, लेकिन उन्होंने मैदान पर ही कुछ केले खाए और टीम इंडिया को जीत दिलाई.

मैच से पहले भी नेहरा की हालत बहुत खराब थी. चोट के कारण उनके पैर में इतनी सूजन थी कि वह जूते तक नहीं पहन पा रहे थे लेकिन मैच के दिन उन्होंने मौजो के बिना जूते पहने और मैच में धमाल किया.

किस बात का है आशीष नेहरा को मलाल 

उनका क्रिकेट के मैदान पर सबसे खराब पल भी उसी वर्ल्डकप में आया था. नेहरा को इसी विश्व कप के फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के हाथों मिली हार का बहुत मलाल है. उन्होंने कहा है कि अपने 20 साल के लंबे करियर में उन्हें बस इसी बात का दुख रहा है।

नेहरा ने कहा कि ' काफी अच्छा सफर रहा लेकिन शायद एक बात का दुख रहेगा. वो ये कि 20 साल के इस करियर में अगर 2003 विश्व कप के फाइनल में मैं भारतीय टीम के लिए चीजों को बदल पाता. खैर ये सब किस्मत की बात है. नेहरा कहते हैं कि मैं ज्यादा भावुक इंसान नहीं हूं.

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जिस तरह 20 साल से अब तक मेरी जिंदगी शानदार रही है उम्मीद है इसी तरह से आगे भी रहेगी. अपनी कोचिंग में भारतीय टीम को 2011 का विश्व कप दिलाने वाले गैरी कर्स्टन की भी नेहरा काफी तारीफ करते हैं. कर्स्टन और धोनी की जुगलबंदी को शानदार बताया

नेहरा बेहतरीन टेस्ट गेंदबाज थे लेकिन चोटों ने उन्हें ऐसा घेरा कि वह ज्यादा टेस्ट नहीं खेल पाए. इसके बावजूद उनका करियर शानदार रहा. काश वह और ज्यादा टेस्ट मैच खेल पाते. जो भी उनके साथी रहे हैं उनसे पूछिये तो पता चलेगा कि वह कितनी मेहनत करते थे लेकिन चोट पर किसी का बस नहीं चलता.

वर्ष 1999 में इंटरनेशनल क्रिकेट का आगाज करने वाले 'नेहराजी' करीब 20 साल के करियर में लगातार चोटों के कारण 17 टेस्‍ट, 120 वनडे और 26 टी20 मैच ही खेल पाए.

टेस्‍ट में 44, वनडे में 157 और टी20 में 34 विकेट उनके नाम पर दर्ज हैं. नेहरा वर्ष 2011 में वर्ल्‍डकप चैंपियन बनी भारतीय टीम के भी सदस्‍य थे. यह अलग बात है कि पाकिस्‍तान के खिलाफ मोहाली में हुए सेमीफाइनल में बेहतरीन प्रदर्शन करने के बाद वे चोटिल हो गए थे और फाइनल मैच नहीं खेल पाए थे.

 

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