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रागदारी: जानिए क्या होता है शास्त्रीय संगीत में घरानों का मतलब

भारतीय शास्त्रीय संगीत के घरानों की कहानियां

FP Staff Updated On: Jul 08, 2017 11:52 AM IST

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रागदारी: जानिए क्या होता है शास्त्रीय संगीत में घरानों का मतलब

शास्त्रीय संगीत में घरानों की परंपरा बड़ी पुरानी है. आपने जब भी किसी शास्त्रीय कलाकार का नाम सुना होगा ज्यादातर मौकों पर उसके साथ एक घराने का नाम भी सुना होगा.

घराना शब्द हिंदी के घर और संस्कृत के गृह शब्द से बना है. क्या आपने कभी सोचा कि इन घरानों का मतलब क्या है? दरअसल इस सवाल का जवाब बहुत आसान है. घराने से सीधा मतलब है एक विशेष किस्म की गायकी.

भारतीय शास्त्रीय संगीत में तमाम घराने हुए हैं. हर घराने में थोड़ा बहुत फर्क है. ये फर्क गायकी के अंदाज से लेकर बंदिशों तक में दिखाई और सुनाई देता है. इस नई सीरीज में हमने आपको पिछली बार ख्याल गायकी के बारे में बताया था.

आइए आज आपको बताते हैं कि ख्याल गायकी में कौन-कौन से घराने मशहूर हुए. उनकी क्या खासियत है और उनके बड़े कलाकार कौन-कौन से हैं?

सबसे पुराना माना जाता है ग्वालियर घराना

ख्याल गायकी में ग्वालियर घराने को सबसे पुराना माना जाता है. इस घराने को शुरू करने वालों में नत्थन पीरबख्श का योगदान अहम माना जाता है.

ग्वालियर घराने की गायकी में स्वरों की बढ़त सरल होती है. इस घराने की बड़ी पहचान गंभीर किस्म की गायकी है. गंभीर किस्म की पहचान के पीछे पारंपरिक बंदिशों का गाया जाना है.

किसी भी राग के बीच में पेश की जाने वाली तानें भी इस घराने में बड़ी विविधता के साथ पेश की जाती हैं. संगीत सम्राट विष्णु दिगंबर पलुस्कर इसी घराने से थे.

आपको बता दें कि विष्णु दिगंबर पलुस्कर महान कलाकार डीवी पलुस्कर के पिता थे. उनके अलावा इस घराने के बड़े कलाकारों में पंडित बालकृष्ण करंजिकर, पंडित ओंकार नाथ ठाकुर, वीणा सहस्रबुद्धे और मालिनी राजोलकर का नाम लिया जाता है.

भजन सम्राट अनूप जलोटा के मुंह से आपने ये भजन सैकड़ों बार सुना होगा आज आपको पंडित ओंकार नाथ ठाकुर का गाया- मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो सुनाते हैं.

बेहद लोकप्रिय है शास्त्रीय गायकी का किराना घराना

किराना घराने की बात करने से पहले आपको बताते चलें कि शास्त्रीय गायकी के भारत रत्न से सम्मानित पंडित भीमसेन जोशी किराना घराने से ही थे.

किराना घराना का प्रतिनिधि गायक अब्दुल करीब खान को माना जाता है. महान कलाकार सवाई गंधर्व भी किराना घराने से ही थे. इस घराने की गायकी में मींड और गमक को वीणा के सुर की तरह पैदा किया जाता है. सुरों की साधना इस घराने के कलाकारों की पहचान है.

ऐसा भी माना जाता है कि इस घराने के गायक तानपुरे को ‘प’ की बजाए ‘नी’ पर ट्यून कराते हैं. ये किराना गायकी की पहचान है. हीराबाई बरोड़कर, गंगूबाई हंगल और प्रभा आत्रे जैसे जाने माने और विश्व विख्यात कलाकार किराना घराने की परंपरा को बहुत आगे ले गए हैं. आपको सवाई गंधर्व की एक पुरानी रिकॉर्डिंग सुनाते हैं.

आगरा का भी है अपना शास्त्रीय घराना

फैयाज खान साहब को आगरा घराने की शुरुआत करने वाला माना जाता है. दरअसल आगरा घराने की पहचान पहले ध्रुपद गायकी में थी बाद में ख्याल गायकी में भी इस घराने के कलाकारों ने अपनी अलग पहचान बनाई.

आगरा घराने की गायकी को दमदार गायकी कहा जाता है क्योंकि इस घराने के गायक स्वरों में दमदार प्रस्तुति देते हैं. इस घराने की गायकी में लयकारी का महत्व काफी ज्यादा है. इस घराने के बड़े कलाकारों में सीए व्यास, जितेंद्र अभिषेकी, विजय किचलू, सुमति मुटाटकर का नाम लिया जाता है.

उस्ताद बड़े गुलाम अली खान वाला पटियाला घराना

पटियाला घराना ख्याल गायकी के बड़े घरानों में गिना जाता है. इस घराने के प्रतिनिधि गायकों में अली बख्श और फतेह अली खान की गिनती होती है.

हालांकि इस घराने की लोकप्रियता बड़े गुलाम अली खान के आने के बाद से बढ़ी. इस घराने में ठुमरियों की गायकी पर महारत हासिल है.

इस घराने की गायकी में भावपक्ष पर भी काफी जोर दिया जाता है. मंद्र, मध्य और तार यानी तीनों सप्तक में इस घराने के कलाकार अपनी द्रुत ताने प्रस्तुत करते हैं.

इस घराने के मौजूदा कलाकारों में पंडित अजय चक्रवर्ती का नाम पूरी दुनिया में विख्यात है. उनके अलावा परवीन सुल्ताना भी खासी मशहूर हैं. बड़े गुलाम अली खान का जिक्र हुआ है तो उनकी ठुमरी सुने बिना कैसे आगे बढ़ सकते हैं. ठुमरी के बोल हैं- याद पिया की आए

मेवाती घराने की पहचान हैं पंडित जसराज

इस घराने के प्रतिनिधि गायक नाज़िर खान थे. इस घराने की गायकी में वैष्णव भक्ति का प्रभाव भी सुनने को मिलता है. इस घराने के गायक आम तौर पर अपनी गायकी खत्म करने से पहले एक भजन जरूर सुनाते हैं.

विश्वविख्यात कलाकार पंडित जसराज इस घराने के मौजूदा प्रतिनिधि कलाकार हैं. नए कलाकारों में पंडित संजीव अभ्यंकर का नाम भी बड़े अदब से लिया जाता है.

जयपुर- अतरौली घराने की देन हैं एक से बढ़कर एक कलाकार

शास्त्रीय संगीत की दुनिया में मल्लिकार्जुन मंसूर, केसरबाई, किशोरी अमोनकर, श्रुति साडोलकर, पद्मा तलवलकर और अश्विनी भीड़े देशपांडे जैसे नामचीन कलाकारों की क्या कद है, ये बताने की जरूरत नहीं है. ये सभी कलाकार अतरौली घराने के हैं.

इस घराने की शुरुआत महान कलाकार अल्लादिया खान ने की थी. इस घराने की गायकी को कठिन इसलिए भी माना जाता है क्योंकि इसमें वक्र स्वर समूहों को प्रस्तुत किया जाता है. आपको हाल ही में अपने लाखों चाहने वालों को अलविदा कह गईं किशोरी ताई की गायकी सुनाते हैं.

रामपुर सहसवां घराना भी है गायकी का मशहूर घराना

भारतीय शास्त्रीय संगीत के घरानों में रामपुर सहसवां का भी विशेष महत्व है. इसके प्रतिनिधि गायक उस्ताद इनायत हुसैन खान को माना जाता है. इस घराने में कलाकार गायकी में एक एक सुर के साथ बढ़त लेते हैं.

आलाप की शुरुआत बंदिश के साथ ही करने वाले रामपुर सहसवां के कलाकारों ने बंदिश के साहित्य पर बहुत ध्यान दिया है.उस्ताद इनायत खान के अलावा उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान, उस्ताद निसार हुसैन खान और राशिद खान इस घराने के प्रमुख गायक हैं.

राशिद खान इस वक्त देश के सबसे नामचीन शास्त्रीय गायकों में से एक हैं. उन्होंने शास्त्रीय गायकी को बड़ी बुलंदियों तक पहुंचाया है.

ये सीरीज शास्त्रीय संगीत पर आधारित है. यहां हम शास्त्रीय संगीत की परंपराओं और तमाम दूसरे पहलुओं पर बात करते हैं. लेकिन आज गुस्ताखी के साथ उस्ताद राशिद खान का गाया वो बेहद लोकप्रिय फिल्मी गाना आपको सुनाते हैं जिसके बाद उनका नाम संगीत सुनने वाले हर शख्स की जुबां पर आ गया था.

हमें आपके सुझावों का इंतजार रहेगा. अगली बार शास्त्रीय गायक की एक और शैली के बारे में आपको दिलचस्प जानकारियां देंगे.

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