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जन्मदिन: अपने बच्चों को सम्पत्ति क्यों नहीं देंगे बिल गेट्स

दुनिया बदलने वाले बिल गेट्स को अब गूगल से कड़ी चुनौती मिल रही है

Animesh Mukharjee Animesh Mukharjee Updated On: Oct 28, 2017 12:58 PM IST

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जन्मदिन: अपने बच्चों को सम्पत्ति क्यों नहीं देंगे बिल गेट्स

बिल गेट्स, ये नाम सुनते ही दिमाग में पहली प्रतिक्रिया आती है, दुनिया का सबसे अमीर आदमी. बिल गेट्स अपनी इस सत्ता पर बहुत लंबे समय से काबिज हैं. क्या आपने सोचा है कि माइक्रोसॉफ्ट ने ऐसा क्या किया जो दुनिया भर के पैसे का सबसे बड़ा हिस्सा कैलिफोर्निया की इस कंपनी के पास जाता है.

दुनिया बदलने का सपना

1970 के दशक में बिल गेट्स और पॉल एलन ने एक सपना देखा. कम्प्यूटर इतना सहज हो जाए कि हर घर में एक हो. ये वैसा ही है जैसे आज कोई सोचे कि हर छत पर एक हवाई जहाज हो. दो स्कूल के लड़के ऐसी बात करते थे तो लोगों की क्या प्रतिक्रिया होगी आप समझ सकते हैं. बिल अपनी धुन के पक्के थे और कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग के महारथी थे.

स्कूल के समय में ही बिल ने प्रोग्रामिंग पर पकड़ बना ली थी. उनके स्कूल ने उनसे बच्चों के बैठने का प्लान बनाने के लिए एक प्रोग्राम लिखने को कहा. बिल ने ऐसा किया साथ में ये भी सुनिश्चित किया कि क्लास की सबसे सुंदर लड़की की सीट उनके पास रहे. माइक्रोसॉफ्ट डॉस और बेसिक ने पर्सनल कंप्यूटिंग को बहुत आसान बना दिया. इसके बाद विंडोज़ के साथ तो दुनिया ही बदल गई. बैंकिंग और एयर लाइन से लेकर स्कूल में प्राइमरी क्लास तक हर जगह कंप्यूटर आ गया. इस कंप्यूटर में माइक्रोसॉफ्ट का विंडोज़ और तमाम दूसरे सॉफ्टवेयर.

बिल ने कॉलेज बीच में ही छोड़ दिया था. इस तथ्य से जो लोग उत्साहित हो जाते हैं उन्हें याद रखना चाहिए, बिल ने सैट परीक्षा में 1600 में 1590 नंबर लाकर हार्वर्ड में ऐडमिशन लिया था.

दोस्ती में दरार

माइक्रोसॉफ्ट दो लोगों का सपना था. बिल गेट्स और पॉल एलन. जब कंपनी मुनाफा कमाने की स्थिति में आई तो बिल ने कहा चूंकि ज्यादा मेहनत वो करते हैं तो बंटवारा 60 : 40 का होगा. समय के साथ ये 70 और तीस का हो गया. देखते ही देखते माइक्रोसॉफ्ट और विशाल बनती गई और बिल की पॉल से दूरी भी बढ़ती गई. कड़वाहट इतनी बढ़ गई कि बिल ने पॉल से बात करना शुरू कर दिया. पॉल की जिंदगी में तमाम परेशानियां आईं, बिल ने पॉल से बात नहीं की. पॉल इस बात से बुरी तरह टूट गए. माइक्रोसॉफ्ट के शेयर के चलते पॉल भी बहुत अमीर हैं मगर दोनों दोस्तों को अपनी सबसे अजीज दोस्ती टूटने का गम आज भी है.

क्या हिलेगा माइक्रोसॉफ्ट का सिंहासन

बिल गेट्स की कल्पना थी कि हर घर में एक कंप्यूटर हो. मगर मोबाइल फोन ने हर जेब में कंप्यूटर आ गया. इस हर फोन में था गूगल. गूगल न सिर्फ आज सर्च इंजन के तौर पर हर सिस्टम की मूल ज़रूरत है बल्कि ऐंड्रॉएड के चलते दुनिया भर के फोन की आत्मा बन गया है. ठीक वैसे ही जैसे विंडोज़ पर्सनल कंप्यूटर के लिए है. बिल गेट्स इसको पकड़ने में थोड़ा सा चूक गए.

आज कंप्यूटर बीते जमाने की तकनीक हो गया है. महत्व उसमें मौजूद इंटरनेट और ऐप्लीकेशन का है. गूगल इसका सरताज है. गूगल ने दुनिया भर के बेहतरीन दिमागों को अपने पास जमा करने में माइक्रोसॉफ्ट की ऐसी-तैसी कर दी. गूगल कहता माइक्रोसॉफ्ट अधेड़ बूढ़े जैसा है और गूगल आपके हम-उम्र ऊर्जावान लड़के की तरह. आप किस के साथ काम करेंगे?

दोनों कंपनियों की जंग बड़ी रोचक रही. माइक्रोसॉफ्ट ने नोकिया को खरीदा. विंडोज़ फोन को किसी जमाने में बेहद लोकप्रिय रहे नोकिया के साथ मिलाकर मोबाइल फोन की दुनिया में धाक जमाने की कोशिश की. इसमें दोनों को ही नुक्सान उठाना पड़ा. विंडोज़ फोन मार्केट से खारिज हो गया. इसके साथ भी नोकिया भी बाज़ार में बिलकुल डूब गई.

आने वाले समय में निश्चित तौर पर माइक्रोसॉफ्ट को गूगल और फेसबुक से अपनी सत्ता बनाए रखने की लड़ाई लड़नी पड़ेगी. मगर बिल गेट्स अपने जीवन काल में शिखर पर ही रहेंगे. हिंदी की कहावत है कि हाथी कितना भी कमजोर हो जाए भैंसे से ज्यादा ताकतवर रहेगा. वैसे बिल ने अपनी ज्यादातर संपत्ति दान कर दी है. उनकी वसीयत के हिसाब से उनके बच्चों को 10 मिलियन डॉलर ही मिलेंगे. बिल का मानना है कि बच्चों के अच्छे भविष्य के लिए उन्हें ज्यादा पैसा नहीं देना चाहिए. वैसे बिल गेट्स की बात हो तो 10 मिलियन डॉलर एक छोटी ही रकम है.

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