S M L

मदर्स डे: वे ऐतिहासिक मांएं जिनके फैसले उनके बच्चों को पड़े भारी

कुछ ऐसी मम्मियों के बारे में पढ़ते हैं जिनके फैसलों या हरकतों का खामियाजा उनके बच्चों को भुगतना पड़ा

Animesh Mukharjee | Published On: May 14, 2017 10:05 AM IST | Updated On: May 14, 2017 10:05 AM IST

मदर्स डे: वे ऐतिहासिक मांएं जिनके फैसले उनके बच्चों को पड़े भारी

मां के नाम पर हम सब कितनी प्यार भरी और इमोशनल बातें करने लगते हैं. मां होती भी ऐसी है. मगर हम सब जानते हैं कि मां-बेटे का रिश्ता हमेशा वैसा नहीं होता जैसा अक्सर शेरो-शायरी में लिखा जाता है.

हिंदू माइथोलॉजी से कैकेयी का उदाहरण तो सब जानते हैं, इसी तरह क्रिश्चियनिटी की माने तो हम सबके स्वर्ग से निकाले जाने की जिम्मेदार दुनिया की पहली मां ईव हैं.

इस मदर्स डे पर कुछ ऐसी मम्मियों के बारे में पढ़ते हैं जिनके फैसलों या हरकतों का खामियाजा उनके बच्चों के साथ-साथ दुनिया भर के लोगों को भुगतना पड़ा.

माहम अनगा

बादशाह अकबर को पैदा जरूर हामिदा बेगम ने किया था. तमाम मुश्किल हालातों के बीच उसे बड़ा माहम अनगा ने ही किया था. अकबर ने भी अपनी धाय मां को बहुत ज्यादा प्रेम और सम्मान दिया था.

1560 में अकबर के संरक्षक बैरम खान की मौत हो गई. इसके बाद माहम अनगा ने अकबर को पूरी तरह से अपनी कठपुतली बनाने का प्रयास किया. इतिहासकार अकबर के शासन के इस समय को ‘पेटीकोट गवर्नमेंट’ भी कहते हैं.

Akbar

इसी दौरान माहम के सगे बेटे का शासन में दखल जरुरत से ज्यादा बढ़ गया. उसने अकबर के खास सेनानायक अतग खान की हत्या कर दी. अकबर ने अपनी धाय मां के बेटे को किले की दीवार से फिंकवा दिया. उसे फिर उठाकर ऊपर लाया गया और फिर फेंका गया. ये सिलसिला तब तक चला जब तक उसकी मौत नहीं हो गई.

माहम ने अकबर से कहा कि तुमने अच्छा किया. बेटे को खोने के सदमे से माहम की कुछ ही समय बाद मौत हो गई.

मैरी बॉल वॉशिंगटन

अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन के चरित्र की कई प्रेरणादायक बातों के लिए उनकी मां मैरी को श्रेय दिया जाता है. मगर उन्हें इस लिस्ट में रखने के पीछे कई कारण हैं.

जब अमेरिका के प्रथम राष्ट्रपति अपने देश को स्वतंत्र करवाने के लिए युद्ध कर रहे थे. उनकी मां हर तरह से अपने बेटे को बदनाम करने में लगी हुई थीं. वो खुद को गरीब और इंग्लैंड के राजा का भक्त कहती थीं. वो भी तब जब जॉर्ज ने उनको रहने के लिए एक बढ़िया घर और बाकी सुविधाएं मुहैया करवा रखी थीं.

Mary Washington

तस्वीर: मैरी वॉशिंगटन

और तो और उन्होंने ये मानने से भी इनकार कर दिया कि उनका लड़का राष्ट्रपति बन गया है. इन सबके बावजूद जॉर्ज अपनी मां का खयाल रखते रहे और बीच-बीच में उनकी मां भी उनके लिए प्यार जताती रहीं.

 

इंदिरा गांधी

आजाद भारत की पाकिस्तान पर सबसे बड़ी जीत का श्रेय इंदिरा गांधी को जाता है. इसी के साथ इमरजेंसी के जरिए हिंदुस्तान के लोकतंत्र पर सबसे बड़ा धब्बा लगाने का इल्ज़ाम भी उनपर मढ़ा जाता है.

indira

तस्वीर: अपने बेटों राजीव गांधी और संजय गांधी के साथ इंदिरा गांधी

1971-72 में दुर्गा कही जाने वाली इंदिरा के लिए इसके तीन-चार साल बाद ही में देश में ‘इंदिरा हटाओ, इंद्री बचाओ’ जैसे नारे लगे थे. इस नारे का संबंध उनके बेटे संजय गांधी के लागू किए गए पांच सूत्रीय कार्यक्रम से था.

संजय देश भर की नसबंदी करवाने पर तुले थे और इस नारे में इंद्री शब्द शरीर के नसबंदी योग्य अंग का रूपक था. मार्च 1977 में इमरजेंसी के हटने के बाद हुए चुनाव में इंदिरा और संजय समेत कांग्रेस की बुरी तरह हार हुई.

फिर एक नारा लगा, ‘पप्पू भी हारे! हां भैया, अम्मा भी हारी! हां भैया. गैया भी हारी! हां भैया, बछड़ा भी हारा! हां भैया.’ तब कांग्रेस का चुनाव चिह्न गाय और बछड़ा था.

सोनिया गांधी

Rahul-Sonia

70 के दशक में कांग्रेस के खिलाफ नारा लगाने वालों ने ये नहीं सोचा होगा कि ये पप्पू शब्द 40 साल बाद भी नेहरू-गांधी परिवार के पीछे किसी श्राप की तरह पड़ा पाया जाएगा.

वरना सोचिए जिस सोनिया गांधी ने 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी जैसे लोकप्रिय नेता को विदेशी मूल के मुद्दे के बाद भी हरा दिया वो आज कांग्रेस को किसी भी स्तर पर बचा पाने में असहाय दिख रही हैं.

सोनिया गांधी से हिंदुस्तान के हर मां-बाप को दो सबक लेना चाहिए. पहला ये कि एक अच्छे भले आदमी को जबरदस्ती खानदानी धंधे में धकेलना व्यवसाय और लड़के दोनों के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है. दूसरा जरूरी नहीं कि बेटी की शादी करके बेटे को वारिस बनाना कोई अच्छा कदम हो. बाकी राहुल गांधी तो खुद राहुल गांधी हैं ही.

पॉपुलर

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi