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डॉन अब तक: मुंबई अंडरवर्ल्ड डॉन के खूनी किस्से

आजादी के बाद से ही शुरू हुई ये तस्करी, ब्लैकमनी और पावर की लड़ाई में अबू सलेम की सजा से एक नया अध्याय जुड़ा

Avinash Dwivedi Updated On: Sep 07, 2017 06:03 PM IST

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डॉन अब तक: मुंबई अंडरवर्ल्ड डॉन के खूनी किस्से

1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट के 24 साल बाद दोषियों को सजा का ऐलान हो ही गया है. विशेष टाडा अदालत ने अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम को उम्रकैद की सजा दी है. कहा जा रहा है अब बची सारी जिंदगी अबू सलेम जेल में ही काटेगा. इस तरह से एक और अंडरवर्ल्ड डॉन की कहानी लगभग खत्म हुई.

आजादी के बाद से ही शुरू हुई ये तस्करी, ब्लैकमनी और पावर की लड़ाई में अबू सलेम की सजा से एक नया अध्याय जुड़ा. मुंबई अंडरवर्ल्ड में अबतक ऐसे कई डॉन हुए हैं जिनके खूनी किस्से बहुत चर्चित रहे हैं. ऐसे में हम यहां आपको अभी तक के एटूजेड अंडरवर्ल्ड डॉन की कहानियां बता रहे हैं-

आजादी के बाद से ही 1960-70 तक करीम लाला, वरदराजन मुदलियार और हाजी मस्तान नाम के तीन डॉनों का मुंबई अंडरवर्ल्ड पर सिक्का चलता था. तीनों के इलाके बंटे हुए थे और ये एक-दूसरे के काम में टांग नहीं अड़ाते थे इसलिए तब तक अंडरवर्ल्ड में खून-खराबा नहीं हुआ करता था. पर दाऊद के आने के बाद से सीन बदल गया.

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हाजी मस्तान

मुंबई अंडरवर्ल्ड को एक नई पहचान देने और ग्लैमर को अंडरवर्ल्ड के साथ लाकर खड़ा करने वाला बाहुबली माफिया तस्कर हाजी मस्तान मुंबई का पहला अंडरवर्ल्ड डॉन माना जाता है. हाजी मस्तान मिर्जा का जन्म तमिलनाडु के कुड्डलोर में 1 मार्च 1926 को हुआ था.

हाजी ने स्मगलिंग के जरिए खूब पैसा कमाया. हाजी मस्तान ने ही वरदराजन मुदलियार उर्फ़ वर्धा और माफिया डॉन करीम लाला को आगे बढ़ाया और मुंबई में अपने धंधे को दोनों के बीच बांट दिया. तमिल होने के कारण वर्धा और हाजी के बीच काफी अच्छे रिश्ते थे. कुछ समय बाद ही वर्धा वापस चेन्नई चला गया. 1970 के दशक तक मस्तान मुंबई में अपना साम्राज्य स्थापित कर चुका था. दस साल के अंदर उसने मुंबई में एक बड़ा मुकाम हासिल कर लिया था.

मस्तान जैसा बनना चाहता था, वह उससे ज्यादा ही बन चुका था अब वो अमीर भी था और ताकतवर भी. मस्तान को सफेद डिजाइनर सूट पहनने और मर्सिडीज की सवारी करने का बहुत शौक था. उसके हाथ में हमेशा विदेशी सिगरेट और सिगार दिखाई देते थे. ऐशोआराम उसकी जिंदगी का इकलौता शगल बन गया था. कहा जाता है अजय देवगन की 'वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई' फिल्म हाजी मस्तान की जिंदगी पर आधारित थी.

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करीम लाला

करीम लाला पठान था और अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में 1911 में पैदा हुआ था. उसका प्रभाव इसी से पता चलता है कि खुद हाजी मस्तान उसे असली डॉन कहा करता था. मुंबई के तस्करी समेत कई गैर-कानूनी धंधों में उसके नाम की तूती बोलती थी. 21 साल की उम्र में करीम पेशावर के रास्ते मुंबई पहुंचा और यहां पर उसने अपना धंधा शुरू किया. 1940 तक वो तस्करी के काम में जम चुका था. फिर उसने जुएं और दारू के अड्डे भी कई जगह खोल लिए.

करीम को किंग के नाम से जाना जाता था. इसी वक्त में वरदराजन मुदलियार और हाजी मस्तान भी सक्रिय थे पर तीनों के इलाके बंटे हुए थे. इसलिए खून-खराबा नहीं होता था. कहा जाता है करीम लाला ने दाऊद के शुरुआती दिनों में किसी क्लब में दाऊद को बहुत पीटा था. इस पिटाई में दाऊद को बहुत सी गंभीर चोटें आई थीं. कहा जाता है कि हाजी मस्तान, करीम लाला को असली डॉन कहा करता था.

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वरदराजन मुदलियार

वरदराजन मुदालियर 1926 में मद्रास प्रेसीडेंसी थूटुकुडी में पैदा हुआ था और जल्द से जल्द अमीर बनना चाहता था. छोटी-मोटी नौकरी करने के बाद वह 1960 के दशक में 34 साल की उम्र में वह मुंबई चला आया और वीटी स्टेशन पर कुली का काम करना शुरू कर दिया. वहीं वो अवैध शराब के कारोबार से जुड़ा और यहीं से उसकी शुरुआत हुई. उन मुंबई में हाजी मस्तान और करीम लाला का राज चलता था. वरदराजन तब गुर्गा था. लेकिन कुछ ही समय बाद उसने खुद का धंधा शुरू कर दिया. वरदराजन कारोबार बढ़ाना चाहता था, जिसके लिए वो हाजी मस्तान से मिला. हाजी वरदराजन से प्रभावित हुआ और दोनों साथ आ गए.

इसी दौरान हाजी मस्तान ने उसे करीम लाला से भी मिलवा दिया था. कुछ ही सालों में वह मुंबई में स्थापित हो गया. हत्या की सुपारी लेने से लेकर जमीन खाली कराने और ड्रग्स की तस्करी करने जैसे मामलों में मुदालियर शामिल था.

हाजी मस्तान ने उसे पूर्व और उत्तरी मध्य मुंबई की जिम्मेदारी वरदराजन मुदालियर को दे दी. जबकि दक्षिण और मध्य मुंबई का सारा काम करीम लाला संभालने लगा. मुंबई में रहने वाले तमिल समुदाय के लोग उसे मसीहा मानते थे. वह भी अपने लोगों के लिए पूरी तरह समर्पित था. सब इनके हिसाब से चल रहा था. लेकिन अस्सी के दशक में वरदराजन एक तेजतर्रार पुलिस अधिकारी के कारण वरदराजन मुंबई छोड़कर वापस चेन्नई चला गया. 2 जनवरी 1988 को चेन्नई में माफिया वरदराजन मुदालियर की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई.

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दाऊद इब्राहीम

दाऊद इब्राहीम के पिता मुंबई पुलिस में हेड कांस्टेबल थे. उसने अपने भाई शब्बीर के साथ मिलकर तस्करी का धंधा शुरू किया. दाऊद के इस धंधे में आने के चलते करीम लाला के काम में दखल पड़ने लगा. करीम लाला ने 1981 में इसी झगड़े में दाऊद के भाई शब्बीर की हत्या करवा दी. इसके बाद दाऊद के गैंग और करीम लाला के पठानी गैंग के बीच खूनी गैंगवार शुरू हो गया.

भारत के सबसे बड़े अपराधियों की लिस्ट में दाऊद का नाम सबसे ऊपर है. दाऊद ने डी-कंपनी की शुरुआत की थी. कहा जाता है कि दाऊद कई आतंकी संगठनों का भी करीबी है. कहा जाता है कि पाकिस्तानी खूफिया एजेंसी ISI का उसे संरक्षण मिला हुआ है. दाऊद की बेटी की शादी पाकिस्तानी क्रिकेटर जावेद मियांदाद के बेटे से हुई है. इस शादी में कई ISI के ऑफिसर भी शामिल हुए थे. दाऊद 1993 के मुंबई अटैका का मुख्य मास्टरमाइंड था.

कुछ दिनों पहले दिलीप वेंगसरकर ने खुलासा किया था कि दाऊद एक बार उन्हें ड्रेसिंग रूम में मिलने आया और बोला कि पाकिस्तानी टीम को बहुत ही बुरी तरह से हराना, फिर मैं भारतीय टीम के सारे ही खिलाड़ियों को एक कीमती कार खरीदकर दूंगा.

1986 में दाऊद के साथियों ने करीम लाला के भाई रहीम खान का कत्ल कर दिया. जिसने कभी अंडरवर्ल्ड पर राज करने वाला करीम लाला को तोड़कर रख दिया. इसके बाद उसने दाऊद से दोस्ती कर ली और अपराध की दुनिया को अलविदा छोड़ दिया.

अब चूंकि वरदराजन मणिस्वामी मुदलियार 1980 में वरदराजन ने जुर्म की दुनिया को अलविदा कह चुका था. इससे पहले 1977 में जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से प्रभावित होकर हाजी मस्तान ने भी अपराध की दुनिया को छोड़कर सियासी दुनिया में कदम रख दिया था. निश्चित ही दाऊद सारी मुंबई में अकेला बड़ा गैंगस्टर बचता था. इनके जाने का उसे बहुत फायदा मिला.

1993 के धमाकों से पहले ही दाऊद मुंबई से दुबई चला गया. धमाकों की वजह से ही दाऊद और छोटा राजन अलग हो गए. छोटा राजन भी मुंबई से मलेशिया चला गया. और वहां उसने अपना कारोबार शुरू कर दिया. ऐसे में अभी तक अपेक्षाकृत उतने प्रभावी नहीं रहे, अरुण गवली को अपना प्रभाव बढ़ाने का मौका मिला.

शब्बीर इब्राहिम कास्कर

शब्बीर इब्राहिम अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का बड़ा भाई था और इब्राहिम परिवार का सबसे बड़ा बेटा था. शब्बीर और उसके छोटे भाई दाऊद ने ही मिल के डी कंपनी की शुरुआत की थी. ये दोनों मिल के धंधे को चलाते थे. एक विरोधी गिरोह ने शबीर का मर्डर कर दिया. उनकी मौत ने भारत का सबसे खूनी गैंगवार शुरू किया था. इससे 10 साल की अवधि में 50 अपराधी और उनके रिश्तेदारों का सफाया हो गया.

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अरुण गवली

जब सभी अंडरवर्ल्ड डॉन मुंबई छोड़ चुके थे तब जुर्म के मैदान में दो मेन खिलाड़ी बचे थे, अरुण गवली और अमर नाइक. अमर नाइक को पुलिस ने मुठभेड़ में ढ़ेर कर दिया. और उसके भाई अश्विन नाइक को गिरफ्तार कर लिया गया. अब अरुण अकेला ही डॉन बचा था. हमेशा सफेद टोपी और कुर्ता पहनने वाला अरुण मुंबई की दगली चाल में रहता था. दगली चाल को उसने किले का रूप दे दिया था. जिसमें 15 फीट के दरवाजे भी थे. गवली के हथियार बंद लोग हमेशा वहां तैनात रहा करते थे.

जानकार उसके गैंग में लोगों की संख्या 800 बताते हैं. गवली डैडी के नाम से मशहूर था. मुंबई के कई कारोबारी और बिल्डर कारोबार बढ़ाने में उसकी मदद लिया करते थे. गवली हफ्ता और रंगदारी भी वसूल करता था. गवली को सुपारी किंग भी कहा जाता था. मारपीट और हत्या की घटनाओं को सुपारी लेकर वह अंजाम दिया करता था. पुलिस वालों में भी उसकी अच्छी पैठ थी. यही कारण रहा कि जब उसे पकड़ा गया तो कई पुलिस वाले भी जांच के घेरे में आए.

गवली ने एक दशक में कई दुश्मन जुटा लिए थे और पुलिस भी अब उसपर शिकंजा कसना चाहती थी. ऐसे में उसने बच निकलने का एक रास्ता सूझा, राजनीति में कूदना. उसने 2004 में अखिल भारतीय सेना नाम की एक पार्टी बनाई. और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में अपने कई कैंडिडेट उतारे. खुद भी उसने चिंचपोकली सीट से चुनाव लड़ा और जीता भी.

अरुण को लगता था विधायक बनने के बाद पुलिस उसे नहीं छुएगी. पर ऐसा हुआ नहीं. 2008 में उसने शिवसेना के कॉरपोरेटर कमलाकर जामसांडेकर की सुपारी लेकर हत्या कर दी. जिसमें उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई. पहली बार किसी कोर्ट ने गवली को सजा सुनाई थी. उधर गवली जेल गया और इधर पुलिस ने एनकाउंटर अभियान चलाया. गवली का पूरा गैंग मारा गया और अभी गवली अपने गुनाहों की सजा जेल में काट रहा है. उसका एक उपनाम 'डैडी' भी हुआ करता था. इसी नाम से गवली पर एक फिल्म भी आने वाली है. जिसमें अर्जुन रामपाल गवली का किरदान निभा रहे हैं.

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अबु सलेम

अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम 1960 के दशक में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में सराय मीर गांव में पैदा हुआ था. पिता की मौत के बाद उसने पढ़ाई छोड़कर एक मैकेनिक के यहां काम करना शुरू कर दिया. लेकिन जल्द वह काम के लिए दिल्ली आ गया. यहां उसने मैकेनिक का काम करने के बाद टैक्सी चलाना शुरू किया. माली हालत न सुधर पाने के कारण 80 के दशक में वह मुंबई जाकर टैक्सी चलाने लगा. यहां उसकी मुलाकात अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के लोगों से हुई. जहां उसने डी कंपनी में काम करना शुरू कर दिया. जल्द ही वह गैंग में आगे बढ़ गया. उसके खिलाफ पहला मामला 1988 में मुंबई के अंधेरी पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था. लेकिन 1991 में उसे पहली बार गिरफ्तार किया गया.

इसके बाद अबू सलेम, दाऊद के गैंग में अपनी खास जगह बना चुका था. इसी दौरान मुंबई में सीरियल ब्लास्ट हुए. जिसका इल्जाम दाऊद गैंग के सिर पर था. इसलिए दाऊद इब्राहिम और उसके गैंग ने दुबई में पनाह ली. अबू सलेम भी वहां पहुंच गया. फिर उसने दाऊद के भाई अनीस इब्राहिम के लिए काम करना शुरू कर दिया. अबू सलेम अब एक बड़ा माफिया बन चुका था. रंजिश के कारण 1998 में अबू सलेम दाऊद गैंग से अलग हो गया. बाद में दोनों की दुश्मनी गहरी हो गई. 1997 में बॉलीवुड के निर्माता गुलशन कुमार की हत्या में भी उसका नाम सामने आया था.

भारत में मोस्ट वांटेड बन जाने के बाद सलेम देश छोड़कर भाग गया था. उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर उसे 20 सितंबर 2002 को उसकी प्रेमिका मोनिका बेदी के साथ इंटरपोल ने लिस्बन, पुर्तगाल में गिरफ्तार कर लिया था. 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों के मामले में अबू सलेम पर विशेष टाडा अदालत ने आठ आरोप दायर किए थे. मुंबई की जेल में बंद अबू सलेम एक अरबपति माफिया डॉन है.

सीबीआई और पुलिस रिकार्ड के मुताबिक उसकी कुल संपत्ति 4000 करोड़ रुपये की है. जिसमें से 1,000 करोड़ रुपए नकदी और संपत्ति उसकी दोनों पत्नियों समीरा जुमानी और मोनिका बेदी के बीच विभाजित है. बताया जाता है कि उसके पास 12 पासपोर्ट थे.

बड़ा राजन

बड़ा राजन के नाम से मशहूर राजन महादेव नायर 70-80 के दशक में मुंबई का मशहूर डॉन था. मुंबई में चेंबूर के तिलकनगर में पैदा और पले-बढ़े बड़ा राजन ने बचपन से ही जुर्म की दुनिया में कदम रख दिया. एक फैक्ट्री में काम कर रहे बड़ा राजन ने ज्यादा पैसे कमाने के चक्कर में ब्रैंडेड टाइपराइटर चुराकर चोर बाजार में बेचना शुरु कर दिया. इसी दौरान वह पुलिस के हत्थे चढ़ गया. जेल से छूटने के बाद से ही उसने फिल्म टिकट की ब्लैक मार्केटिंग शुरू कर दी. करीब 17 साल की उम्र में उसकी मुलाकात छोटा राजन से हुई.

दोनों ने साथ-साथ ये धंधा करना शुरू कर दिया. 1970-85 के दौरान ब्लैक में टिकट बेचना मुंबई के गैंग्स की इनकम का मुख्य स्त्रोत था. इसके बाद इन दोनों ने मिलकर एक गैंग बनाया जिसका सर्वेसर्वा बड़ा राजन था. अपनी मौत कर बड़ा राजन छोटा राजन का मेंटर बनकर रहा. 80 के दशक की शुरुआत में बड़ा राजन मुंबई के स्थापित डॉन वरदराजन मुदलियर के नाम पर अपने काले कारनामों को अंजाम देता था.

बड़ा राजन को पहली बार दाऊद इब्राहिम ने अपने बड़े भाई के हत्यारों को मारने की सुपारी दी. अगले दो सालों में बड़ा राजन के कई दुश्मन बन गए इनमें से एक था अब्दुल कुंजू. अब्दुल ने ही बड़ा राजन को कई बार मरवाने की कोशिश की. आखिर में उसने एक ऑटो ड्राइवर, चंद्रशेखर सफालिका को बड़ा राजन की 50 लाख की सुपारी दी जिसने उसकी हत्या कर दी.

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छोटा राजन

राजेन्द्र सदाशिव निखलजे उर्फ छोटा राजन 1956 में मुंबई के चेंबूर में एक मध्यम वर्गीय परिवार में पैदा हुआ. पढ़ाई में मन ना लगने से छोटा राजन बुरी संगत में पड़ा और जगदीश शर्मा उर्फ गूंगा के गिरोह का मेंबर बन गया. उसी वक्त चेंबूर और घाटकोपर इलाके में वरदा भाई के सहायक और मिल मजदूर नेता रहे राजन नायर यानि कि बड़ा राजन ने इसकी मुलाकात हुई.

तब तक इसने सिनेमा हॉल के टिकट ब्लैक करने का धंधा शुरू कर दिया था. धीरे-धीरे इसके बारे में बड़ा राजन को मालूम पड़ा. बड़ा राजन ने इसे वरदराजन मुदलियर के साथ सोने की स्मगलिंग में लगा दिया. इसी के बाद से ये बड़ा राजन का सबसे खास आदमी बन गया और गिरोह के लोग इसे छोटा राजन नाम से पुकारने लगे. 80 का दशक की शुरुआत में बड़ा राजन गिरोह सुपारी लेकर मर्डर करने लगा. तब तक इन दोनों को दाऊद का साथ मिल गया.

1983 में जब बड़ा राजन की हत्या हो गई तो छोटा राजन दाऊद के करीब आया. दाऊद और छोटा राजन की दोस्ती गहरी होती गई. जब 1988 में जब दाऊद दुबई भागा तब वह मुंबई के अपने काले साम्राज्य की बागडोर छोटा राजन को सौंप गया.

1992 आते-आते छोटा राजन और दाऊद में मतभेद होने लगे. ऐसे में छोटा शकील ने राजन के खिलाफ दाऊद के कान भरने शुरू कर दिए. मतभेद का मुख्य कारण था कि राजन दाऊद की बहन के पति के हत्यारों को मारने में नाकाम साबित हो रहा था.

इसके बाद जब दाऊद मुंबई धमाकों की साजिश रच रहा था तब उसे किसी मुस्लिम गुर्गे की जरूरत थी. इस लिए उसने छोटा राजन को किनारे कर अबु सलेम और मेमन बंधुओं को गिरोह की कई जिम्मेदारियां दे दीं. लेकिन मुंबई धमाकों से पहले ही एक ऐसी घटना हो गई जिसने दाऊद और छोटा राजन के बीच दुश्मनी के बीच को हवा दे दी. इसके बाद दोनों गिरोह में खूनी जंग छिड़ गई. इसके बाद दाऊद पाकिस्तान में पनाह ले चुका है और छोटा राजन बैंकॉक को अपना ठिकाना बना चुका है.

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छोटा शकील

छोटा शकील का असली नाम शकील बाबूमियां शेख है. फिलहाल शकील डिफेंस एरिया, कराची, पाकिस्तान में रह रहा है. शकील मुंबई बम ब्लास्ट के आरोपियों में से एक है. उस पर हवाला, फिरौती, अपहरण, हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी का भी आरोप है. शकील को दाऊद इब्राहीम का खास आदमी माना जाता है. बॉलीवुड हस्तियों के साथ अपने संबंधों के चलते चर्चा में रहा है. बॉलीवुड की फिल्मों में यही दाऊद इब्राहीम का पैसा लगाता है. कहा जाता है कि छोटा राजन ने छोटा शकील के डर से ही खुद को गिरफ्तार कराया था. छोटा शकील का नाम देश के मोस्ट वांटेड अपराधियों की लिस्ट में शामिल है.

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एजाज लाकड़ावाला

कई मर्डर, दंगों और फिरौती मांगने का आरोपी. वैसे तो एजाज डी-कंपनी का ही एक मेंबर था. पर बात में उसने छोटा राजन के साथ मिलकर अपना एक अलग गैंग बना लिया था. एक अफवाह उड़ी थी कि दाऊद और उसके गैंग के बीच हुई एक खूनी मुठभेड़ में एजाज मारा गया पर बाद में उसे कनाडा में 2004 में गिरफ्तार किया गया.

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