विधानसभा चुनाव | गुजरात | हिमाचल प्रदेश
S M L

विजयदान देथा: लोककथाओं का आधुनिक पाठ करने वाला कथाकार

विजयदानदेथा ने न सिर्फ लोककथाओं का पुनर्पाठ किया बल्कि राजस्थानी कहावतों का कोश भी तैयार किया

Piyush Raj Piyush Raj Updated On: Nov 10, 2017 10:04 AM IST

0
विजयदान देथा: लोककथाओं का आधुनिक पाठ करने वाला कथाकार

आधुनिक समय में जब से खड़ी बोली हिंदी क्षेत्र में साहित्य रचने के लिए मुख्य भाषा हो गई तब से हिंदी क्षेत्र की स्थानीय भाषाओं में रचे साहित्य का महत्व काफी कम हो गया. हिंदी के कई आधुनिक साहित्यकारों ने भले ही अपनी-अपनी मातृभाषाओं में कुछेक रचनाएं लिखीं लेकिन खड़ी बोली हिंदी ही उनकी मुख्य साहित्यिक भाषा थी. लेकिन विजयदान देथा उर्फ बिज्जी किसी और ही मिट्टी के बने थे. बिज्जी जीवनभर राजस्थानी भाषा में लिखते रहे. यही नहीं उन्होंने अपनी रचनाओं के लिए लोककथाओं का आश्रय लिया.

यहां यह बात भी उल्लेखनीय है कि राजस्थानी भाषा को संविधान द्वारा मान्यता भी नहीं मिली है. ऐसे में निश्चित तौर पर राजस्थानी में लिखना वो भी लोककथा के आधार पर अपने आप में एक साहसिक कार्य था. विजयदानदेथा ने न सिर्फ लोककथाओं का पुनर्पाठ किया बल्कि राजस्थानी कहावतों का कोश भी तैयार किया.

अक्सर लोकभाषा और लोककथा को आधार बनाकर लिखते समय यह भय होता है कि कहीं ऐसी रचनाएं आधुनिक समय के अनुकूल न हो और किसी पिछड़ी चेतना और भाव-बोध की वाहक न हों. यह भी एक तथ्य है कि कई बार लोक में जो कथाएं और लोकोक्तियां प्रचलन में होती हैं उनमें जातिवादी, सामंती और पितृसत्तामक सोच होती है.

लेकिन विजयदान देथा ने लोक की उन कथाओं को चुना जो अपने पूरे कलेवर में भले ही पुरानी दिखती थीं लेकिन अपने एप्रोच में बिल्कुल आधुनिक हैं. वैसे भी लोक का एक पक्ष यह भी है कि यहां भीतर से ही एक प्रतिरोध का स्वर भी विकसित होता है. बिज्जी ने अपनी लोककथाओं में इसी स्वर को जगह दी है. यही वजह है कि बिज्जी की लोककथा कहीं से भी पुरातनपंथी नहीं कही जा सकती. कई मायने में बिज्जी की लोककथाएं हिंदी में लिखी जाने वाली कहानियों से भी अपने एप्रोच में दो कदम आगे है.

स्त्री समलैंगिकता पर भी लिखी कहानी

उदाहरण के लिए समलैंगिकता की जो बहस आज भी ठीक से हिंदी साहित्य में स्थापित नहीं हुई है, उसका पक्ष बिज्जी बहुत पहले बगैर किसी शोरशराबे के अपनी कई लोककथाओं में रख चुके हैं.

बिज्जी की एक ऐसी ही कहानी है ‘दोहरी जिंदगी’. इस कहानी में  स्त्री समलैंगिकता का वर्णन है. इस कहानी में धोखे से दो स्त्रियों का विवाह हो जाता है, लेकिन अंततः ये धोखा उनके लिए मर्दवादी समाज में वरदान साबित होता है. मर्दवादी समाज को यह संबंध रास नहीं आता.  इस कहानी में एक जगह एक पुरुष कहता है कि ‘औरत से औरत की शादी होने पर मर्द क्या चूहों के बिल ढूंढेगा?’

यह भी पढ़ें: ‘दरबार’ में रहकर ‘दरबार’ की पोल खोलने वाला दरबारी

लेकिन दोनों स्त्रियां अपनी अलग ही दुनिया बसाती हैं, जो बराबरी, सम्मान और प्रेम पर आधारित है. पितृसत्तात्मक समाज की तरह वहां संपत्ति और संतान का झगड़ा नहीं है. यह कहानी स्त्री-पुरुष के संबंध की जगह स्त्री-स्त्री के संबंध को स्थापित करती है. इस कहानी का अभिप्राय यह भी है, की अगर स्त्री-पुरुष संबंध को बनाए रखना है तो वह पुरुषवादी वर्चस्व को त्याग करके ही हो सकता है. इस में कहानी बीजां जब एक वरदान के जरिए मर्द बन जाती है तो उसका व्यवहार तीजां के लिए बहुत ही खराब हो जाता है. इस वजह से बीजां एक बार फिर से औरत बन जाती है और दोनों का प्यार फिर से पहले की तरह हो जाता है.

अलौकिक कलेवर में लौकिक कहानियां

बिज्जी की कहानियों में भूत, वरदान, देवता जैसे कई तत्त्वों को देखकर कोई इन्हें साधारण बच्चों को बहलाने वाली मनोरंजनात्मक कहानी भी समझ सकता है, लेकिन बिज्जी की कहानियों का उद्देश्य किसी भूत या किसी अन्य अधिभौतिक-अलौकिक वस्तु की कहानी कहना नहीं था. इन कहानियों का लक्ष्य आमजन के दुखों और समाज की विसंगतियों को आम और सहज भाषा में रखना था.

यह भी पढ़ें: रामधारी सिंह दिनकर: ‘जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध

बिज्जी की सबसे बड़ी खासियत है कि जो समाज स्त्री को चयन की स्वतंत्रता नहीं देता और उसके चरित्र को अपने पितृसत्तामक पैमाने से आकंता है, उस समाज के दोहरेपन को बिज्जी अपने लोककथाओं के उजागर करते हैं. चाहे उनकी कहानी ‘दुविधा’ हो, जिस पर पहेली फिल्म बनी थी या फिर केंचुली, सावचेती, लजवंती या उलझन जैसी कहानियां.

बिज्जी अपनी कहानियों में लोक के ही माध्यम से पितृसत्तात्मक समाज के वर्चस्व को भीतर से चुनौती देते हैं. जिस लोक, समाज और परंपरा की दुहाई देकर यौन स्वतंत्रता का विरोध किया जाता रहा है, उसी लोक परंपरा को सामने रखकर बिज्जी यौन स्वतंत्रता की नई व्याख्या प्रस्तुत करते हैं. बिज्जी की कहानियों को आधुनिक विमर्शों के दौर में कहीं से कमतर करके आंका नहीं जा सकता.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi