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हिंदी स्पेशल: बार-बार पढ़ने लायक हैं हिंदी की ये 12 साहित्यिक किताबें

हिंदी साहित्य में पॉपुलर साहित्य से अलग ये किताबें बार-बार पढ़े जाने लायक हैं

Animesh Mukharjee Animesh Mukharjee Updated On: Sep 12, 2017 01:18 PM IST

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हिंदी स्पेशल: बार-बार पढ़ने लायक हैं हिंदी की ये 12 साहित्यिक किताबें

हिंदी सप्ताह में हमने पहले ऐसी किताबों की बात की जिन्हें लोकप्रिय कहा जाता है. पॉपुलर किताबें यानी ऐसा लेखन जिसे आप हल्के-फुल्के मूड में पढ़ सकते हैं. अब बात करते हैं कुछ ऐसी किताबों की जिन्हें पढ़ने के बाद एक अलग तरह की संतुष्टि मिलती है. हिंदी साहित्य में ऐसी किताबों की लंबी लिस्ट है. इनमें से हम सिर्फ 12 किताबें सामने रख दे रहे हैं. तमाम ऐसे नाम हैं जो कतई नहीं छूटने चाहिए पर शब्दों की लिमिट के चलते छूट रहे हैं. आप हमें कमेंट में सुझाव दे सकते हैं कि और क्या हो सकता है.

गोदान

प्रेमचंद का उपन्यास हिंदी साहित्य की सबसे चर्चित किताबों में से एक है. कहा जाता है कि अपनी आखिरी किताब में प्रेमचंद अपने आदर्शवाद को छोड़ देते हैं.. उनकी किताबों में जो आदर्श किसान रहता था, वो गोदान में मर जाता है. इसी के साथ-साथ होरी के लड़के गोबर के शहर चले जाने को भी गांवो से शहरों की तरफ होने वाले पलायन के तौर पर देखा जा सकता है. गोदान को पढ़कर हम देख सकते हैं कि 1936 से अभी तक हमारे किसान कितना बदले और गांवो की दशा में क्या फर्क आया.

मैला आंचल

फणीश्वर नाथ रेणु का ये उपन्यास ग्रामीण भारत की एक ऐसी तस्वीर पेश करता है, जिसके आंचल में कई दाग छिपे हैं. मैला आंचल में बिहार के पूर्णिया के मेरीगंज में प्रैक्टिस करने आए डॉक्टर के बहाने समाज की कई बुराइयों और खत्म होते गांधी के आदर्श समाज की तस्वीर दिखाई गई है.

सूरज का सातवां घोड़ा

धर्मवीर भारती की इस किताब को एक अद्भुत प्रयोग के चलते पढ़ा जाना चाहिए. सिनेमा में दिलचस्पी रखने वालों ने रॉशेमॉन एफेक्ट के बारे में सुना होगा. जिसमें एक ही कहानी अलग-अलग लोग सुनाते हैं और सबकी कहानी में फर्क होता है.

सूरज का सातवां घोड़ा में माणिक मुल्ला नाम का सूत्रधार सात कहानियां सुनाता है. अंत में आपकी समझ में आता है दरअसल जो अलग-अलग कहानियां आपने सुनी वो दरअसल एक ही कहानी थी.

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शेखर एक जीवनी

सच्चिदानंद हीरानंद वात्सायन अज्ञेय के दो भागों में लिखे गए इस उपन्यास में इन्सान के मनोविज्ञान पर बचपन से पड़ने वाले असर को बहुत अच्छे ढंग से दिखाया गया है. शेखर एक जीवनी उन किताबों में है जिनको पढ़ते समय आपको पेंसिल लेकर बैठना चाहिए ताकि अंडरलाइन कर सकें.

कितने पाकिस्तान

कितने पाकिस्तान को उपन्यास की श्रेणी में रख दिया जाता है. भारत पाक बंटवारे और हिंदू मुस्लिम संबंधों पर लिखी गई इस किताब को विश्व इतिहास के एक अकाउंट की तरह पढ़ा जाना चाहिए जिसमें. गिलगमेश, एकिंदू, अशोक, बाबर, औरंगज़ेब से लेकर अशोक सिंघल, गांधी, जिन्ना और इतिहास के ढेर सारे खलनायक और नायक समय की अदालत में पेश होते हैं. कमलेश्वर की लिखी साहित्य अकादमी से पुरस्कृत यह किताब पढ़ने-लिखने वालों को अपने कलेक्शन में रखनी चाहिए.

आधा गांव

राही मासूम रज़ा का एक परिचय यह भी है कि उन्होंने बीआर चोपड़ा की महाभारत का स्क्रीनप्ले और डायलॉग लिखे थे. रज़ा साहब का दायरा इससे बहुत बड़ा है. उनकी आधा गांव और टोपी शुक्ला न सिर्फ किस्सागोई के लिहाज से शानदार हैं. इनको एक से ज़्यादा बार पढ़ा जाना चाहिए, इनके अदंर छिपे हुए निहितार्थ समझने के लिए.

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बाण भट्ट की आत्मकथा

महाराज हर्ष के कालखंड की इस कहानी को पढ़कर अंग्रेज़ी की सेल्फ डिस्कवरिंग जर्नी वाली फील आएगी. इसके साथ-साथ अगर आप अपनी हिंदी लिखने और बोलने में शुद्धता और एक बेहतर स्ट्रक्चर लाना चाहते हैं तो ये किताब आपकी मददगार साबित होगी. इसी तरह की एक और किताब आचार्य चतुरसेन की लिखी वैशाली की नगरवधु है.

आषाढ़ का एक दिन

मोहन राकेश नई कहानी के आधार रहे हैं. उनका नाटक आषाढ़ का एक दिन एक सांस में पढ़ी जाने वाली किताबों में से एक है. मोहन राकेश के नाटक का नायक कालिदास अपने से पहले के आदर्श नायकों जैसा नहीं है. उसके अंदर वहीं कमज़ोरियां हैं, जो प्रेम में पड़ने पर हम-आप जैसे सामान्य लोगों में होती हैं.

तमस

भीष्म साहनी का तमस बताता है कि भारत के विभाजन के समय किस तरह से योजनाबद्ध तरीके से हिंसा फैलाई गई. विभाजन को लेकर कई लेखकों ने कहानियां लिखी हैं, मगर तमस को पढ़कर आपको बिना शक कुछ न कुछ नया मिलेगा.

मैंने मांडू नहीं देखा

स्वदेश दीपक मानसिक बीमारियों से पीड़ित थे. फिलहाल कई साल से लापता हैं. अब उनके जीवित होने न होने पर भी सवाल उठने लगे हैं. उनकी इस किताब में उनके दिमाग में चल रही बहुत सारी हलचल कैद है. अगर दूसरी तरह से कहें तो ये किताब आपको हिला कर रख सकती है.

एक साहित्यिक की डायरी

मुक्ति बोध की पहचान एक कवि के तौर पर है. उनकी ये किताब इस महाकवि के दूसरे पक्ष को दिखाती है. यहां शीर्षक में डायरी शब्द से यह मत समझिएगा कि ये उनकी सिलसिलेवार लिखी गई डायरी का संपादन होगा. मुक्तिबोध के लिखे गए एक कॉलम से ये नाम आया है.

मानस का हंस

मानस का हंस अमृतलाल नागर की लिखा एक ऐसा उपन्यास है जिसका विषय तुलसी दास का जीवन है. ये किताब इन दोनों जॉनर के बीच के संतुलन को बखूबी बनाते हुए आपको अंत तक बांधे रखती हैं. गोस्वामी जी के जीवन के बारे में बहुत कम ही प्रामाणिक जानकारी उप्लब्ध है. ऐसे में ये उपन्यास कल्पना और वास्तविक्ता के मेल को बहुत अच्छी तरह से पेश करता है.

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