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चोटीकटवा का आतंक: किसी की शैतानी और लोगों का डर!

क्या सिर्फ महिलाओं की ही चोटी कटेगी या लंबे बाल रखने वाले लड़कों पर भी चलेगी कैंची

Ojaswini Updated On: Aug 08, 2017 10:14 PM IST

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चोटीकटवा का आतंक: किसी की शैतानी और लोगों का डर!

सुबह-सुबह रविवार को उठ कर ऑफिस आना वैसे ही कम बड़ी मुसीबत है क्या जो ये कौवा खिड़की के बाहर बैठ कर कांव-कांव करके सिर में दर्द कर रहा है? हल्की-हल्की बारिश हो रही है और ये जनाब खिड़की पर पनाह ले कर नीचे देखकर जैसे मजे ले रहा हो, 'अरे देखो, लोग, अजीब लोग.'

कल काम वाली बाई से बात हो रही थी. मेरी ही उम्र की है. बता रही थी कि कैसे उसे भूतों से बहुत डर लगता है. मुझे हंसी आ रही थी और मन ही मन मैं हंस ही रही थी. पर हर इंसान की अपनी सोच अपने विचार हैं, ठीक है. क्या पता शायद होते हों भूत. बस मैं नहीं मानती.

वो बता रही थी कि उनके गावों में कैसे पिछले कुछ दिनों में कई लोगों की मौत हो गई. अभी हाल ही में उसकी गांव की एक सहेली जो यहां मुंबई में ही रहती थी, उसकी मौत हो गई. वो सच में समझती है की यह भूत-प्रेत का काम है. मैंने ज्यादा सवाल जवाब नहीं किया.

कौन है यह चोटीकटवा?

आज जब खबरें पढ़ रही थी तो देखा देश भर में कई जगहों से अजीब खबरें आ रही हैं. कोई रात को चुपचाप औरतों की चोटी काट दे रहा है. पहले तो मैं हंस पड़ी कि यह क्या बात हुई. फिर थोड़ा सर्च करने पर पता चला कि दिल्ली, गुडगांव, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित अलग-अलग जगहों से ये खबरें आ रही हैं. समझ आया कि मसला ‘मास हिस्टीरिया’ का है.

मंकीमैन याद है? मैं तो काफी छोटी थी उस वक्त. सुना था कि एक मंकीमैन आता है. उस वक्त अपने परिवार के साथ बिहार में रहती थी. याद है मुझे, रात में थोड़ा डर लगता था कि कहीं खिड़की से मंकीमैन न आ जाए. डबल चेक कर के भी बिना थोड़ी-थोड़ी देर पर उठे बगैर नहीं सो पाई थी कुछ दिन. किसी से कहा नहीं तब, सब हंस देते न.

फिर अभी कुछ दस साल पहले ये खबर भी आई थी कि माहिम में एक तालाब का पानी अचानक मीठा हो गया है. लोग वो पीने के लिए देश भर से उमड़ आए क्यूंकि यह कोई चमत्कार था.

क्या सच में गणेश जी ने पिया था दूध?

अब यह सब सोच कर हंसी आती है. पर दूध पीने वाले पत्थर के गणेश जी, एलियन के पैरों के निशान, शिव जी के चेहरे वाले आलू, ऐसी कई खबरें और उनपर लोगों की प्रतिक्रिया हमारे बारे में कुछ तो दर्शाता ही है. है ना ?

सच तो यह है कि 2017 में भी हम ऐसे हैं कि हमारे बीच मास हिस्टीरिया फैलाना बहुत आसान है. आप सोचिए कि कौन सा भूत ऐसे लोगों की चोटी काटते फिरेगा? कैमरे के सामने आने के लिए क्या लोग ये नहीं कर सकते? या फिर बस डर के मारे? मैं नहीं कह रही कि ऐसा ही है, पर ऐसा भी हो सकता है.

यूजीन इनस्को (एक बहुत बेहतरीन फ्रेंच लेखक) की किताब राइनोसोर्स की कहानी याद आ गई. ऐसा होता है कि एक आदमी शहर में राइनोसोर्स बन जाता है, फिर दूसरा, फिर तीसरा, और धीरे-धीरे बाकी सब.

ये चोटीकटवा की कहानी कुछ ऐसी ही लगती है. इसके कई तर्क हो सकते हैं, पब्लिसिटी, धार्मिक संवेदना फैलाना, मास हिस्टीरिया फैलाना. कुछ भी हो सकता है, मैं बस इतना कहना चाहती हूं कि हम जरा सोचे कि कहीं हम सब राइनोसोर्स तो नहीं बन रहे?

अच्छा वैसे एक सवाल और भी है मन में, ये जो सबकी चोटी काट रहा है, अगर एक रॉकस्टार जैसा लड़का हुआ, लंबे बालों वाला, तो उसके भी बाल काटेगा? या सिर्फ औरतों की चोटी काटता है? बस सवाल है, बुरा न माने!

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