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मुख्यमंत्री योगी की निजी सेना हिंदू युवा वाहिनी का क्या होगा? 

योगी आदित्यनाथ अब मुख्यमंत्री हैं तो उन्हें ग्राम रक्षा दल के रूप में हिंदू युवा वाहिनी की जरूरत होगी या नहीं

Manoj Kumar Singh | Published On: Mar 20, 2017 08:10 AM IST | Updated On: Mar 20, 2017 09:47 AM IST

मुख्यमंत्री योगी की निजी सेना हिंदू युवा वाहिनी का क्या होगा? 

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह सवाल हर तरफ उठ रहा है कि उनके  संगठन हिंदू युवा वाहिनी का क्या होगा?

क्या इसे विघटित कर दिया जाएगा या यह योगी की निजी सेना के रूप में मौजूद रहेगी? हिंदू युवा वाहिनी के नेताओं पर दर्ज मुकदमे क्या ‘हिंदूत्व की सेवा’ के नाम पर वापस होंगे कि कानून अपना काम करेगा?

योगी आदित्यनाथ ने हिन्दू युवा वाहिनी का गठन 2002 में किया था. सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत इस संगठन के योगी मुख्य संरक्षक है. योगी ने इसे ‘सांस्कृतिक संगठन’ बताते हुए कहा कि यह ग्राम रक्षा दल के रूप में राष्ट्र विरोधी, हिंदू विरोधी गतिविधियों को रोकने और माओवाद के बढ़ते प्रभाव को नियंत्रित करने का काम करेगा.’

हिंदू युवा वाहिनी को बनाने का मकसद क्या था

हिंदू युवा वाहिनी को बनाने के पीछे दूसरे कारण थे. योगी ने इसे तब बनाया जब वह 1998 में 26 हजार वोट से जीतने के बाद दूसरा चुनाव 1999 में सिर्फ 7322 मतों से जीते.

हिंदू युवा वाहिनी ने अपना काम शुरू किया और उसकी कार्यवाहियों से पूरा पूर्वांचल साम्प्रदायिक उन्माद की चपेट में आ गया. गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, मऊ, आजमगढ़ में साम्प्रदायिक हिंसा की दर्जनों घटनाओं में हिंदू युवा वाहिनी से जुड़े लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए.

ये संगठन साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाओं में किस तरह लिप्त था, इसका अनुमान इसी से लगा सकते हैं कि हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह पर 70 मुकदमे दर्ज हैं. पंचरूखिया कांड, मोहन मुंडेरा कांड, मऊ दंगा इस संगठन की उपलब्धियों के बतौर दर्ज है. योगी आदित्यनाथ पर भी तीन केस इस दौरान दर्ज हुए.

हिंदू युवा वाहिनी के गठन के बाद से हर चुनाव में योगी के जीत का अंतर बढ़ता गया और साल 2014 का लोकसभा चुनाव में वे तीन लाख से अधिक वोटों से जीते. योगी आदित्यनाथ ने हिंदू युवा वाहिनी के संगठन को प्रदेश के 40 से अधिक जिलों में विस्तारित कर दिया.

हिंदू युवा वाहिनी [तस्वीर फेसबुक]

हिंदू युवा वाहिनी [तस्वीर फेसबुक]
बीजेपी के खिलाफ भी की थी बगावत

साल 2002 में जब बीजेपी ने उनके कहने के बावजूद गोरखपुर शहर के विधायक शिवप्रताप शुक्ल (अब राज्य सभा सदस्य) का टिकट नहीं काटा तो उन्होंने बगावत कर दी और हिंदू युवा वाहिनी की ओर से डा. राधा मोहन दास अग्रवाल को चुनाव मैदान में उतार दिया.

उन्होंने तीन और स्थानों पर अपने उम्मीदवार उतारे. शिवप्रताप शुक्ल चुनाव हार गए और भाजपा में हाशिए पर चले गए. इसके बाद से हर चुनाव में बीजेपी-हिंदू युवा वाहिनी के बीच टकराव होता रहा.

2014 के लोकसभा चुनाव में भी हिंदू युवा वाहिनी के कई नेताओं को टिकट नहीं मिला तो वे बागी बन चुनाव लड़ने की बात करने लगे लेकिन योगी ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया.

युवा वाहिनी के नेता योगी के खिलाफ भी भड़क चुके हैं

इस बार के विधानसभा चुनाव में जब हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह, महामंत्री रामलक्ष्मण सहित कई नेताओं को भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो वे नाराज हो गए. वे अलग से चुनाव लड़ने की बात करने लगे लेकिन योगी ने उनका साथ देने से इन्कार कर दिया.

इसके बाद हिंदू युवा वाहिनी के नेताओं ने अपने सरपरस्त योगी के खिलाफ ही बगावत कर दी. योगी आदित्यनाथ की चेतावनी के बावजूद हिंदू युवा वाहिनी के नेताओं के बागी नेताओं ने 13 सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए.

योगी ने प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह पर पैसे पर बिक जाने, राष्ट्रद्रोही तत्वों के षडयंत्र का शिकार होने के आरोप लगाते हुए उन्हें संगठन से निष्कासित कर दिया. सुनील सिंह के साथ संगठन की स्थापना काल से जुड़े कई नेताओं ने दिया.

सुनील सिंह का कहना था कि महाराज जी (योगी आदित्यनाथ) भाजपा के काले जादू के प्रभाव में हैं. इसलिए हिंदू युवा वाहिनी की उपेक्षा कर रहे हैं. उनका तो यह भी कहना था कि अमित शाह के कहने पर योगी हिंदू युवा वाहिनी को विघटित कर देंगे क्योंकि अब उन्हें इसकी जरूरत नहीं है.

अब जब योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं और उनके हाथ में प्रशासनिक मशीनरी और पुलिस की बागडोर है, तब देखना दिलचस्प होगा कि उन्हें ग्राम रक्षा दल के रूप में हिंदू युवा वाहिनी की जरूरत होगी या नहीं.

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