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अयोध्या में 'मंदिर वहीं बनाएंगे' के नारे को फिर जिंदा कर गए योगी आदित्यनाथ

रामलला के दर्शन करने वाले योगी आदित्यनाथ पहले मुख्यमंत्री हैं

Sanjay Singh Updated On: Jun 01, 2017 08:34 AM IST

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अयोध्या में 'मंदिर वहीं बनाएंगे' के नारे को फिर जिंदा कर गए योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वो किया, जो पिछले करीब तीन दशकों में यूपी के किसी मुख्यमंत्री ने नहीं किया था. बुधवार की सुबह योगी आदित्यनाथ लखनऊ से हेलिकॉप्टर से अयोध्या पहुंचे. वहां हनुमानगढ़ी में पूजा करके योगी सीधे उस जगह पहुंचे जहां अस्थायी मंदिर में रामलला विराजमान हैं.

बाबरी विध्वंस मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और संघ परिवार के दूसरे सीनियर नेताओं को आपराधिक साजिश का आरोपी बनाने के ठीक एक दिन बाद योगी अयोध्या पहुंचे थे.

रामलला के दर्शन करने के बाद योगी आदित्यनाथ ने राम की पैड़ी पहुंचकर सरयू किनारे पूजा की. उत्तर प्रदेश के किसी भी मुख्यमंत्री ने अब तक ऐसा नहीं किया था. हालांकि बीजेपी के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों कल्याण सिंह, रामप्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह ने करीब डेढ़ दशक पहले अयोध्या का दौरा किया था. लेकिन इनमें से कोई भी नेता रामलला के दर्शन करने नहीं गया. रामलला के दर्शन करने वाले योगी आदित्यनाथ पहले मुख्यमंत्री हैं.

रामलला यानी बाल स्वरूप में भगवान राम एक टेंट के नीचे बरसों से विराजमान हैं. पूरे इलाके में जबरदस्त सुरक्षा इंतजाम है. सैकड़ों सुरक्षाकर्मी इसकी लगातार निगरानी करते हैं. जिस जगह कभी बाबरी मस्जिद हुआ करती थी, आज की तारीख में वहां पर राम का मंदिर है. भले ही वो अस्थायी क्यों न हो.

अयोध्या के लिए कई सौगातें दे गए योगी

योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में करीब आठ घंटे गुजारे. लखनऊ रवाना होने से पहले उन्होंने अयोध्या के विकास के लिए 350 करोड़ की कई योजनाओं का एलान किया. स्थानीय धार्मिक नेताओं से सलाह-मशविरे के बाद उन्होंने कई धार्मिक-आध्यात्मिक कार्यक्रम शुरू किए जाने की भी घोषणा की. वाराणसी और हरिद्वार की गंगा आरती की तर्ज पर अयोध्या में सरयू आरती शुरू होगी. पूरे साल रामलीला का आयोजन होगा. साथ ही सरयू महोत्सव का आयोजन किया जाएगा.

Yogi Adityanath

योगी को पता था कि उनकी अयोध्या यात्रा की पूरे देश में चर्चा होगी. वह दिगंबर अखाड़े में रामजन्म भूमि न्यास के महंत नृत्यगोपाल दास के जन्मदिन के कार्यक्रम में भी शामिल हुए. इस मौके पर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, 'मैं राम मंदिर निर्माण को लेकर आपकी भावनाओं को समझता हूं. मुझे पता है कि आप मुझसे क्या सुनना चाहते हैं. मेरी राय आपके जैसी ही है.'

उन्होंने कहा, 'राम मंदिर का विवाद दोनों समुदायों के बीच बातचीत से सुलझाया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने भी ये विवाद बातचीत से सुलझाने की सलाह दी है. उत्तर प्रदेश की सरकार हमेशा ही बातचीत से विवाद सुलझाने के लिए तैयार है. बातचीत के लिए सौहार्दपूर्ण माहौल बन रहा है. कई मुस्लिम संगठनों ने कहा है कि अयोध्या को हिंदुओं के लिए छोड़ देना चाहिए. बहुत से और संगठनों से भी ऐसे ही प्रस्ताव की उम्मीद है. मेरी बात पर भरोसा कीजिए. राम जन्मभूमि का विवाद बातचीत से सुलझा लिया जाएगा'.

आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे में 'रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे' का नारा फिर से गूंजा. अस्सी और नब्बे के दशक में मंदिर आंदोलन के दौरान ये गूंज अक्सर सुनाई देती थी. आखिरी बार ये नारा फरवरी 2002 में सुनाई दिया था. तब विश्व हिंदू परिषद और सहयोगी संगठनों ने राम मंदिर के लिए शिलादान कार्यक्रम आयोजित किया था. शिलादान का कार्यक्रम महंत राम चंद्र परमहंस की अगुवाई में हुआ था.

परमहंस उस वक्त दिगंबर अखाड़े के प्रमुख हुआ करते थे. दिसंबर 1949 में बाबरी मस्जिद के अंदर रामलला की मूर्तियां रखने में परमहंस का अहम रोल था. अयोध्या दौरे में आदित्यनाथ ने दिगंबर अखाड़े में परमहंस समाधि के पुनर्निर्माण का भी एलान किया. इसके दूरगामी सियासी मतलब निकलते हैं.

Yogi Adityanath in Ayodhya

(फोटो: पीटीआई)

संत भी, सीएम भी

धार्मिक नगरी अयोध्या में योगी आदित्यनाथ सीएम और संत के मिले-जुले रोल में दिखाई पड़े. आदित्यनाथ ने कहा कि, 'अयोध्या में आकर मुझे लगता है कि मैं संन्यासी हूं. यहां जमा संतों के जैसा ही महसूस करता हूं.'

योगी आदित्यनाथ देश के ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं, जो एक सरकार के मुखिया भी हैं और एक पीठ के महंत भी. वो गोरक्षनाथ पीठ के प्रमुख हैं. आदित्यनाथ ने अयोध्या में अपने भाषण का अंत जय श्रीराम के नारे से किया.

अयोध्या के विकास को लेकर योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अपने इरादे 9 मई को ही जाहिर कर दिए थे. उस दिन यूपी की कैबिनेट ने अयोध्या और फैजाबाद की नगरपालिकाओं को एक करके अयोध्या नगर निगम के गठन का एलान किया था. नगर निगम में फैजाबाद की जगह अयोध्या का नाम रखकर योगी सरकार ने साफ कर दिया था कि उनका जोर फैजाबाद से ज्यादा अयोध्या के विकास पर रहेगा. उसी कैबिनेट बैठक में मथुरा और वृंदावन की नगरपालिकाओं को मिलाकर मथुरा-वृंदावन नगर निगम के गठन का भी एलान किया गया था.

आदित्यनाथ राम मंदिर निर्माण के कट्टर समर्थक रहे हैं. उन्होंने इस मुद्दे पर हिंदू धार्मिक गुरुओं के साथ गोरखपुर में बैठक भी की थी. उनके गुरू महंत अवैद्यनाथ भी मंदिर आंदोलन के प्रमुख नेताओं में थे. महंत अवैद्यनाथ राम जन्मभूमि न्यास के प्रमुख भी रहे थे. न्यास मंदिर आंदोलन से जुड़े धार्मिक नेताओं का संगठन है. एक बार महंत अवैद्यनाथ ने कहा था कि राम मंदिर का निर्माण उनके शिष्य आदित्यनाथ करेंगे.

Advani in Lucknow

सीबीआई कोर्ट के आडवाणी के खिलाफ आरोप तय करने पर वेंकैया नायडू के सिवा कोई बीजेपी नेता नहीं बोला था. लेकिन योगी आदित्यनाथ ने बीजेपी के संस्थापक रहे आडवाणी का पूरे दस मिनट तक वीवीआईपी गेस्ट हाउस में स्वागत के लिए इंतजार किया था. उन्होंने आडवाणी से बंद कमरे में काफी देर तक बात की थी. जब आडवाणी अदालत जाने के लिए रवाना हुए तो योगी ने ही उन्हें विदा किया. आडवाणी का योगी से पुराना नाता रहा है. आडवाणी का आदित्यनाथ के गुरू महंत अवैद्यनाथ से भी करीबी रिश्ता रहा था. शायद ये मौका आदित्यनाथ के वो कर्ज उतारने का है.

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