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जेडीयू अध्यक्ष के बयान के बाद गठबंधन की हलचल और बढ़ गई है?

जेडीयू के बिहार अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा है कि ‘फैसला तो होकर ही रहेगा'

Amitesh Amitesh | Published On: Jul 13, 2017 03:21 PM IST | Updated On: Jul 13, 2017 05:51 PM IST

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जेडीयू अध्यक्ष के बयान के बाद गठबंधन की हलचल और बढ़ गई है?

जेडीयू के बिहार अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा है कि ‘फैसला तो होकर ही रहेगा.’ एक टेलीविजन इंटरव्यू में जेडीयू अध्यक्ष के दिए इस बयान के बाद सियासी हलचल बढ़ गई है. वशिष्ठ नारायण सिंह का बयान तेजस्वी यादव को लेकर है जिनका कहना है कि ‘इस मुद्दे पर फैसला होकर ही रहेगा, भले ही इसमें जितना वक्त लगे.’

उनके बयान ने जेडीयू के रुख को एक बार फिर से साफ कर दिया है. ये बयान नीतीश सरकार में डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव की सफाई के बाद आया है. तेजस्वी ने अपनी सफाई में उन आरोपों पर कुछ भी नहीं बोला है जिसको लेकर सीबीआई ने केस दर्ज कर लिया है. भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे तेजस्वी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कुछ बोलने के बजाए इसे बीजेपी की साजिश बताकर गोल-मोल जवाब दे दिया था.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तथ्यों और प्रामाणिकता के साथ सफाई मांगी थी लेकिन, सफाई आई तो मूल मुद्दा ही गायब था. अब जेडीयू तेजस्वी के जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आ रही है.

लेकिन, अब वशिष्ठ नारायण सिंह ने तेजस्वी पर फैसला होने की बात कहकर एक बार फिर से महागठबंधन के बीच की तनातनी को सामने ला दिया है.

जेडीयू की तरफ से सीधे इस्तीफा नहीं मांगा जा रहा है, लेकिन, तेजस्वी यादव के जवाब से असंतुष्ट जेडीयू सार्वजनिक जीवन में शुचिता की बात कर रही है. वक्त का इंतजार करने की बात कह रही है.

जेडीयू का बयान आरजेडी पर दबाव बढ़ाने वाला है. वशिष्ठ नारायण सिंह अपने नेता नीतीश कुमार के जीरो टोलरेंस की बात को ही आगे बढ़ा रहे हैं.

लेकिन, आरजेडी अपने पुराने रुख पर कायम है. तेजस्वी के इस्तीफे का तो कोई सवाल ही नहीं है. आरजेडी के बिहार अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे भी इस्तीफे के सवाल से इनकार कर रहे हैं. आरजेडी अध्यक्ष ने इशारों-इशारों में अपनी पार्टी की ताकत का एहसास कराने की कोशिश की.

एक टेलीविजन चैनल को इंटरव्यू के दौरान रामचंद्र पूर्वे ने कहा कि 'हमारे पास 80 विधायक हैं, हमारे सांसद भी हैं और बिहार में हमारा व्यापक जनाधार भी है.' पूर्वे का बयान जेडीयू के बिहार अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह के बयान का जवाब माना जा रहा है.

आरजेडी के तेवर से साफ लग रहा है कि वो भी अपनी ताकत का एहसास जेडीयू को कराना चाहती है. कुछ यही हाल बाकी आरजेडी नेताओं का भी है.

Nitish_Kumar

नीतीश कुमार ने गेंद आरजेडी के पाले में डालकर तथ्यों और प्रामाणिकता के साथ सफाई मांगी थी. लेकिन, अब ना ही तथ्य मिला और ना ही कोई प्रमाणिकता ही दिखी. उल्टे आरोपों की झड़ी लगा दी. मीडिया भी लपेटे में आ गया. यानी गेंद फिर से जेडीयू के पाले में है. अब फैसला जेडीयू को करना है.

हालांकि, रह-रह कर बीजेपी और एनडीए के घटक दलों की तरफ से नीतीश पर डोरे डालने की कोशिश भी हो रही है. लेकिन, अबतक नीतीश ने चुप्पी साध रखी है. सियासी गलियारों में नीतीश की चुप्पी किसी बड़े फैसले के पहले की खामोशी का संकेत देती दिख रही है. जिसकी आहट रह-रह कर जेडीयू नेताओं के बयानों से सामने आ रही है.

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