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लालू को बचाने के लिए क्या अब नीतीश करेंगे 'थेथरलॉजी'?

लालू यादव एंड फैमिली के कथित भ्रष्टाचार पर नीतीश कुमार की चुप्पी से कई सवाल खड़े होते हैं

Amitesh Amitesh Updated On: May 17, 2017 12:01 AM IST

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लालू को बचाने के लिए क्या अब नीतीश करेंगे 'थेथरलॉजी'?

बिहार में आम बोलचाल की भाषा में एक शब्द का खूब इस्तेमाल होता है. वो शब्द है थेथर. थेथर का मतलब होता है कि वह व्यक्ति जो अपनी कही गलत बातों को भी कुतर्क के जरिए सही ठहराने पर अड़ा रहता है.

लेकिन, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने थेथर से एक नए शब्दावली का इजाद किया है 'थेथरलॉजी'. नीतीश कुमार थेथरलॉजी के इस सिद्धांत को लालू यादव के लिए इस्तेमाल करते थे.

यह बात उन दिनों की है जब नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री नहीं थे. बिहार में लालू-राबड़ी शासनकाल का दौर था. उन दिनों लालू यादव के कुतर्क और हर हाल में अपने गलत कदम को भी सही ठहराने की कोशिश में भिड़े रहने वाले लालू यादव के इस कदम को नीतीश कुमार थेथरलॉजी कहते थे.

उस दौर में नीतीश कुमार ने लालू के खिलाफ झंडा बुलंद कर रखा था. संसद से लेकर सड़क तक हर जगह उनके निशाने पर लालू रहते थे. लेकिन, अब वही नीतीश कुमार उसी लालू यादव के समर्थन से बिहार में सरकार चला रहे हैं.

लालू यादव के दोनों बेटे नीतीश कुमार की सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं

लालू यादव के दोनों बेटे नीतीश कुमार की सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं

लालू यादव एंड फैमिली पर भ्रष्टाचार के तमाम आरोप

हाल के दिनों में लालू यादव एंड फैमिली के उपर फिर से भ्रष्टाचार के तमाम आरोप लगे हैं. गलत तरीके से बेनामी संपत्ति अर्जित करने के मामले को लेकर लालू यादव के दोनों बेटों के उपर आरोप लग रहे हैं. लालू की बेटी मीसा भारती के उपर भी कुछ इसी तरह के आरोप हैं.

अब इस मामले में इनकम टैक्स की तरफ से लालू के ठिकानों पर की गई छापेमारी के बाद सवाल नीतीश कुमार से पूछे जाएंगे. चूंकि अब तक साफ-सुथरी छवि वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस पूरे मामले में चुप्पी साधे बैठे हैं.

हालाकि, छापेमारी की घटना के ठीक एक दिन पहले उनकी तरफ से यह जरूर कहा गया था कि केंद्र चाहे तो जांच करा ले. लेकिन, उनकी सरकार की तरफ से किसी भी तरह की न तो कोई कार्रवाई की गई और न ही ऐसे कोई संकेत दिए गए.

ऐसे में नीतीश कुमार खुद सवालों के घेरे में हैं. सवाल ये है कि अब नीतीश कुमार कैसे लालू यादव और उनके बेटों का बचाव कर पाएंगे. अगर बचाव नहीं भी करते तो क्या नीतीश के कैबिनेट में लालू के दो दागदार बेटों का बने रहना उनकी नीयत पर सवाल खड़ा नहीं करेगा.

Nitish Kumar

लालू यादव के परिवार के कथित भ्रष्टाचार पर नीतीश कुमार के चुप रहने को लेकर काफी सवाल उठाए गए

नीतीश कुमार की छवि साफ-सुथरे नेता की रही है. लेकिन, लालू यादव के साथ जाने के बाद से ही उनके उपर यह सवाल खड़ा होता रहा है कि लालू के साथ वो कैसे निभा पाएंगे. अंदेशा इसी बात का था कि आने वाले दिनों में लालू अगर नहीं बदले तो क्या नीतीश उनके लिए 'बदल' जाएंगे.

कार्रवाई करने में तनिक भी देर नहीं लगाई

फिलहाल नीतीश कुमार संभल कर चल रहे हैं. लालू यादव के साथ सरकार चलाने के बावजूद नीतीश कुमार ने अब तक अपनी पार्टी जेडीयू के किसी भी मंत्री या विधायक को बख्शा नहीं है. किसी भी आरोप में फंसने के बाद नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के नेताओं पर कार्रवाई करने में तनिक भी देर नहीं लगाई.

इसके उलट, लालू यादव तमाम आरोपों के बावजूद अपने विधायकों के लिए हमेशा ढाल लिए नजर आते हैं. मजे की बात यह है कि तमाम अंतरविरोधों के बावजूद नीतीश और लालू अपने-अपने हिसाब से अपनी पार्टी को चलाते आ रहे हैं.

लेकिन, अब सवाल पार्टी का नहीं, सरकार का है और लालू यादव के दोनों बेटे नीतीश कैबिनेट में मंत्री हैं. एक बेटे तेजस्वी यादव तो उप-मुख्यमंत्री भी हैं. ऐसी हालात में नीतीश के लिए चुप रहना आसान नहीं होगा क्योंकि यह मामला लालू के परिवार और पार्टी का नहीं, उनकी सरकार के भीतर का है.

इनकम टैक्स विभाग की तरफ से अब लालू के 22 ठिकानों पर छापेमारी के बाद नीतीश कुमार क्या लालू यादव के दोनों बेटे और अपने दोनों मंत्रियों पर कोई कार्रवाई करेंगे.

Lalu Yadav Residence in Patna

इनकम टैक्स की छापेमारी के दौरान पटना स्थित लालू यादव के घर के बाहर मौजूद मीडियाकर्मियों की भीड़ (फोटो: पीटीआई)

नीतीश कुमार की असली परीक्षा होगी

इस मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर का मानना है कि जब केंद्र की एजेंसी लालू के दोनों बेटों के खिलाफ कार्रवाई करेगी तो फिर नीतीश कुमार की असली परीक्षा होगी. सुरेंद्र किशोर फ़र्स्टपोस्ट से बातचीत में कहते हैं कि 'अगर इन दोनों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट या फिर एजेंसी की तरफ से पूछताछ की जाती है तो फिर नीतीश कुमार के लिए इन दोनों को अपने साथ रख पाना मुश्किल होगा.'

नीतीश कुमार के अब तक के स्वभाव से तो यही लगता है कि अपनी छवि की कीमत पर सरकार में बने रहना उनके लिए मुश्किल होगा. लेकिन, नीतीश अगर ऐसा करने का साहस नहीं जुटा पाते तो फिर उनके उपर भी थेथरलॉजी का वही फॉर्मूला लागू होगा जिसे कभी वो लालू के लिए इस्तेमाल किया करते थे.

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