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बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बंगाल दौरे से टीएमसी कैंप में खलबली क्यों है?

अब नंबर दो से नंबर वन की भूमिका में आने की बीजेपी की कोशिश ही टीएमसी के साथ उसके टकराव को जन्म दे रही है

Amitesh Amitesh Updated On: Sep 11, 2017 08:23 PM IST

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बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बंगाल दौरे से टीएमसी कैंप में खलबली क्यों है?

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह तीन दिनों के बंगाल दौरे पर राजधानी कोलकाता पहुंचे तो वहां उनका जोरदार स्वागत हुआ. भव्य स्वागत के जरिए बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस आवाज को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तक पहुंचाने की कोशिश की.

लेकिन, लगता है इस आवाज की गूंज पहले ही ममता बनर्जी तक पहुंच चुकी है. अगर ऐसा ना होता तो अमित शाह के कोलकाता पहुंचने से पहले ही नेता जी इंडोर स्टेडियम की बुकिंग रद्द नहीं की गई होती. अपने कोलकाता दौरे के दूसरे दिन 12 सितंबर को अमित शाह के कार्यक्रम के लिए नेता जी इंडोर स्टेडियम की बुकिंग की गई थी जिसे मेंटेनेंस के नाम पर रद्द कर दिया गया.

बार-बार हो रही इस तरह की घटनाओं के बाद बीजेपी काफी नाराज है. बीजेपी की राज्यसभा सांसद रूपा गांगुली ने ममता सरकार पर हर मुद्दे पर सियासत करने का आरोप लगा दिया. रूपा गांगुली की तरफ से साफ कहा गया कि ‘कांग्रेस और लेफ्ट के मामले में इस तरह की कोई भी रोक नहीं लगाई गई, बल्कि बीजेपी की ही रैली और कार्यक्रम पर रोक लगा दी जाती है.’

बीजेपी के भीतर नंबर 1 बनने की चाहत

दरअसल बीजेपी पूरे बंगाल में धीरे-धीरे अपना पांव पसार रही है. लेफ्ट और कांग्रेस को किनारा कर इस वक्त बीजेपी बंगाल में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में काफी हद तक खड़ी भी हो गई है. इसकी एक बानगी देखने को मिली अभी हाल ही में हुए स्थानीय निकाय के चुनाव में, जहां टीएमसी के सामने सिर्फ बीजेपी ही टिक पाई, कांग्रेस-लेफ्ट का तो कहीं अता-पता तक नहीं था.

अब नंबर दो से नंबर वन की भूमिका में आने की बीजेपी की कोशिश ही टीएमसी के साथ उसके टकराव को जन्म दे रही है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह लगातार बंगाल के दौरे पर जा रहे हैं. इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं में जान फूंकने के साथ-साथ ममता बनर्जी को घेरने की रणनीति बनाई जा रही है.

अभी कुछ दिन पहले ही वृंदावन में संघ की बैठक में पहुंचे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने बंगाल में संघ से मदद की गुहार भी लगाई थी. बंगाल में आरएसएस का संगठन काफी मजबूत है. बीजेपी को लगता है कि ‘मिशन बंगाल’ में सफल होना है तो संघ की सहायता बगैर ऐसा कर पाना संभव नहीं.

Kolkata: West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee during a press conference at Nabanna(State Secretariat) in Kolkata on Tuesday. PTI Photo(PTI7_4_2017_000168B)

संघ और बीजेपी के कार्यक्रमों रुकावट डाल रही हैं ममता

लेकिन, बीजेपी और संघ की सक्रियता ममता बनर्जी और उनके कैंप को रास नहीं आ रही है. कुछ दिन पहले ही बंगाल से ऐसी खबर आई जिसमें ममता सरकार के फैसले पर सवाल उठने लगे. अगले तीन अक्टूबर को कोलकाता में ही संघ प्रमुख मोहन भागवत का एक कार्यक्रम था, लेकिन, इस ऑडिटोरियम की बुकिंग मेंटेनेंस के नाम पर रद्द कर दी गई.

मोहन भागवत को भारत के राष्ट्रवादी आंदोलन में सिस्टर निवेदिता की भूमिका पर बोलना था. इस कार्यक्रम में राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी को भी शिरकत करनी थी. लेकिन, सरकारी ऑडिटोरियम में बुकिंग रद्द कर दी गई.

लेकिन, लगता है ममता बनर्जी ने बीजेपी और संघ परिवार के नेताओं को बंगाल से दूर रहने की ठान ली है. अगर ऐसा ना होता तो उनके दौरे के वक्त होने वाले कार्यक्रम को लेकर इस तरह व्यवधान ना होता, भले ही बहाना कुछ भी हो.

ममता और केंद्र सरकार में टकराव जारी

अमित शाह के बंगाल दौरे के वक्त ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के प्रसारण को लेकर नई तरह की बहस चल रही है. दरअसल, स्वामी विवेकानंद के शिकागो की धर्म संसद में दिए गए भाषण के 125 साल पूरा होने के मौके पर प्रधानमंत्री का आज ही भाषण हुआ.

इस भाषण के प्रसारण को लेकर यूजीसी ने 40000 संस्थानों को एक सर्कुलर जारी किया था जिसमें कहा गया था कि इस मौके पर प्रधानमंत्री के भाषण को लाइव दिखाने का इंतजाम करें. लेकिन, ममता सरकार की तरफ से इस सर्कुलर को नजरअंदाज किया गया.

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तस्वीर: पीटीआई

ममता की तरफ से बीजेपी और केंद्र की बीजेपी सरकार से टकराव जारी है. लेकिन, इन सबके बावजूद बीजेपी अपने मिशन मोड में काम कर रही है. पार्टी निचले स्तर पर संगठन को मजबूत करने, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की टीम तैयार करने के साथ-साथ संघ के साथ समन्वय कर आगे बढ़ रही है.

बांग्लादेश से सटी सीमा पर तस्कर, अवैध हथियारों का मुद्दा और फेक करेंसी के मुद्दे को बीजेपी पहले से ही उठाती रही है. बशीरहाट की हिंसा और इस तरह की और हिंसक वारदातों के बाद ममता सरकार के रवैयै ने उसे और ‘जमीन’ दे दी है. बीजेपी ममता बनर्जी पर खास समुदाय पर पक्षपात का आरोप लगा रही है. इससे होने वाले ध्रुवीकरण का फायदा शायद बीजेपी को मिल भी जाए.

लेकिन, संघ और बीजेपी के लोगों को बंगाल में जाकर कार्यक्रम करने से रोकने की अप्रत्यक्ष कोशिश ममता बनर्जी की सियासत को नुकसान पहुंचा सकती है.

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