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बिहार: ये हैं कांग्रेस ऑफिस में मारपीट के असली डायरेक्टर

कांग्रेस के एक एमएलए का इस नेताजी के बारे में कहना है कि ‘वह बहकुआ कबूतर है, दूसरे के घर में घुसकर तहस-नहस करना उसका स्वभाव है'

Kanhaiya Bhelari Kanhaiya Bhelari Updated On: Oct 11, 2017 10:44 AM IST

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बिहार: ये हैं कांग्रेस ऑफिस में मारपीट के असली डायरेक्टर

दिसंबर 1990 की बात है. रात के 9 बजे थे. चार मीडिया कर्मी पटना के चूड़ी गली में रहने वाले एक चर्चित नेता और राज्य के सेकेंड पॉवर सेंटर रंजन प्रसाद यादव के घर पर बैठे थे. ठेहुना (घुटना) तक कुर्ता पहने एक युवक आकर यादव को साष्टांग दंडवत करता है. चरणस्पर्शी को अनमने भाव से कनखी से देखकर कर्कश वाणी में नेता जी बोलते हैं, ‘जाइए बाद में आइएगा. देखते नहीं हैं अभी नामी पत्रकारों के साथ मेरी रंगीन बैठक चल रही है.'

अपनी येजडी बाइक पर बैठकर युवक भारी मन से चला जाता है. ठीक 15 साल बाद वही युवक मनमोहन सिंह सरकार में आरजेडी कोटे से मंत्री बन जाता है. गुरु और राज्यसभा सदस्य रंजन प्रसाद यादव गुड़ ही रह गए और चेला चीनी बन जाता है. ये कसक नेता जी को आज तक है. हालांकि बाद के दौर में नेता जी नीतीश कुमार की टोली में शामिल होकर लालू प्रसाद को चुनाव में पटकने की अपनी मनौती को पूरा कर लिए.

सयाना हो गया चेला

और आज वही युवक सयाना होकर देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को बिहार में हाईजैक करने का अथक प्रयास कर रहा है. बीते सोमवार कांग्रेस के पटना ऑफिस सदाकत आश्रम में जो कुर्ता फाड़ और जूतम-पैजार बैठक हुई वो सब उसी पूर्व मंत्री और सयाने नेता के द्वारा रची गई चक्रव्यूह की एक झलक थी. उनका एक खास आदमी इस लेखक को बताता है, ‘सिंह साहब ने तय कर लिया है कि बिहार कांग्रेस को अपनी पॉकिट में कर लेना है.’

बिहार के पुरनका (पुराने) राजा भी सिंह साहब को तन-मन से असिस्ट कर रहे हैं. किसी से धन लेने की जरूरत नहीं है. उनके जमात के एक पत्रकार बताते हैं कि मंत्री रहते हुए महोदय ने करोड़ों की कमाई की है. कमाने की कला से खुश होकर ही आरजेडी बाॅस ने अपने कोटे से उनको लाल बत्ती दिलवाया था.

बकौल पत्रकार, ‘एक बार उन्होंने मुझे अपने दिल्ली आवास पर भोजन के लिए बुलाया और पूछा कि मेरे इस घर का दाम आपकी नजर में कितना होगा. मैंने जो दाम करोड़ों में बताया उसपर हंसते हुए व्यंग्य के अंदाज में कहा कि आपलोग कलम चलाते रह जाइएगा. अरे जनाब हमने आपके द्वारा अनुमान लगाए गए कीमत से 6 गुनी अधिक कीमत में खरीदा है.’ पत्रकार आगे बताते हैं कि ‘मैंने देखा कि एक दर्जन महंगी गाड़ियां उनके पास हैं.’

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रंजन और लालू यादव से सीखी है राजनीतिक कलाबाजी

दरअसल ये धन बटोरू नेता रंजन प्रसाद यादव और फिर लालू प्रसाद यादव के सानिध्य में रहकर राजनीति में काम आने वाले हर कलाबाजी को सीख लिए और बाद के दौर में आरजेडी से पल्टी मारकर कांग्रेस में चले गए. राहुल गांधी की गणेश परिक्रमा करके 2015 में विधानसभा का टिकट झटक लिए. लेकिन जनता ने हाउस के अंदर जाने का परमिट नहीं दिया. बीजेपी की भी सवारी करने के लिए जीतोड़ मेहनत किए लेकिन असफल रहे.

सिंह साहब अभी जी जान से बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष बनने में लगे हैं. रणनीति के तहत इन्होंने कांग्रेस की बैठक में अराजकता का माहौल बनवाया और अपने लोगों को सदाकत आश्रम के अंदर भेजकर नरेंद्र मोदी का नारा लगवाया. पर्दे के पीछे से बीट कवर करने वाले पत्रकारों को मोबाइल से बता रहे थे कि कैसे पूर्व बिहार प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी ने सरकार के सहयोग से कांग्रेस के दफ्तर में हंगामा करवाया है.

लेकिन उनको पता है कि सच्चाई छिप नहीं सकती बनावट के वसूलों से. चोर की तरह सेंधंमारी वाली जगह पर ही पकड़ लिए गए हैं. फिर भी उनके खिलाफ कांग्रेस आलाकमान कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करेगी क्योंकि बिहार कांग्रेस फिलहाल लालू प्रसाद यादव के इशारे पर भांगड़ा कर रही है. दूसरी तरफ अशोक चौधरी के बारे में जोर से चर्चा है कि कुल 27 में से 19 विधायकों को तोड़कर सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू में शामिल होने को बेकरार हैं. शुभ मुहुर्त और सीएम की तरफ से ग्रीन सिग्नल का इंतजार है.

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प्रेस को संबोधित करते अशोक चौधरी व अन्य (तस्वीर: न्यूज18 हिंदी)

जहां बाहुबली होंगे वहां अंजामे गुलिस्ता क्या होगा?

वैसे अशोक चौधरी (जो विधायक भी हैं) ने इस खबर का खंडन भी किया है. मंगलवार को ही उन्होंने अपने आवास पर बाकायदा प्रेस वार्ता करके इस तरह की चर्चा पर विराम लगाने की कोशिश की है. सोमवार की घटना की निंदा करते हुए चौधरी ने बिना नाम लिए उस मौसमी नेता को मारपीट के लिए जिम्मेवार ठहराया. ‘वह आदमी एक घोषित अराजक दल से हमारी पार्टी में आया है. उसका नेचर कभी नहीं बदल सकता है.’ एक कांग्रेस एमएलए का कहना है कि ‘वह बहकुआ कबूतर है, दूसरे के घर में घुसकर तहस-नहस करना उसका स्वभाव है.’

वैसे देखा जाए तो कांग्रेस हेडक्वार्टर सदाकत आश्रम की बैठक में ये मारपीट की पहली घटना नहीं है. नब्बे के दशक में एक अति भ्रष्ट सीएम ने मौखिक निर्देश दिया था कि चुनाव में उसी को पार्टी का टिकट मिलेगा जो बाहुबली होगा. अंदाजा लगाया जा सकता है कि जहां बाहुबली होंगे वहां क्या होगा?

बहरहाल, बिहार में अपना वजूद खो चुकी और कभी लालू प्रसाद यादव तो कभी नीतीश कुमार के प्रकाश से प्रकाशित होने वाली ये ग्रैंड ओल्ड पार्टी आने वाले दिनों में कई बार ऐसी घटनाओं से रूबरू होगी. ऐसी भविष्यवाणी कांग्रेस के ही कई वरिष्ठ नेताओं ने इस लेखक से की. ‘वैसे हमलोग भगवान से प्रार्थना करते हैं कि ऐसा न हो क्योंकि इससे बिहार और पार्टी दोनों की बदनामी होगी.’

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