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अनिल माधव दवे: क्या थी दवे की आखिरी ख्वाहिश

दवे ने पांच साल पहले यानी 23 जुलाई 2012 को ही अपनी वसीयत में अंतिम इच्छा लिख दी थी

FP Staff | Published On: May 18, 2017 07:11 PM IST | Updated On: May 18, 2017 07:45 PM IST

अनिल माधव दवे: क्या थी दवे की आखिरी ख्वाहिश

केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री अनिल माधव दवे की गुरुवार को दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई. पर्यावरण प्रेमी दवे ने अपनी वसीयत पांच साल पहले लिख दी थी. अपनी सादगी के मशहूर दवे की अंतिम इच्छा थी कि उनकी याद में पौधे लगाकर इन्हें बड़ा किया जाए और नदी-तलाब को बचाया जाए.

दवे ने पांच साल पहले यानी 23 जुलाई 2012 को ही अपनी वसीयत में अंतिम इच्छा लिख दी थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसे शेयर किया है. पीएम ने लिखा ‘यह डोक्यूमेंट प्रमाण है साधारणता और निस्सवार्थता का. यह निष्कामा कर्म योगा की व्याख्या है. हम आपको बहुत याद करेंगे.’

वसीयत में दवे ने अपने नाम से कोई प्रतिमा, उपयोगिता चलाने से साफ मना किया है. उन्होंने किसी भी प्रकार के दिखावे से भी मना किया है. दवे ने अपने दाह संस्कार भी बांद्राभान में करने के लिए कहा था.

दवे की मौत पर पीएम मोदी ने भी दी श्रद्धांजलि

बता दें कि दवे एक अच्छे पर्यावरणविद थे और इसीलिए उन्होंने नर्मदा नदी को लेकर मुहिम भी चलाई. भोपाल में अपने घर का नाम भी उन्होंने नदी का घर रखा है, जिसे लोगों के लिए एक संग्राहलय के रूप में खोला गया है.

गौरतलब है कि अनिल माधव दवे अविवाहित थे और उन्हें चुनाव प्रबंधन में महारत हासिल थी. भाजपा संगठन को मजबूत करने में अनिल माधव दवे ने अहम भूमिका निभाई है.

दवे ने अपनी वसीयत में अपने चाहने वालों को संदेश दिया है कि अगर आप वाकई में उनके लिए कुछ करना चाहते हैं तो सिर्फ वृक्षों को लगाएं और उन्हें सुरक्षित रखा जाए. पीएम मोदी ने दवे की मृत्यु को पर्सनल लॉस बताया था.

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