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स्कूलों में बंगाली भाषा को अनिवार्य किए जाने पर जीजेएम और ममता में ठनी

जीजेएम आरोप लगाया कि राज्य सरकार दार्जिलिंग के सरकारी स्कूलों में बंगाली थोपने का प्रयास कर रही है

Bhasha | Published On: Jun 08, 2017 08:11 PM IST | Updated On: Jun 08, 2017 09:05 PM IST

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स्कूलों में बंगाली भाषा को अनिवार्य किए जाने पर जीजेएम और ममता में ठनी

गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दौरे के समय गुरुवार उनका विरोध करते हुए जुलूस निकाला और आरोप लगाया कि राज्य सरकार दार्जिलिंग के सरकारी स्कूलों में बंगाली थोपने का प्रयास कर रही है.

जीजेएम के समर्थकों ने पार्टी प्रमुख बिमल गुरूंग के नेतृत्व में जुलूस निकाला और ‘ममता वापस जाओ’ जैसे नारे लगाए.

जीजेएम ने दार्जिलिंग हिल्स इलाके में अनिश्चितकालीन बंद की भी घोषणा की है. जीजेएम राज्य सरकार के उस फैसले का विरोध कर रही है जिसमें सरकारी स्कूलों में बंगाली भाषा को पढ़ाया जाना जरूरी कर दिया गया है.

क्या है मामला?

hill fire

तस्वीर: न्यूज़18 हिंदी

जीजेएम समेत कई राजनीतिक दल लंबे समय से तीन पहाड़ी इलाकों कुर्सियांग, कलिम्पोंग और दार्जिलिंग को मिलाकर अलग गोरखालैंड राज्य बनाए जाने की मांग कर रहे है. इन पहाड़ी इलाकों में गोरखा समुदाय की बहुलता है.

जीजेएम गोरखा समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली सबसे बड़ी पार्टी है. इस पार्टी का आरोप है कि पश्चिम बंगाल की सरकारें गोरखा समुदाय के साथ भेदभाव करती हैं और गोरखा समुदाय के ऊपर बंगाली समुदाय को तरजीह देती रही है. गोरखा समुदाय नेपाली भाषी हैं. नेपाली भाषा को संवैधानिक दर्जा भी प्राप्त है.

अलग गोरखालैंड राज्य की मांग केंद्र और राज्य सरकारों ने नहीं मानी है लेकिन गोरखा समुदाय की हितों की रक्षा के लिए स्वायत्त 'गोरखालैंड टेरीटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन' (जीटीए) का गठन 1988 में किया गया था. फिलहाल जीटीए का नाम बदलकर 'दार्जलिंग गोरखा हिल कौंसिल' कर दिया गया है.

वर्तमान विवाद की वजह

हाल ही में पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा कि राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में बंगाली भाषा पढ़ाई जाए. ममता बनर्जी ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा है वे नेपाली भाषा पर बंगाली भाषा को तरजीह नहीं दे रही हैं बल्कि त्रिभाषा फॉर्मूले को राज्य में लागू कर रही है.

ममता ने यह भी कहा कि हमारी सरकार ने ही प्रदेश सरकार की नौकरियों में भर्तियों के लिए नेपाली को आधिकारिक भाषाओं में से एक बनाया है.

मुख्यमंत्री ने बुधवार को मिरिक में एक सभा में भी कहा था कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि पहाड़ों में बांग्ला भाषा अनिवार्य होगी और जीजेएम के दुष्प्रचार को ‘बड़ा झूठ’ करार दिया.

उन्होंने जीजेएम के नेता बिमल गुरुंग पर चुनाव नजदीक देखकर राजनीति करने का आरोप लगाया.

Mamata Banerjee

तृणमूल कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि जीजेएम के कार्यकर्ताओं ने ममता की तस्वीरें और पार्टी के पोस्टर फाड़ दिए. उधर ममता बनर्जी को गुरुवार को सड़कों पर पहाड़ी लोगों और पर्यटकों का अभिनंदन करते देखा गया.

तृणमूल समर्थकों ने कुर्सियांग में जुलूस निकालकर जीजेएम प्रमुख बिमल गुरूंग को मदन तमांग हत्या मामले में गिरफ्तार करने की मांग की.

ममता बनर्जी ने इस मामले पर एक मीटिंग भी बुलाई है.

ममता ने यह भी कहा है कि जब तक दार्जिलिंग में हिंसा खत्म नहीं हो जाएगी तब तक वे दार्जलिंग छोड़कर नहीं जाएंगी.

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