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हम नहीं चाहते कि विजय माल्या लौटें, कहीं उनका मुंह खुल गया तो?

बेहतर यही है कि एक सुरक्षित दूरी बनाए रहो और विजय माल्या और उनके संगी-साथियों का पीछा करते रहो

Bikram Vohra | Published On: Jun 15, 2017 06:23 PM IST | Updated On: Jun 15, 2017 06:51 PM IST

हम नहीं चाहते कि विजय माल्या लौटें, कहीं उनका मुंह खुल गया तो?

वेस्टमिन्स्टर की अदालत में चीफ मजिस्ट्रेट एम्मा अर्बथनॉट ने अचरज जताया है कि भारत विजय माल्या के प्रत्यर्पण से जुड़े कागजात अब भी पेश नहीं कर सका है. मजिस्ट्रेट अर्बथनॉट खुलकर बोलीं. उनके ऐसा कहना उचित भी है. मामले को छह महीने हो गये लेकिन भारत की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है.

हमलोग विजय माल्या की वापसी चाहते ही नहीं

मैजिस्ट्रेट बस एक ही बात नहीं समझ पा रहीं हैं. बात यह कि ऐसे हालात पर शुरुआत में हम ढोल-नगाड़े तो खूब बजाते हैं, बढ़-चढ़कर दावे करते हैं लेकिन सच यह है कि हमलोग विजय माल्या की वापसी चाहते ही नहीं. इतनी जहमत कौन उठाये भला. किसको ऐसा करने की जरुरत पड़ी है? और, इस दरम्यान बीच-बीच में मीडिया को इंटरपोल से जारी रेड कार्नर नोटिस की बात बताई जा सकती है, या फिर ऐसा ही कोई डरावना तकनीकी शब्द मीडिया के मुंह पर उछाला जा सकता है ताकि मीडिया को लगे कि आखिर जीत सच्चाई की ही होनी है.

इससे यह भी संदेश जायेगा कि सत्ताधारी पार्टी इंसाफ पाने के लिए लड़ रही है, लोग समझेंगे कि सरकार एकदम ठीक कर रही है. लोगों को खुश करने के लिए इतना भर काफी है! कसर बस इतनी भर है कि माल्या जैसे लोग एक तरफ का ही टिकट कटाते हैं, वे वापस लौटकर नहीं आते. और इससे भी ज्यादा अहम है यह तथ्य कि माल्या जैसों को वापस नहीं लाया जाता.

निश्चित ही हम नहीं चाहते कि माल्या लौटें. वर्ना इस बात की और क्या व्याख्या हो सकती है कि माल्या और उनके संगी-साथी एयरपोर्ट के विजिटर्स लाऊंज में बड़े आराम से अपना नाश्ता निबटाकर जेट एयरवेज के विमान पर बैठें.

शायद सोच यह चल रही है कि अगर उनको वापस बुला लिया गया तो फिर उनके साथ किया क्या जाएगा ? विजय माल्या के साथ क्या करना है, शायद हम यह नहीं जानते. सो बेहतर यही है कि एक सुरक्षित दूरी बनाए रहो और विजय माल्या और उनके संगी-साथियों का पीछा करते रहो.

कांग्रेस नहीं चाहती थी कि विन चड्ढा लौटे. अगर उसने बोफोर्स स्कैंडल पर अपना मुंह खोल दिया होता तो कुछ लोगों को मुंह छिपाने की भी जगह नहीं मिलती.

Narendra Modi

मोदी सरकार से उम्मीद है कि वो भगोड़े विजय माल्या को भारत वापस लाकर उससे कर्ज की पाई-पाई की रकम वसूले

और, भोपाल गैस त्रासदी मामले में यूनियन कार्बाइड के वारेन एंडरसन को वापस लाने की हमारी कोशिशों का किस्सा कुछ वैसा ही जैसा फिल्म ‘सात हिन्दुस्तानी’ के भाइयों की कॉमेडी.

हद तो यह है कि ऑक्तावियो क्वातोरोच्ची भी हमारे हाथ से फिसल गया.

राजनीतिक भूचाल आ जाएगा

हम अंडरवर्ल्ड पर लगाम कसने की बात कभी गंभीरता से सोचते ही नहीं. अगर अंडरवर्ल्ड के ये डॉन एक सुर में तोते की तरह बोलना शुरू कर दें तो फिर राजनीतिक भूचाल आ जाए. ऐसा भूचाल जैसा पहले कभी नहीं आया. हमने संजय दत्त को तो जेल में बंद कर दिया लेकिन टाइगर मेनन के कभी नजदीक भी नहीं फटक सके.

नेवी वार रुम लीक मामले में रवि शंकरन लंदन में गिरफ्तार हुआ तो हमने उसे भारत लाने के लिए कितनी कठोर मेहनत की? आखिरकार, सबूत के अभाव में उसे छोड़ दिया गया.

सबूत का अभाव— यह मुहावरा बहुत जाना-पहचाना नहीं लगता ? विजय माल्या जब कोर्ट से आजाद होकर निकला तो यही मुहावरा एक बार फिर से उछला. आतंकवादियों और भारत-विरोधी ज्ञान बांटने वालों के मामले में इस मुहावरे के उछलने की सूची बनाएं तो वह बड़ी लंबी होती जाएगी.

क्या किसी को ललित मोदी मामले की याद है, तब हमने ललित मोदी को भारत वापस लाने के लिए कैसी छाती-कूट हाय-हाय मचाई थी. यह आईपीएल के तीसरे संस्करण के पूरा होने के बाद का वाक्या है. अभी हाल ही में आईपीएल का दसवां संस्करण खत्म हुआ है. इसी से अंदाजा लगा लीजिए कि ललित मोदी को वापस बुलाने के लिए हम कितने बेचैन हैं.

और देखिए, कहीं ऐसा ना हो जाये कि कल को विजय माल्या और ललित मोदी साथ-साथ मैच देखते पाए जाएं और अपनी-अपनी कहानियां बड़े मजे-मजे में एक दूसरे को सुनायें. खूब हंसी-ठट्ठा करें!

ब्रिटेन में निर्वासन की जिंदगी बिता रहा विजय माल्या स्टेडियम में भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच देखते हुए पाया गया

ब्रिटेन में निर्वासन की जिंदगी जी रहा विजय माल्या स्टेडियम में भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच देखते हुए पाया गया

सारे भगोड़ों को एक साथ हम पकड़ क्यों नहीं लाते?

आखिर इन सारे भगोड़ों को हम एक साथ पकड़ क्यों नहीं लाते? मजिस्ट्रेट का सवाल तो बड़ा दमदार है कि- आखिर छह महीने इस मामले में प्रगति करने के लिए पर्याप्त नहीं होते क्या?

मामले में अगली सुनवाई अब दिसंबर में होगी.

क्या केंद्र में कोई भी नेता ऐसा है जो कहे कि हां भाई, हम मानते हैं कि देश की जनता को इस सवाल का जवाब दिया जाना चाहिए?

यहां तक कि कुलभूषण जाधव का मामला भी अब आंखों से एकदम ही ओझल होता जान पड़ रहा है. विडंबना देखिए कि कुलभूषण एक अच्छा आदमी है!

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