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गोपालकृष्ण गांधी: नीतीश की पसंद और कांग्रेस की 'भूलसुधार'

इस बार विपक्ष के भीतर की खींचतान में भी गैर-कांग्रेसी विपक्षी दलों ने बाजी मार ली है

Amitesh Amitesh Updated On: Jul 11, 2017 04:30 PM IST

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गोपालकृष्ण गांधी: नीतीश की पसंद और कांग्रेस की 'भूलसुधार'

महात्मा गांधी के पोते गोपालकृष्ण गांधी विपक्ष की तरफ से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनाए गए हैं. लगभग दो घंटे तक चली मैराथन बैठक के बाद 18 विपक्षी दलों के कुनबे ने गोपालकृष्ण गांधी के नाम पर मुहर लगा दी.

राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी दलों के कुनबे के बिखरने के बाद इस बार कोशिश सबको साथ रखने की थी. गोपालकृष्ण गांधी के नाम को आगे कर इस बार सबको साथ रखने की कही कवायद की गई है.

सबकी पसंद हैं गोपालकृष्ण गांधी 

दरअसल, गोपालकृष्ण गांधी लेफ्ट, टीएमसी के साथ-साथ बाकी विपक्षी दलों की भी पसंद रहे हैं. बंगाल के गवर्नर रह चुके गोपालकृष्ण गांधी लेफ्ट के साथ-साथ ममता बनर्जी की भी पसंद रहे हैं. यहां तक कि जेडीयू ने भी अब गोपाल कृष्ण गांधी के नाम पर अपनी सहमति जता दी है.

विपक्ष की बैठक में शिरकत करने जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव गए थे. इसके बाद माना जा रहा है कि सर्वसम्मति से लिए गए इस फैसले के साथ जेडीयू खडी रहेगी.

भले ही विपक्ष ने उपराष्ट्रपति के लिए उनके नाम का ऐलान किया है. उनके नाम को लेकर चर्चा पहले भी हुई थी. राष्ट्रपति चुनाव के वक्त भी लेफ्ट, टीएमसी, जेडीयू, डीएमके समेत विपक्षी दलों की पसंद गोपालकृष्ण गांधी ही थे.

चेन्नई में डीएमके के प्रमुख एम करुणानिधि के जन्मदिन के  मौके पर विपक्षी दलों के जमावड़े में इस बाबत चर्चा भी हुई थी. जेडीयू नेता केसी त्यागी ने फर्स्टपोस्ट से बातचीत के दौरान इस बात को कबूल भी किया था कि उस वक्त नीतीश कुमार की मौजूदगी में सभी विपक्षी दलों ने गोपालकृष्ण गांधी के नाम पर सहमति जता दी थी.

GopalKrishna Gandhi

गोपाल कृष्ण गांधी

राष्ट्रपति चुनाव में भी हो सकते थे उम्मीदवार 

बकौल केसी त्यागी अगर उस वक्त ही विपक्ष की तरफ से गोपालकृष्ण गांधी के नाम का ऐलान कर दिया गया होता तो फिर जेडीयू विपक्ष के उम्मीदवार के साथ ही खड़ी होती. लेकिन, ऐसा ना हो सकने के लिए जेडीयू ने सीधे कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा दिया था. जेडीयू को कांग्रेस का ये रुख नागवार गुजरा था.

इसके बाद रामनाथ कोविंद के नाम को आगे कर एनडीए ने विपक्षी एकता तार-तार कर दी. नीतीश विपक्ष का साथ छोड़ एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के साथ खडे हो गए थे.

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हालाकि, जेडीयू के अलग रुख के बावजूद जब विपक्षी दलों की बैठक हुई तो उसमें राष्ट्रपति चुनाव को लेकर लेफ्ट ने गोपालकृष्ण गांधी के नाम की भी वकालत की थी. लेकिन, कांग्रेस ने बीजेपी के दलित कार्ड का हवाला देकर कांग्रेस की पूर्व सांसद और पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को सामने ला दिया. बिहार की बेटी के नाम पर नीतीश को घेरने की कोशिश थी. लेकिन, उनके उपर कोई फर्क नहीं हुआ.

गोपालकृष्ण गांधी की उम्मीदवारी के मायने 

अब उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के वक्त विपक्ष की तरफ से और खासतौर से कांग्रेस की तरफ से गलती सुधारने की कोशिश हो रही है. इस बार एनडीए के उम्मीदवार के नाम का ऐलान करने से पहले ही विपक्ष ने गोपालकृष्ण गांधी के नाम का ऐलान कर दिया है. कांग्रेस राष्ट्रपति पद के लिए नीतीश की पसंद गोपालकृष्ण गांधी को अब उपराष्ट्रपति के पद के दावेदार के तौर पर सामने ला दिया है.

लेकिन, संदेश सिर्फ इतना भर नहीं है. इस बार विपक्ष के भीतर की खींचतान में भी गैर-कांग्रेसी विपक्षी दलों ने बाजी मार ली है. गोपालकृष्ण गांधी लेफ्ट, टीएमसी और जेडीयू की पसंद हैं. लिहाजा राष्ट्रपति चुनाव की तरह इस बार कांग्रेस की पसंद को बाकी विपक्षी दलों पर नहीं थोपा जा सका है.

विपक्षी दल भी इस बात को समझते हैं कि संख्या बल उनके पास नहीं है. उपराष्ट्रपति चुनाव में उनकी लड़ाई महज औपचारिकता के लिए है. लेकिन, इसमें संकेत सख्त है. बीजेपी को चुनौती देने की कोशिश है और इस चुनौती के लिए महात्मा गांधी के पोते को सामने लाकर सांकेतिक बढ़त बनाने की कवायद हुई है.

लेकिन, अब बीजेपी के दांव का सबको इंतजार होगा. कहीं इस बार भी मोदी-शाह की गुगली विपक्षी कुनबे की एकजुटता को धराशायी ना कर दे.

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