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वेंकैया उप-राष्ट्रपति बने तो दक्षिण में बीजेपी के विस्तार का होगा रास्ता साफ

'मोदी अगर उत्तर भारत में बीजेपी का चेहरा हैं तो वेंकैया दक्षिण भारत में बीजेपी की पहचान'

GS Radhakrishna Updated On: Jul 21, 2017 11:35 PM IST

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वेंकैया उप-राष्ट्रपति बने तो दक्षिण में बीजेपी के विस्तार का होगा रास्ता साफ

बीते एक जुलाई को 68 साल के हो चुके मुप्पावरापू वेंकैया नायडू कामराज मॉडल पर काम करने वाले दक्षिण भारतीय राजनीति के शायद आखिरी संकटमोचक होंगे. एनडीए की ओर से उप-राष्ट्रपति पद की उनकी उम्मीदवारी को कई लोग उन्हें उनका बर्थडे गिफ्ट बता रहे हैं. तीन दशक से अधिक समय तक सत्ता की सीढ़ियों पर बने रहे इस नेता ने पूर्व की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार और अब नरेंद्र मोदी सरकार में अपना अहम योगदान दिया है.

हैदराबाद और दिल्ली के पत्रकार डिनर पॉलिटिक्स का स्वाद चखने के लिए खास तौर से वेंकैया नायडू का इंतजार कर रहे हैं. नेल्लोर से लाए गए उलावा चारू और गोंगुरा पचडी जैसे मसालेदार व्यंजनों के साथ वह दिल्ली में डिनर तो हैदराबाद में लंच पर बैठक कर रहे हैं. वेंकैया गर्व से भरे लहजे में कहेंगे 'अगर मसालेदार व्यंजनों की बात की जाए, तो मेरे पैतृक स्थान नेल्लोर की कोई बराबरी नहीं कर सकता.'

वेंकैया नायडू तुकबंदी की राजनीतिक बयानबाजी में खास तौर से चर्चित रहे हैं. चाहे वो प्रेस कॉन्फ्रेंस हो, जनसभा या फिर विधानसभा हो या संसद हर जगह उन्होंने अपने संबोधनों में अपनी खास छाप छोड़ी है. दिल्ली में उप-राष्ट्रपति पद के लिए जब वो नामांकन भर रहे थे तो वहां भी उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, 'मैंने उषा (के) पति के रूप में शुरुआत की, अब मैं उप-राष्ट्रपति बनूंगा, इसी के साथ सभापति (राज्यसभा के चेयरमैन), लेकिन सबका पति नहीं बनूंगा.'

लेकिन उप-राष्ट्रपति के तौर पर वेंकैया नायडू की उम्मीदवारी ने दक्षिण भारतीय राजनीति में कई लोगों को हैरत में डाल दिया है. तमिलनाडु में जयललिता के शासनकाल के दौरान उन्हें कामयाब ट्रबल शूटर के रूप में देखा जाता रहा.

M. Venkaiah Naidu chosen as NDA's Vice-Presidential candidate

बीजेपी के बाहरी मामलों के लिए ज्यादा कारगर होते

चार बार राज्यसभा के सदस्य रहे वेंकैया नायडू करीब तीन दशक से बीजेपी और एनडीए के शासनकाल के दौरान सत्ता के गलियारों के प्रमुख स्तंभ रहे हैं. विजयवाड़ा के एक राजनीतिक विश्लेषक जगन्नाथ नायडु कहते हैं, 'उप-राष्ट्रपति पद के बजाय वो पार्टी के बाहरी मामलों के लिए ज्यादा कारगर होते.'

राजनीतिक गलियारों में कई लोगों का मानना है कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से विभिन्न मुद्दों पर अलग मत रखने वाले वेंकैया उनकी राह में आने वाले रूकावटों को दूर करने का काम करते थे. माना जा रहा है कि महीने भर पहले बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के हुए तेलंगाना और आंध्र प्रदेश दौरे के बाद ही वेंकैया को सक्रिय राजनीति से दूर रखने का फैसला लिया गया.

इसके बाद से ही वेंकैया आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के मामलों में हाशिये पर चले गए. कर्नाटक में बीजेपी की सरकार बनवाकर दक्षिण में पार्टी का खाता खोलने वाले वेंकैया बीएस येदियुरप्पा की अन्य लोगों से लड़ाई में मूकदर्शक बनकर रह गए थे.

विशाखापटनम से बीजेपी सांसद और आंध्र प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष हरि बाबू का कहना है, 'मोदी अगर उत्तर भारत में बीजेपी का चेहरा हैं तो वेंकैया दक्षिण भारत में बीजेपी की पहचान, अगर आंध्र प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनती तो सिर्फ वेंकैया ही हैं जिनके हाथों में उसका नेतृत्व होता.'

M. Venkaiah Naidu chosen as NDA's Vice-Presidential candidate

बहरहाल, आंध्र प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में कुछ बीजेपी नेताओं का मानना है कि वेंकैया को हटा कर पार्टी हाईकमान उन लोगों को ज्यादा अवसर देना चाहता है जो कांग्रेस से टूट कर आए हैं, मसलन-दग्गूबती पूरनदेस्वरी, के लक्ष्मी नारायण और के एस राव. एक वरिष्ठ बीजेपी नेता और वेंकैया के वफादार कहते हैं, 'हालांकि, वेंकैया आंध्र प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में सक्रिय नहीं हैं, लेकिन वह दिल्ली में बैठ कर यहां की प्रगति पर नजर रखेंगे और मार्गदर्शन देंगे.'

वेंकैया ने तेलुगु देशम के साथ गठबंधन का समर्थन किया

लेकिन सूत्रों ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया कि बदले घटनाक्रम से आंध्र प्रदेश बीजेपी में खुशी है. वेंकैया ने हमेशा ही चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली तेलुगु देशम पार्टी के साथ गठबंधन का समर्थन किया, जिन्होंने उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया. सूत्र ने कहा, 'हमने जब भी आवाज उठाई, चंद्रबाबू ने वेंकैया को बुला लिया जिन्होंने हमेशा हमें चुप करा दिया.'

तेलंगाना बीजेपी ने तो 2014 में उस वक्त वेंकैया के हस्तक्षेप का खुलेआम विरोध किया था, जब उन्होंने तेलुगु देशम पार्टी के साथ चुनावी तालमेल कराया था. तत्कालीन आंध्र प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष जी किशन रेड्डी ने तो औपचारिक रूप से कहा था कि अगर टीडीपी से गठजोड़ नहीं होता तो 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने पांच से ज्यादा सीटें जीती होतीं.

किशन रेड्डी ने बीजेपी हाईकमान से कहा था, 'यहां तक कि टीडीपी ने 18 में से जो 7 सीटें जीती थीं, वो बीजेपी के वोटों के कारण ही जीती थीं.' बीजेपी प्रवक्ता कृष्णा सागर राव कहते हैं, 'अगर हम अपने बूते चुनाव लड़ते हैं तो बीजेपी यकीनन 2019 में 20 से ज्यादा सीटें जीतेगी.'

कई बीजेपी नेताओं का मानना है कि वो टीडीपी के बंधक बनकर रह गए हैं, क्योंकि वेंकैया नायडू राष्ट्रीय स्तर पर उसके साथ गठबंधन करना चाहते हैं. दक्षिण में अन्य क्षेत्रीय दल, विशेष रूप से वामदल राहत की सांस ले रहे हैं. क्योंकि तेलुगु राज्य के साथ ही केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु तक वेंकैया के कद का कोई दूसरा बीजेपी नेता नहीं है. यहां तक कि वह पार्टी में मोदी, राजनाथ, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली के बाद आला नेताओं में पांचवें नंबर के नेता हैं. तेलंगाना के एक वरिष्ठ वाम नेता का कहना है, 'वाम दलों की कीमत पर दक्षिण में बीजेपी का विकास इस बात का साफ संकेत है कि यह प्रगति जाति पर आधारित है.'

Chandrababu-Naidu

उच्च सदन में कांग्रेस और वाम दलों को काबू में रखना

लेकिन बीजेपी तो इस बात में भी लाभ देख रही है कि राज्यसभा वेंकैया के हाथों में होगी, जहां एनडीए की शक्ति कम है और वह समर्थन के मामले में पिछड़ी हुई है. यहां वामदल और कांग्रेस, दोनों ही बीजेपी के मुकाबले एकजुट हो जाते हैं. वरिष्ठ राज्यसभा सांसद और टीडीपी नेता टीजी वेंकटेश कहते हैं, 'ऐसा लगता है कि उप-राष्ट्रपति के रूप में वेंकैया का एजेंडा एकदम साफ होगा- उच्च सदन में कांग्रेस और वाम दलों को काबू में रखना.'

हालांकि, टीडीपी एक ऐसे संकटमोचक की कमी महसूस करेगी, जो हर मुश्किल हालात में उन्हें राहत पहुंचाता रहा. बताया जा रहा है कि रविवार को टीडीपी संसदीय दल की बैठक में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि सक्रिय राजनीतिक जीवन से वेंकैया का बाहर होना नुकसान वाली स्थिति है.

कई टीडीपी नेताओं ने स्वीकार किया कि वेंकैया टीडीपी और केंद्र के बीच एक पुल जैसे थे. राज्य के उप-मुख्यमंत्री के ई कृष्णामूर्ति कहते हैं, 'जब भी कोई समस्या सामने आती थी, चाहे वह अमरावती को ग्रांट्स की जरूरत हो या आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जे की, हम दिल्ली में उनकी सहायता का मुंह देखते थे. उप-राष्ट्रपति के पद पर उनका नाम तय होना टीडीपी और आंध्र प्रदेश के लिए भी अच्छा नहीं होगा.'

वेंकैया नायडू नेल्लोर के दूसरे ऐसे उम्मीदवार हैं जो गवर्न करने वाले पद पर आसीन होंगे. राष्ट्रपति पद पर आसीन रह चुके डॉ. एस राधाकृष्णन भी नेल्लोर जिले के ही एक दूरस्थ गांव सर्वपल्ली के निवासी थे. एक किसान परिवार से संबंध रखने वाले वेंकैया आर्ट्स ग्रैजुएट हैं. उन्होंने आंध्र विश्वविद्यालय, विशाखापटनम से कानून में डिग्री ली है.

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कॉलेज के दिनों में जेपी आंदोलन की तरफ आकर्षित

छात्र नेता के रूप में ही वेंकैया ने अपनी धाक जमा ली थी और तटीय आंध्र को राज्य का दर्जा देने वाले आंदोलन का वह अहम हिस्सा बने थे. इस आंदोलन ने 1972-73 में राज्य भर में हलचल मचाई थी. 1973-74 में वेंकैया आंध्र विश्वविद्यालय कॉलेज छात्र संघ के अध्यक्ष बने और 'जेपी' आंदोलन की तरफ आकर्षित हुए. उन्होंने 1974 में आंध्र प्रदेश में लोकनायक जय प्रकाश छात्र संघर्ष समिति का गठन किया. वेंकैया आपातकाल के दौरान मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी ऐक्ट (मीसा) के तहत जेल में भी रहे.

1980 में वेंकैया बीजेपी में शामिल हो गए. वह तत्कालीन जनता पार्टी के तीन विधायकों में से एक थे जिन्होंने पार्टी से टूट कर बीजेपी का गठन किया और 1983 में विधानसभा के लिए दोबारा चुने गए. वह 1980 से 1985 तक बीजेपी के तीन सदस्यीय दल के फ्लोर लीडर थे. तब विधानसभा में उनके समकालीनों में एस जयपाल रेड्डी (जो तब जनता पार्टी में थे), सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी (मजलिस ए इत्तेहाद उल मुसलेमीन नेता), राजेश्वर राव, (पूर्व सीपीआई फ्लोर लीडर जो बाद में टीडीपी में शामिल हुए) और स्वर्गीय पुचालापल्ली सुंदरय्या (दिवंगत सीपीएम दिग्गज) शामिल हैं.

वेंकैया 1984 के अगस्त-सितंबर में तब प्रमुखता से उभरे जब ‘लोकतंत्र बचाओ’ आंदोलन छिड़ा. मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद टीडीपी नेता एन टी रामाराव के इस आंदोलन में वह एक प्रमुख नेता थे. वह एनटीआर को व्हील चेयर में बिठाकर राष्ट्रपति भवन ले गए थे. चंद्रबाबू नायडू और पी उपेंद्र के साथ वेंकैया ही कांग्रेस के खिलाफ उस अभियान के मास्टरमाइंड थे जिसने 1985 में 30 दिन के अंतराल के बाद एनटीआर को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर दोबारा आसीन करा दिया था.

विपक्षी दलों के नेताओं से अच्छे संबंध

चतुर और दो टूक वक्ता के रूप में पहचाने जाने वाले वेंकैया ने विधानसभा में सिर्फ दो बार सेवाएं दीं. 1978 से 1985 तक नेल्लोर के उदयगिरि क्षेत्र से. इसी ने शायद उनका चुनावी भाग्य भी तय कर दिया. सदन की दौड़ के दरम्यान 1991 में बापाटला से और 1996 में हैदराबाद से हार के बाद उन्होंने यह चुनावी दौड़ बंद कर दी. हालांकि, वेंकैया बीजेपी नेता हैं, लेकिन उनका संबंध सभी विपक्षी दलों के नेताओं से काफी अच्छा रहा है.

New Delhi: Union Ministers Rajnath Singh and Venkaiah Naidu with CPI(M) general secretary Sitaram Yechury leaves after a meeting on Presidential poll as part of the ruling party's outreach to stitch a consensus in New Delhi on Friday. PTI Photo by Kamal Singh(PTI6_16_2017_000088B)

वह बीजेपी की आंध्र प्रदेश इकाई के सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहे. जब टीडीपी सत्ता में थी, वह गांधी भवन के ठीक सामने बीजेपी कार्यालय के लिए भूमि प्राप्त करने में सफल रहे, जहां कांग्रेस का आधिपत्य था. हैदराबाद के नामपल्ली में बीजेपी हेडक्वार्टर के रूप में श्यामा प्रसाद मुखर्जी बिल्डिंग की कुल लागत में 25 फीसदी के अंशदान का ऐलान करते हुए वेंकैया ने कहा, 'आज मैं जो कुछ भी हूं, वह बीजेपी की वजह से ही हूं.'

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