S M L

वरुण गांधी का सीधा सवाल- क्यों बढ़ाई जाए सांसदों की सैलरी?

1952 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक में सांसदों ने छह महीने तक वेतन नहीं लेने का फैसला किया था.

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Aug 01, 2017 05:41 PM IST

0
वरुण गांधी का सीधा सवाल- क्यों बढ़ाई जाए सांसदों की सैलरी?

वरुण गांधी अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं. बीजेपी में उनकी छवि फायर ब्रांड नेता की है. लेकिन इस बार वरूण ने संसद के भीतर सांसदों की सैलरी बढ़ाने की मांग पर सवाल खड़ा कर दिया है. उनका कहना है कि पिछले एक दशक में सांसदों की सैलरी 400 प्रतिशत बढ़ी है इसके बावजूद सांसदों के काम का प्रदर्शन उनकी सैलरी के मुताबिक नहीं है.

लोकसभा में शून्यकाल के दौरान सांसदो की सैलरी का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब तमिलनाडु में किसान आत्महत्या कर रहे थे और राज्य के किसानों ने अपने साथी किसानों की खोपड़ियों के साथ दिल्ली में प्रदर्शन किया था. उसके बावजूद तमिलनाडु की विधानसभा ने 19 जुलाई को बेरहमी से असंवेदनशील अधिनियम के माध्यम से अपने विधायकों की सैलरी को दोगुना कर दिया है.

उन्होंने कहा कि 1952 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक में सांसदों ने देश में आम आदमी की आर्थिक हालत को देखते हुए छह महीने तक वेतन नहीं लेने का फैसला किया था. वरुण गांधी ने महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि महात्मा न एक बार लिखा था कि ‘मेरी राय में सांसदों और विधायकों द्वारा लिए जा रहे भत्ते उनके द्वारा राष्ट्र के लिए दी गई सेवाओ के अनुपात में होना चाहिए.’

Parliament

वरुण ने ब्रिटेन के संसद से यहां के संसद की तुलना की

वरुण ने कहा कि पिछले एक दशक में सांसदों ने अपना वेतन लगभग 400 प्रतिशत बढ़ाया है जबकि उनका काम उसके अनुरूप नहीं है. पिछले 15 साल में संसद में पारित 50 प्रतिशत विधेयकों पर गंभीरता पूर्वक विचार नहीं किया गया. इकतालीस प्रतिशत विधेयक तो बिना किसी चर्चा के ही पारित हो गए.

वरुण ने ब्रिटेन के संसद से यहां के सांसदों की सैलरी की तुलना की. उन्होंने कहा कि ‘पिछले एक दशक में ब्रिटेन के 13 प्रतिशत की तुलना में हमने अपने वेतन 400 प्रतिशत बढ़ाए हैं, क्या हमने वाकई इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल की है?

जबकि पिछले दो दशक के प्रदर्शन पर नजर डालें तो मात्र 50 प्रतिशत विधेयक संसदीय समितियों से जांच के बाद पारित किए गए हैं. जब विधेयक बिना किसी गंभीर विचार-विमर्श के पारित हो जाते हैं तो यह संसद के होने के उद्देश्य को पराजित करता है. विधेयक को पारित करने की हड़बड़ी राजनीति के लिए प्राथमिकता दिखाती है, नीति के लिए नहीं. 41 प्रतिशत बिल सदन में चर्चा के बिना ही पारित किए गए.’

ये भी पढ़ें: 'रोटी की दोस्ती' से यादव वोटबैंक में कमल खिलाएगी बीजेपी

varun_gandhi

सांसद देश की सेवा के लिए कार्यरत होते हैं

उन्होंने कहा कि जो लोग कहते हैं कि सांसदों का वेतन निजी क्षेत्र के अनुरूप होना चाहिए. वे लोग जो निजी क्षेत्र में काम करते हैं और वो प्राथमिक रूप से स्वयं के हित के लिए कार्यरत होते हैं. जबकि हम सांसद लोग देश सेवा के लिए कार्यरत होते हैं. यह हमारे सपनों का भारत बनाने का एक मिशन है. इन दो उद्देश्यों की तुलना करना सार्वजनिक जीवन के प्रति प्रतिबद्धता को गलत तरीके से समझना है.

वरुण गांधी ने कहा कि ब्रिटेन की संसद की तर्ज पर ही देश में भी एक तंत्र गठित होना चाहिए. ब्रिटेन में सांसदों के वेतन में बढ़ोतरी की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र प्राधिकरण है जिसमें गैर-सांसद सदस्य शामिल होते हैं. ऐसा ही तंत्र देश में भी गठित हो जिसमें सांसदों का हस्तक्षेप नहीं हो.

उन्होंने कहा कि सांसदों के वेतन बढ़ोतरी का कोई आधार होना चाहिए. निजी क्षेत्र का उद्देश्य सिर्फ अपना मुनाफा देखना होता है और इसलिए हम उसके अनुरूप वेतन में बढ़ोतरी नहीं कर सकते क्योंकि ये प्रजातांत्रिक नैतिकता के अनुरूप नहीं होगा. किसानों और देश के गरीब तबके के प्रति संवेदना दर्शाना भी सांसदों की जिम्मेदारी है.

Varun Gandhi

वरुण पहले भी सांसदों की सैलरी बढ़ाए जाने का विरोध कर चुके हैं

इससे पहले भी वरूण गांधी सांसदों की सैलरी बढ़ाए जाने का विरोध कर चुके हैं. यूपीए कार्यकाल के वक्त उन्होंने तत्कालीन स्पीकर मीरा कुमार के सामने अपनी सैलरी न बढ़ाने की बात की थी.

दरअसल इस बार संसद के मानसून सत्र में राज्यसभा में सांसदों की वेतन बढ़ाने की मांग उठी थी. सांसदों का कहना था कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद उनका वेतन सरकार के सचिव से भी कम हो गया है.

समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश अग्रवाल ने इसकी शुरुआत की और तो बाद में कांग्रेस के आनंद शर्मा ने उनके सवाल को सही ठहराते हुए उनका साथ दिया. आनंद शर्मा ने कहा था कि भारतीय सांसदों को दुनिया के जनप्रतिनिधियों के मुकाबले सबसे कम वेतन मिलता है.

वरुण गांधी का कहना था कि विधायक और सांसद अधिकतर पहले से ही अमीर होते हैं और ऐसे में वेतन बढ़ाने की मांग जायज नहीं लगती है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi