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मोदी की रैलियां कामयाब बनाई, अब बन सकते हैं यूपी के सीएम

पीएम मोदी के करीबी इस नेता का नाम अब यूपी सीएम की दौड़ में प्रमुखता के साथ सामने आ रहा है.

FP Staff Updated On: Mar 14, 2017 02:44 PM IST

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मोदी की रैलियां कामयाब बनाई, अब बन सकते हैं यूपी के सीएम

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैली से पहले ये उस शहर में डेरा डाल देते थे. एक कार्यकर्ता से लेकर पदाधिकारी तक की जिम्मेदारी तय करते थे. रैली को कामयाब बनाते और निकल पड़ते थे अगली रैली की तैयारी में. नेता के नाम पर एक बार एमएलसी रहे हैं. संपत्ति के नाम पर एक दो पहिया वाहन है. कॉलेज के वक्त से ही संघ और छात्र राजनीति से जुड़े रहे हैं. संघ और पीएम मोदी के करीबी इस नेता स्वतंत्रदेव सिंह का नाम अब यूपी सीएम की दौड़ में प्रमुखता के साथ सामने आ रहा है.

स्वतंत्रदेव के बारे में कहा जाता है कि वह कैमरे की चमक से दूर पर्दे के पीछे रहकर काम करते हैं. और शायद ये ही संघ के काम करने की शैली भी है. और 1986 में संघ से जुड़कर स्वतंत्रदेव उसी शैली पर काम करते हुए नजर आ रहे हैं. एक बार जरूर उन्हें पार्टी ने एमएलसी बनाया था, 2012 में जालौन की काल्पी विधानसभा से एक बार चुनाव हार चुके हैं. मूलरूप से मिर्जापुर के रहने वाले स्वतंत्रदेव अब उरई में रह रहे हैं.

किसानी परिवार से ताल्लुक रखने वाले कुर्मी जाति के स्वतंत्रदेव जमीनी नेता माने जाते हैं. संपत्ति के नाम पर उनके पास एक छोटा सा मकान और एक दोपाहिया वाहन है. जानकारों की मानें तो विधानसभा चुनावों के दौरान उत्तर प्रदेश में पीएम मोदी की जितनी भी रैली हुई हैं उनके पीछे स्वतंत्रदेव की अपनी रणनीति काम करती थी. रैली से कई-कई दिन पहले उस शहर में रैली का काम संभाल लेते थे. बूथ लेवल से लेकर मंडलस्तर तक के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारी की जानकारी रखते थे.

Swatantradev

स्वतंत्रदेव के बारे में कहा जाता है कि इनकी बैठक में जाने वाला पदाधिकारी पूरी तैयारी से जाता था. स्वतंत्रदेव बैठक के दौरान किसी से भी बूथ लेवल तक का सवाल कर लेते हैं. जो जिस स्तर का कार्यकर्ता उसे रैली के लिए उसी स्तर का काम सौंपना स्वतंत्रदेव की खासियत मानी जाती है.

खुद स्वतंत्रदेव कहते हैं कि इंसान को उसकी क्षमताओं के अनुसार काम दोगे तो वह खुशी-खुशी करेगा, वर्ना ज्यादा काम देखकर वो भाग खड़ा होगा या फिर आपके सामने आने से कतराएगा और इस तरह से उसका काम भी बिगड़ जाएगा.

स्वतंत्रदेव का सियासी सफर: 1986- आरएसएस से जुड़कर संघ का प्रचारक का काम शुरु किया. 1988-89-अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ए.बी.वी.पी.) में संगठन मन्त्री बने. 1991- भाजपा कानपुर के युवा शाखा के मोर्चा प्रभारी बने. 1994- बुन्देलखण्ड के युवा मोर्चा के प्रभारी बने. 1996-युवा मोर्चा का महामन्त्री नियुक्त किया गया. 1998- फिर से भाजपा युवा मोर्चा का महामन्त्री बनाया गया. 2001-भाजपा के युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बने. 2004-विधान परिषद के सदस्य चुने गये. 2004 प्रदेश महामन्त्री बनाये गये. 2004 से 2014 तक दो बार प्रदेश महामंत्री 2010- प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए गए. 2012- से अभी तक महामंत्री हैं.

न्यूज18 इंडिया के लिए नासिर हुसैन की रिपोर्ट

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