S M L

यूपी के नए 'डोनाल्ड ट्रंप' बने योगी महंत आदित्यनाथ

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, दोस्तो, लेट्स मेक यूपी ग्रेट अगेन

Pradeep Awasthi | Published On: Mar 19, 2017 10:23 AM IST | Updated On: Mar 19, 2017 10:23 AM IST

0
यूपी के नए 'डोनाल्ड ट्रंप' बने योगी महंत आदित्यनाथ

" हिन्दुत्व राष्ट्र की संचेतना है. इस पर प्रहार महाप्रलय को आमंत्रण है." उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर ये सन्देश लिखा है.

जैसे ट्रम्प का सन्देश था 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन', नरेन्द्र मोदी का नया सन्देश है 'राइज़ ऑफ़ न्यू इंडिया', वैसे ही उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर आप लिखा पाएँगे 'हिन्दू पुनर्जागरण के महानायक'.

हिन्दू पुनर्जागरण के महानायक

कौन हैं ये हिन्दू जिनको पुनर्जागरण चाहिए और कौन हैं ये स्वघोषित महानायक? ये हमें कौन से समय में वापस ले जाया जा रहा है जहां परम पूज्य, महंत, महाराज जैसे संबोधनों वाले लोग संवैधानिक प्रक्रिया से गुजरते हुए संवैधानिक पदों पर बैठ रहे हैं और कैसे पढ़े लिखे लोग हैं ये जिनको पैसे, ताकत और प्रोपेगेंडा के दम पर इस हद तक असुरक्षित महसूस कराया जा सकता है कि उन्हें अपना एक ही भगवान दिखे जो उनकी कम्युनिटी को बचा सकता है.

2012 की बात है मैं दिल्ली में था. पुलिस ने मेरे दो दोस्तों को कनॉट प्लेस से संदिग्ध आतंकी होने के शक में उठा लिया और बाराखम्बा पुलिस थाने ले गए. पुलिस को और उनके ऊपर के अधिकारियों को वो संदिग्ध इसलिए लगे क्योंकि उनकी दाढ़ी बढ़ी हुई थी और उन्होंने काले कुर्ते पहने थे.

उदाहरण के तौर पर उन्होंने कहा कि अब ये कोई कहने की बात नहीं बची कि उनमें से कोई मुसलमान होता तो क्या होता, जैसे क्या होता आया है कितने ही ऐसे युवाओं के साथ, जो कभी 9 साल बाद छूटे तो कभी 23 साल बाद. उन दोनों के पीछे बहुत सारे लोग थे जो पहुंच गए.'

कट्टर धार्मिक चहरे को मुखिया बनाना

यह बात ठहर कर सोचना मेरे लिए भयावह है कि यूं ही चलते फिरते किसी को उठा लिया जाता है, फिर उसका पता भी नहीं चलता. ये माहौल में व्याप्त डर और असुरक्षा की बात है, जो तब और बढ़ता है जब आप किसी कट्टर धार्मिक चेहरे को मुखिया बनाते हैं.

yogi adityanath

योगी आदित्यनाथ के नाम की घोषणा होने के बाद इलाहाबाद में खुशियां मनाते बीजेपी कार्यकर्ता.

जब आप रोज़ शाम को थके हारे ऑफिस से घर पहुँचते हैं, तब खाना खाते हुए एक डब्बा होता है आपके सामने, जिसमें से कुछ लोग सारा डर नफ़रत में घोलकर आपकी थालियों में परोसते हैं और आप चाव से खाते हैं क्योंकि दिन भर का थका आपका दिमाग़ सोचने की स्थिति में नहीं होता. वे चिल्लाकर आपको बताते हैं फलां लोग आपके दुश्मन हैं, उनसे डरना चाहिए.

हमें उनसे लड़ने को तैयार रहना चाहिए और एक दो ही आदमी हैं जो आपको बचा सकते हैं. आप खुश होते हैं क्योंकि पहले आपके दिमाग़ में जिसके खिलाफ नफरत भरी जाती है, थोड़ी ही देर बाद उसको धूल चटाने के तरीके भी बताए जा रहे हैं. यूं रोज़ आपके खून को उबाला जाता है, फिर ठंडा किया जाता है. फिर आप सुकून की नींद सोते हैं और सुबह उठकर निकल जाते हैं.

डर और सुरक्षा की भावनाएं

हमारे अंदर भरे हुए डर और असुरक्षा की भावनाएं किस तरह काम करती है इसका मैं खुद उदाहरण हूं. आज से लगभग 9–10 साल पहले की बात है. न्यूज़ चैनल्स और अखबारों में खबर ताजा थी बम धमाकों की. किसी को नहीं पता था किसने किए. मैं एक बस में था और नज़रें बचाकर लगातार एक आदमी को देखता रहा जिसकी लम्बी दाढ़ी थी और माथे पर बीचोंबीच काला निशान.

उस लंबी दाढ़ी वाले के पास एक डब्बा था जिसकी ओर मैं रह रहकर देखता और घबराता रहा. यह वो डर था जो बचपन से आस पास के माहौल ने मुझमें भरा था. एक वाकया दो साल पहले का है जब मैं ट्रेन में था और हापुड़ से गाजियाबाद के रास्ते में जो भीड़ चढ़ी, वो रास्ते भर मंजीरा बजाते हुए बुलंद आवाज़ में भजन गाती रही.

ये भी देखने वाली बात थी कि उस भीड़ में कोई स्त्री नहीं थी. यात्रियों में किसी को सिर दर्द था, कोई छोटा बच्चा शोर से घबराकर रो रहा था, मेरी नींद टूट रही थी लेकिन उन्हें कोई कुछ नहीं कह सकता था. ये धार्मिक उन्माद का छोटा सा उदाहरण है.

मेरा एक दोस्त कहता है कि आम लोगों के मन में हमारे प्रति इतना डर भर दिया गया है कि उनका डर हमें डराकर ही ख़त्म होता है.

yogi adityanath

धर्म अपने आप में एक हथियार है

धर्म के नाम पर इकट्ठी हुई भीड़ को कोई कुछ नहीं कह सकता क्योंकि धर्म अपने आप में एक हथियार है जिसकी आड़ में हत्या से लेकर बलात्कार तक, कुछ भी हो सकता है. यहां तो धर्म, सत्ता और देश को एक दूसरे में घोलकर एक ऐसी व्यवस्था तैयार की जा रही है कि बहुत आसान हो जाए लोगों को बरगलाना, वे भूल जाएं फर्क करना कि धर्म के खिलाफ बोला गया, देश के खिलाफ बोला गया या सत्ता के ख़िलाफ़ बोला गया. आप बस किसी के भी ख़िलाफ़ बोलिए, वे तैयार हैं बदला लेने के लिए.

धर्म जिसे एक निजी भावना होना चाहिए था, जिसे घरों तक सीमित रहना चाहिए था वो सत्ता में आ बैठा है. किसी मुगालते में मत रहिए, आने वाले तांडव का इंतजार करिए. जो अब तक विकास नाम के अदृश्य खिलौने से खेलते हुए ख़ुश हैं, जिन्हें अब तक कुछ समझ नहीं आया, उन्हें आगे भी जल्द समझ नहीं आने वाला.

हम अपने संविधान की प्रस्तावना पढ़ें और आज का समय सोचें तो ये सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि एंटी-नेशनल और गद्दार जैसे शब्द आम बोलचाल में शामिल हो चुके हैं. कुछ साल पहले तक इनका अस्तित्व यहां नहीं था. जिन देशों में रहा है, वहां का हाल किसी से नहीं छुपा.

लोगों में वैज्ञानिक सोच का इजाफा हो

योगी आदित्यनाथ ने अतीत में क्या कहा क्या नहीं, उस बारे में मुझे कुछ नहीं कहना क्योंकि सब खुले में है. जिनको देखना ही नहीं, उनसे कोई भी उम्मीद बेमानी है. मैं बस ये जानना चाहता हूँ कि देश के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री की प्रोग्रेसिव बातों पर क्या राय है.

अंतरजातीय और अंतरधर्मीय विवाह पर उनकी क्या राय है, समलैंगिता पर उनकी क्या राय है, जातीय भेदभाव को वो किस तरह देखते हैं, लोगों में वैज्ञानिक सोच का इजाफा हो इसके लिए वे क्या करना चाहेंगे.

YogiAdityanath

अंत में एक काल्पनिक कथा, जिसका होना महज़ संयोग नहीं है

मेरे मोहल्ले में एक लड़का था. मोहल्लों की क्रिकेट टीमों में मैच हुआ करते थे. क्रिकेट ही हमारे बीच का माध्यम था जिसने हमारी जान पहचान कराई. वो लड़का हर जगह मार पिटाई में सबसे आगे रहता था. सनकी था. कभी दूसरों का सिर फोड़ता था, कभी कोई उसका सिर फोड़ देता था. लेकिन वो इस सब से डरता नहीं था.

उसका लड़के का धीरे-धीरे आस पास के लड़कों में रौब होने लगा. वो मोहल्ले का दादा बन गया. ब्लॉक के कुछ नेता टाइप लोगों ने उसके सिर पर हाथ रखा और वो बढ़ते बढ़ते जिला स्तर की राजनीति तक पहुंच गया.

मारपीट से वो अब भी पीछे नहीं हटता था. उसकी साख बन गई क्योंकि लोग उससे डरते भी थे और अब पैसा और पावर भी उसके पास थी. वो लड़का कहां पहुंचा यह मैं आप पर छोड़ता हूं. मुझे लगता है हमारे बचपन में हम सब के मोहल्लों में ऐसा एक लड़का ज़रूर रहा होगा.

अंत में योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'तो दोस्तों, लेट्स मेक यूपी ग्रेट अगेन.'

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi