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यूपी चुनाव 2017: बेटी कांग्रेसी, पिता जप रहे मोदी-मोदी

अखिलेश सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के हैं बड़े प्रशंसक

Sanjay Singh Updated On: Feb 21, 2017 01:31 PM IST

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यूपी चुनाव 2017: बेटी कांग्रेसी, पिता जप रहे मोदी-मोदी

रायबरेली सदर सीट से कांग्रेस उम्मीदवार अदिति सिंह हैं. लेकिन शायद आपको ये बात रास न आये कि उनके पिता खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बड़े प्रशंसकों में से एक हैं. बात जब सोनिया गांधी के लोकसभा संसदीय क्षेत्र रायबरेली सदर सीट की हो तो इससे बड़ी सियासी विडंबना और क्या हो सकती है?

बेटी कांग्रेस में और पिता गा रहे मोदी के गुण

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अखिलेश सिंह ने फ़र्स्टपोस्ट से कहा कि 'नरेंद्र मोदी काफी मजबूत शख्सियत हैं. देश को उनके जैसे मजबूत प्रधानमंत्री की जरूरत है. पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करने के उनके फैसले से मैं काफी प्रभावित हूं. मुझे संतोष है  कि भारतीय सेना का नेतृत्व सही हाथों में है'.

मजबूत सेना और ताकतवर नेतृत्व के जरिए ही देश  की सुरक्षा की जा सकती है. आप देख सकते है कि चीन की सेना भारत में पहले की तरह अब घुसपैठ नहीं करती है. इतना ही नहीं  मैं नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले का भी समर्थन करता हूं. 'ये काफी अच्छा अभियान है. मैं नोटबंदी के पूरी तरह समर्थन में हूं. भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए ये काफी साहसिक कदम है'.

मैं गुण के हिसाब से ही हर चीज को तौलता हूं

अखिलेश सिंह हमेशा की तरह पूरी स्वतंत्रता और साफगोई के साथ अपनी बातें कह रहे थे. हालांकि उन्हें इस बात का अहसास भी है कि उनकी बेटी अब कांग्रेस उम्मीदवार है. लिहाजा सिंह अपनी बातों को आगे बढ़ाते हुए बोले 'मैं ट्रिपल तलाक पर मोदी के स्टैंड के खिलाफ हूं. उन्हे किसी समुदाय विशेष के निजी कानूनों में उन्हें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. इसमें पड़ने की जरूरत ही क्या है.'

इतना कह कर सिंह नाटकीय अंदाज में अपने समर्थकों की तरफ मुड़ते हैं और कहते हैं कि मैं गुण के हिसाब से किसी चीज को तौलता हूं. अगर मैं किन्हीं मुद्दों पर मोदी की प्रशंसा करता हूं तो किसी और मुद्दे पर उनकी आलोचना भी करता हूं.

'मेरी बेटी कांग्रेस में है मैं नहीं हूं'

लेकिन असल सवाल तो ये है कि आखिर सिंह इस बात को कैसे बताते हैं कि वो खुद तो मोदी समर्थक हैं जबकि उनकी बेटी कांग्रेस की उम्मीदवार हैं ? 'मेरी बेटी कांग्रेस में है मैं नहीं हूं. मैं अपनी बेटी के लिए चुनाव मे मदद कर रहा हूं. इसके अलावा मैं आपको बताना चाहूंगा कि अपने भतीजे मनीष सिंह, जो पड़ोस के हरचंदपुर विधानसभा सीट से बतौर बीएसपी उम्मीदवार खड़ा है, के लिए भी चुनावी व्यवस्था में लगा हुआ हूं'.

उन्होने बताया कि रायबरेली सीट से वो खुद पांच बार विधायक रह चुके हैं. वो गांधी परिवार के सबसे बड़े आलोचक रहे हैं.यही वजह है कि किसी अन्य नेता के मुकाबले उन्होंने सबसे ज्यादा गांधी परिवार के सदस्यों को कोसा होगा. बावजूद इसके बतौर निर्दलीय उम्मीदवार रायबरेली सीट से वो जितनी बार चुनाव लड़े उतनी बार जीते भी. किसी भी कांग्रेसी नेता के वो कभी प्रिय नहीं रहे. रायबरेली के लोगों बताते है कि सिंह की बेटी प्राइवेट स्कूल की पढ़ी लिखी हैं. उन्होंने विदेश से उच्च शिक्षा प्राप्त की है. प्रियंका के समर्थक उन्हें वर्षों पहले से कांग्रेस खेमे में लाने के लिए सक्रिय रहे हैं.

छोटे व्यावसायी 40 साल के रामेश्वर मिश्र का कहना है कि  'गांधी परिवार के सम्मान पर रायबरेली सदर एक दाग की तरह है. वो इस बात को अच्छी तरह जानते थे कि सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र के इस सीट से वो कभी चुनाव नहीं जीत पाएंगे. इसलिए अब उन्होंने विधायक जी के साथ डील कर ली.  इसके लिए उनकी बेटी सबसे बड़ा दांव हो सकती थी. आखिरकार इन लोगों ने उनकी बेटी को कांग्रेस खेमे में शामिल करने कामयाबी पा ली'.

बेटी के कांग्रेस मे होने पर मोदी ने जताई नाराजगी

एक दूसरा शख्स का कहना था कि 'हमने सुना है कि नरेंद्र मोदी इस बात पर काफी नाराज थे जब उन्हें पता चला कि विधायकजी की बेटी कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गई हैं. उन्होंने अपने नेताओं से ये पूछा था कि वो बीजेपी में क्यों शामिल नहीं हुईं. और आपलोग कैसे उन्हें बीजेपी खेमे में नहीं ला सके'

अब जबकि अखिलेश सिंह खुद अपनी बेटी के पक्ष में खड़े हैं तो मुमकिन है कि दशकों बाद कांग्रेस इस सीट पर जीत हासिल कर ले. सच तो यही है कि रायबरेली-अमेठी की 10 विधानसभा सीटों में अकेली रायबरेली सदर ही ऐसी सीट है जिससे कांग्रेस के जीतने की उम्मीद सबसे ज्यादा है. लेकिन हर बार की तरह ही इस बार भी ये जीत कांग्रेस पार्टी की नहीं बल्कि अखिलेश सिंह की जीत ही होगी.

बेटी को कांग्रेस मे उतारने की वजह

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तमाम दुश्मनी और एक दूसरे के प्रति घृणा होने के बावजूद भी अखिलेश सिंह ने अपनी बेटी को कांग्रेस में शामिल होंने दिया इसके पीछे का  कारण ये है कि सिंह की तबीयत खराब है. उनका कैंसर का इलाज चल रहा है. जब तक वो सक्रिय हैं और अच्छी हालत में हैं वो अपनी बेटी को सियासत में पूरी तरह जमते हुए देखना  चाहते हैं. वो इस बात से खुश हैं कि प्रियंका से उनकी बेटी अदिति की बेहद नजदीकियां हैं. हालांकि स्थानीय कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता इस नए सियासी समीकरण के अनुकूल खुद को तैयार करने में जुटे हैं. अखिलेश सिंह को अपनी बेटी को जिताने के लिए दूसरों से बोलना भी नहीं पड़ रहा. क्योंकि सभी कह रहे हैं कि 'ये तो विधायक जी की सीट है, पक्का उनकी बेटी ही जीतेगी'.

इस इलाके में उनके सियासी कद और अहमियत का अंदाजा लगाया जा सकता है जब  रायबरेली में राहुल और प्रियंका गांधी के एक रैली में आने से पहले एक स्थानीय नेता अखिलेश सिंह के बारे में बातें कर रहा था. जबकि रैली जहां हो रही थी उसकी दूसरी ओर की दीवार के पास सिंह इन बातों को सुन कर कह रहे थे कि 'देखिए इसी को शुद्ध चमचागिरि कहते हैं'.

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