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यूपी चुनाव 2017: मोदी को मजबूत करने यूपी में गहरे उतरा है संघ

संघ यूपी के चुनावों को 2019 का सेमीफाइनल मानकर इसमें कमी नहीं छोड़ना चाहता है

Badri Narayan Updated On: Feb 22, 2017 10:25 AM IST

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यूपी चुनाव 2017: मोदी को मजबूत करने यूपी में गहरे उतरा है संघ

2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की सफलता के बाद कुछ राजनीतिक विद्वानों और विश्लेषकों की राय थी कि मोदी के नेतृत्व में बीजेपी आरएसएस को किनारे लगाते हुए आगे बढ़ेगी जैसा कि, उन्होंने  गुजरात में अपने मुख्यमंत्री रहते हुए भी किया था.

ये साबित करने के लिए हमारे पास पर्याप्त तथ्य नहीं हैं कि मोदी के नेतृत्व में गुजरात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की निर्भरता से मुक्त था.

लेकिन इन राजनीतिक विश्लेषकों की अटकलों के विपरीत 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद संघ मोदी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार को मजबूत बनाने की दिशा में कई तरह से काम करता रहा है.

संघ बीजेपी की लाइफलाइन

मेरा बिलकुल मानना है कि संघ बीजेपी की जीवन रेखा है. बीजेपी की प्रभावशाली पहचान की  संघ के बिना कल्पना काफी मुश्किल है. यहां तक कि वे बीजेपी नेता जो पहले संघ में थे, संघ के साथ अपने संबंधों का खुलासा करने में हिचक महसूस नहीं करते.

2014 के चुनावों में संघ ने बीजेपी की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उनकी जीत श्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी और संघ की संयुक्त जीत कही जा सकती है.

2014 के विधानसभा चुनाव के दौरान मैंने अपनी टीम के साथ अपने क्षेत्र के दौरे के समय संघ की गतिविधियों का एक अध्ययन किया.

मैंने पाया कि संघ के कार्यकर्ता मोदी की सभाओं का आयोजन करने, इन बैठकों के प्रभाव पर लोगों की प्रतिक्रिया एकत्र करने और बूथ प्रबंधन के  कार्य से जुड़े हुए थे.

बरकरार रहेगी संघ की भूमिका

यह तय बात है कि संघ आगामी चुनावों में भी एक अहम और बड़ी भूमिका निभाने वाला है.

मीडिया की खबरों के अनुसार में 2016 में क्षेत्रीय प्रचारकों की वार्षिक बैठक 11 से 15 जुलाई तक कानपुर में आयोजित की गई थी जिसमें संघ के अध्यक्ष श्री मोहन भागवत ने आगामी यूपी चुनाव के लिए अपने प्रचारकों को मार्गदर्शन और निर्देश दिए थे.

14-15 जुलाई को बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की एक मीटिंग बुलाई गई थी और उनको आगामी चुनावों के लिए परामर्श और निर्देश दिए गए थे.

संघ की सक्रियता स्पष्ट

साल 2014 के चुनावों में संघ की सक्रियता साफ नजर आ रही थी. संघ के अधिकारी बीजेपी के विधानसभा के उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया में भी शामिल रहे हैं.

यह सच है कि उनकी बात को कई जगहों पर महत्व दिया जाता है, लेकिन कई बार उनकी राय को नजरअंदाज भी कर दिया जाता है.

इन चुनावों के दौरान संघ के अधिकारी न तो बीजेपी के अधिकारियों को टिकट देने के पक्ष में थे न ही वे बीजेपी के बड़े नेताओं के परिवार के सदस्यों के लिए टिकट उपलब्ध कराने के पक्ष में थे.

संघ के विचार को ध्यान न देते हुए बीजेपी ने इन लोगों को भी टिकट दिए. कई प्रतियोगी बीजेपी की उत्तरप्रदेश विधान सभा सीटों के लिए इच्छुक थे लेकिन बीजेपी संगठन और उसके कार्यकर्ता टिकट न मिलने से असंतोष की भावना से ग्रस्त हो गए.

बीजेपी कार्यकर्ताओं में असंतोष

इस स्थिति को निगाह में रख कर संघ लगातार बीजेपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से इस असंतोष को खत्म करने के लिए बातचीत कर रहा है.

संघ परिवार ने अपने 40-42 संगठनों को उत्तरप्रदेश चुनावों में सक्रिय कर दिया है.

संघ ने उत्तर प्रदेश अर्थात काशी, गोरक्ष, अवध, कानपुर, ब्रज और मेरठ के अपने सभी छह क्षेत्रीय विभागों में बूथ-प्रमुखों की नियुक्ति शुरू कर दिया है. संघ ने काशी क्षेत्र में 24000 बूथ-प्रमुखों की नियुक्त कर दिए हैं.

चुनाव में अपने बेहतर प्रदर्शन के लिए संघ ने पहले से ही एक त्रि-स्तरीय सामरिक संगठन बना लिया है.

क्या है पन्ना प्रमुख

2014 के चुनाव की तरह बूथ-प्रमुख, सेक्टर-प्रमुख और पन्ना प्रमुख की नियुक्ति की गई है. पन्ना-प्रमुख एक बहुत ही दिलचस्प व्यवस्था है.

पन्ना-प्रमुख मतदान सूची के एक पृष्ठ में दिए गए मतदाताओं का प्रमुख होता है. पन्ना-प्रमुख को वोटर लिस्ट में दिए गए 50 मतदाताओं के संपर्क में रहना होता है और चुनाव के दिन उनको वोटिंग बूथ में लाने की ज़िम्मेदारी भी उसकी ही होती है.

एक बूथ पर संघ के चार पन्ना-प्रमुख होते हैं. वहां बूथ-प्रमुख होता है जो कि सेक्टर-प्रमुख के निर्देशन में कार्य करता है.

इन सबके अलावा संघ ने कालोनी के स्तर पर भी कमेटियां बनाई हैं ताकि वो उनकी मदद से अपना सामाजिक संपर्क बढ़ा सके.

इसके लिए संघ ने शिशु मंदिर, भारतीय मज़दूर संघ और प्रज्ञा प्रवाह के प्रचारकों जैसे अपने सभी सम्बंधित संगठनों को एक साथ जोड़ कर उनको इस कार्य में लगा दिया है.

इस कमिटी का काम विभिन्न सामाजिक समूहों के साथ संवाद बनाने  और उनको भाजपा को वोट देने के लिए प्रेरित करना होता है.

इस तरह से संघ न केवल बीजेपी के लिए चुनावी जनाधार आयोजित कर रहा है बल्कि वह मोदी जी की रैलियों के प्रभाव को वोटों में परिवर्तित करने का कार्य भी कर रहा है.

बीजेपी के लिए काम करता है आरएसएस

संघ ने बीजेपी के आईटी सेल के कार्यकर्ताओं के साथ अपने प्रचारकों के दल को जोड़ कर एक 'संपर्क और संवाद टीम' भी तैयार की है जो कि बीजेपी संगठनों के साथ इन रैलियों के संवाद को बनाए रखने का काम लगातार कर रही है.

संघ हर संभव तरीके से जमीनी स्तर पर भाजपा के चुनावी प्रचारकों को तैयार कर रहा है.

वो पार्टी में उभरे असंतोष के स्तर को शांत करने की कोशिश कर रहा है. बहुत से चुनावी मुद्दों पर लोगों की राय इकट्ठी कर रहा है और उसे भाजपा और संघ के बड़े पदाधिकारियों के साथ साझा कर रहा है.

इस तरह जमीनी स्तर पर संघ की सक्रियता ने भाजपा को उत्तरप्रदेश में संगठनात्मक तौर पर कमजोर होने के बाद भी एक सशक्त संगठनात्मक आधार प्रदान किया है.

यह तो साफ जाहिर है कि उत्तरप्रदेश में संघ का संगठन अन्य भारतीय राज्यों के मुकाबले कहीं अधिक सशक्त है. इसलिए उनकी उनकी सक्रियता का असर यहां आगामी चुनावों के परिणाम को भी प्रभावित करेगा.

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