S M L

तोमर की हिंदी में लिखी चिट्ठी का ओडिशा के सांसद ने दिया उड़िया में जवाब

टी सत्पथी ने ट्विटर पर लिखा कि मंत्री ने जो लिखा है वो मुझे समझ नहीं आ रहा इसलिए मैं अपना जवाबी खत उड़िया में भेज रहा हूं

FP Staff Updated On: Aug 20, 2017 05:03 PM IST

0
तोमर की हिंदी में लिखी चिट्ठी का ओडिशा के सांसद ने दिया उड़िया में जवाब

गैर हिंदी राज्यों द्वारा हिंदी विरोध अब अपने चरम पर है. पिछले दिनों बेंगलुरु मेट्रो में हिंदी में लगे साइन बोर्डों पर कन्नड़ समर्थकों ने कालिख पोत दी थी.

दक्षिण भारत के राज्य लगातार केंद्र सरकार के ऊपर यह आरोप लगा रहे हैं कि वो गैर हिंदी भाषी राज्यों पर जबरन हिंदी थोपने की कोशिश कर रही है. तमिलनाडु ओर कर्नाटक के बाद अब हिंदी विरोध की आग ओडिशा भी पहुंच चुकी है.

केंद्र सरकार और केंद्रीय मंत्रियों की तरफ से हिंदी में भेजे जाने वाले पत्रों को भी अब हिंदी थोपने की कोशिश के तहत देखा जा रहा है. ताजा विवाद केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा ओडिशा के ढेंकानाल से बीजू जनता दल के सांसद टी सत्पथी को हिंदी में लिखे पत्र के बाद शुरू हुआ.

टी सत्पथी ने ट्विटर पर लिखा कि मंत्री ने जो लिखा है वो मुझे समझ नहीं आ रहा इसलिए मैं अपना जवाबी खत उड़िया में भेज रहा हूं.

टी सत्पथी ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर के पत्र को भी अटैच किया है, साथ ही ट्वीट किया केंद्रीय मंत्री क्यों हिंदी न बोलने वालों को हिंदी बोलने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या यह दूसरी भाषाओं पर हमला है?

सत्पथी अगले संसद सत्र में इस मुद्दे को उठाने की योजना बना रहे हैं, उन्होंने कहा कि मैं नरेंद्र तोमर से एक अनुवाद प्रदान करने के लिए कहूंगा क्योंकि मैं एक अनुवादक की तलाश में नहीं जा सकता हूं.

उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों से सरकार की तरफ से उनकी भाषाओं में जानकारी देने एक अनुवादक रखना चाहिए. इससे युवाओं को रोजगार भी मिलेगा.

हिंदी के खिलाफ नहीं हैं सत्पथी

Tathagat-Satpathy-1

तथागत सत्पथी

11 अगस्त को नरेंद्र सिंह तोमर ने '2022 में भारत कैसे हो' पर चर्चा के लिए टी सत्पथी को आमंत्रित करने का आग्रह करते हुए एक पत्र लिखा, जिसमें सरकार के न्यू इंडिया मंथन: संकल्प से सिद्धी ('संकल्प को हासिल करने') कार्यक्रम का जिक्र था, पांच दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम की शुरुआत 21 अगस्त से होगी जो 25 अगस्त तक चलेगा.

एक अंग्रेजी वेबसाइट से बातचीत के दौरान सत्पथी ने कहा कि यूपीए कार्यकाल के दौरान सभी आधिकारिक लेटर हिंदी और अंग्रेजी दोनों में भेजे जाते थे, इन सरकारी विज्ञप्ति में नीति और कार्यक्रमों के महत्वपूर्ण जानकारी होती है.

सत्पथी ने कहा कि मेरे जैसे लोगों का नुकसान कर रहे हैं क्योंकि अगर विज्ञप्ति अगर हिंदी में होगी तो ऐसे में या तो मुझे एक ऐसे शख्स की तलाश में भागना पड़ेगा जो ओडिशा में हिंदी पढ़ना जानता हो या मैं इस बारे में अनजान रह जाउंगा जो सरकार मुझे बताना चाहती है.

हालांकि सत्पथी का ट्विटर अकाउंट वेरिफाइड नहीं है. न्यूज18 से बातचीत में उन्होंने कहा कि इस ट्विटर अकाउंट का वे ही इस्तेमाल करते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ‘वे किसी भी भाषा के खिलाफ नहीं हैं. उड़िया लोग काफी तेज होते हैं. हम हिंदी सीखते भी हैं और लोगों को इसका लाभ भी बताते हैं. और अब हम यह जान गए हैं कि जो अन्य भाषाएं सीखते हैं वे ज्यादा विकास करते हैं.’

दूसरी तरफ नरेंद्र तोमर के ऑफिस के एक बड़े अफसर ने इस बात का दावा किया है कि वे अपने सारे काम हिंदी में करते हैं इसलिए ऐसा नहीं है कि उन्होंने जानबूझकर सभी सांसदों को हिंदी में पत्र लिखा है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi