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...तो आम आदमी पार्टी इसलिए ईवीएम की गड़बड़ी का रोना रो रही है!

आप की पंजाब ईकाई में अंतर्रकलह और वरिष्ठों का पार्टी वर्करों और नेताओं पर भरोसा नहीं करना हार की वजहों में से रही

Mridul Vaibhav | Published On: Mar 16, 2017 09:55 PM IST | Updated On: Mar 17, 2017 07:45 AM IST

...तो आम आदमी पार्टी इसलिए ईवीएम की गड़बड़ी का रोना रो रही है!

आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में अपनी पार्टी की बुरी तरह हार के बाद ईवीएम मशीनों में की गई गड़बड़ियों को जिम्मेदार ठहराया है. लेकिन कुछ ऐसी गड़बड़ियां भी हैं, जो आम आदमी पार्टी की हाईकमान ने चुनाव से बहुत पहले ही खुद ईवीएम में कर दी थीं. यह बहुत मुफीद मौका है, उन गड़बड़ियों को याद दिलाने का.

कई बार परिंदा परों के होते हुए भी नहीं उड़ पाता. पंजाब में आदमी पार्टी के साथ भी यही हुआ. भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के पंख लगाकर नई राजनीति का संदेश लेकर उड़ा आम आदमी पार्टी नाम का परिंदा कैसे अंतर्विरोधों का शिकार हो बैठा, हाईकमान को इसका पता ही नहीं चला.

आप जरा पंजाब की घटनाओं को याद करें. आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बहुत पहले जब पंजाब में इस नई पार्टी का माहौल बहुत शानदार ढंग से बन रहा था, तभी न जाने क्या सोचकर अपने दो सांसदों को पार्टी से निकाल बाहर किया. यह इस नई-नवेली पार्टी के लिए आत्मघाती कदम था. ऐसे कई और कदम पार्टी नेताओं ने उठाए और उठाते ही रहे.

पंजाब में आप के चार सांसद हैं. ये चारों ही पंजाब से लेकर देश की संसद तक इस पार्टी के सही नुमाइंदे रहे हैं. अरविंद केजरीवाल ने फतेहगढ़ साहेब से लोकसभा सदस्य हरिंदर सिंह खालसा और पटियाला से लोकसभा सदस्य धर्मवीर गांधी को पार्टी से निकाल बाहर किया था. ये दोनों ही पार्टी के बहुत मजबूत स्तंभ थे.

अांतरिक लोकतंत्र के सिद्धांत

इनका कसूर सिर्फ इतना था कि ये आप से बाहर किए गए नेता योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण का समर्थन कर रहे थे. ये अपनी बात पार्टी के अांतरिक लोकतंत्र के सिद्धांत के तहत कर रहे थे, लेकिन हाईकमान ने इन दोनों को निकाल बाहर किया.

पंजाब में जिस समय आम आदमी पार्टी ऐसे निर्णय ले रही थी तो उसे यह एहसास ही नहीं रहा कि वह ऐसी फील्डिंग जमा रही है, जिसमें उसके विरोधी बल्लेबाजों के लिए चौके-छक्के लगाना ज्यादा आसान हो जाएगा.

election evm

चुनाव नतीजों के बाद कई राजनीतिक पार्टियों ने ईवीएम में छेड़छाड़ किए जाने की शिकायत की है

आप के प्रमुख नेता और पंजाब के संयोजक सुच्चा सिंह छोटेपुर के साथ जो कुछ हुआ उसे कौन भूल सकता है? पार्टियां अपने नेताओं की गलतियों पर उन्हें बाहर का दरवाजा तो दिखा देती हैं, लेकिन ऐसा कभी नहीं देखा गया कि कोई पार्टी अपने ताकतवर नेता की खुद ही सीडी बनाने लगे और खुद ही उसे बाहर कर दे. कई राजनीतिक विश्लेषक उस समय साफ कह रहे थे कि आम आदमी पार्टी सेल्फ सुसाइड करने की राह पर निकल पड़ी है.

पार्टी का न तो काेई संगठन था और न ही कोई बूथ कमेटी. ऐसे में कुछ साफ-सुथरी छवि वाले थोड़े से ताकतवर चेहरे थे, जो उसे सत्ता के करीब ला सकते थे, लेकिन यह सोचकर कि, ये योगेंद्र यादव या प्रशांत भूषण के लोग हैं, पार्टी ने इन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया.

अंधेरे-निराशा के सिवा कुछ और नहीं

अभी योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण स्वराज अभियान चला रहे हैं. उन्होंने एलान किया है कि वह दिल्ली नगर निगम के चुनाव में सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने जा रहे हैं. दिल्ली नगर निगम के चुनाव में भी अगर अाप निपट गई तो उसके लिए देश में अंधेरे और निराशा के सिवा कुछ और नहीं रह जाएगा.

स्वराज अभियान के प्रचार और समांतर गतिविधियों के कारण पंजाब में भी इस दल के सामने बहुत सारी दिक्कतें रही हैं. पंजाब में आम आदमी पार्टी की हार की कई बड़ी वजहों में एक वजह यह भी है.

AAP supporter at election road show

अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली का कामकाज छोड़कर पंजाब में जमकर चुनाव प्रचार किया था

यह क्या कम हास्यास्पद था कि आम आदमी पार्टी ने अनुशासन समिति के अध्यक्ष दलजीत सिंह को बर्खास्त कर दिया था. वह पंजाब के एक ताकतवर नेता रहे हैं. कल्पना करिए कि आपने आधे सांसदों को पार्टी से निकाल दिया, राज्य के संयोजक को बाहर का रास्ता दिखा दिया, अनुशासन समिति के अध्यक्ष को भी निकाल बाहर किया, अमरिंदर सिंह और अरुण जेटली जैसे नेताओं के सामने ताल ठोंकने वाले एक ताकतवर नेता को पार्टी से बाहर करने के लिए अभियान चलाया और कई इलाकों के ताकतवर नेताओं को पार्टी से निकाल बाहर किया. ऐसे में मतदान और उसके नतीजों के बाद आपके पास यह कहने के अलावा बचता ही क्या है कि ईवीएम टेंपर्ड थी.

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