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ट्विटर पर तेजस्वी यादव ने पोस्ट की पहेली- बताओ, बताओ जेडीयू किसकी?

तेजस्वी यादव ट्विटर पर पहेली बुझा रहे हैं. सवाल है- जेडीयू पर पहला हक किसका?

Tulika Kushwaha Updated On: Aug 10, 2017 05:26 PM IST

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ट्विटर पर तेजस्वी यादव ने पोस्ट की पहेली- बताओ, बताओ जेडीयू किसकी?

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के सुपुत्र तेजस्वी यादव जनादेश अपमान यात्रा पर निकले हुए हैं और अब वो ट्विटर पर लाल बुझक्कड़ खेल रहे हैं.

तेजस्वी ने ट्विटर पर एक ट्वीट में लिखा है, 'बूझो तो जानें, जदयू के संस्थापक कौन हैं? स्थापना करने वाले की पार्टी हुई या बाद में छल-कपट से उसपर कब्जा करने वाले की? ईमानदारी से जवाब दीजिए.'

तेजस्वी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी तंज कसा. उनके निशाने पर नीतीश कुमार का डीएनए था. उन्होंने लिखा कि 'मोदीजी से हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि वो बताएं कि नीतीश कुमार का डीएनए पहले खराब था या अब खराब है. बिहार की जनता जानना चाहती है.'

लेकिन उनके इस पोस्ट के बाद उनसे ही सवाल पूछे जा रहे हैं कि अगर उन्हें नीतीश कुमार का डीएनए खराब लग रहा है, तो वो अबतक उनके साथ क्यों थे?

शरद यादव की दुर्दशा

तेजस्वी और लालू नीतीश यादव के बीजेपी से दोबारा हाथ थाम लेने के बाद से उबले हुए हैं. वहीं जेडीयू की नींव रखने वाले शरद यादव ठगे और खोए हुए से हैं. अब तेजस्वी जनादेश अपमान यात्रा में नीतीश के खिलाफ मोर्चा संभाल रहे हैं और शरद यादव चुप हैं लेकिन जेडीयू नहीं.

जेडीयू के निशाने पर है लालू और शरद यादव की 'दोस्ती'.

जेडीयू के निशाने पर है लालू और शरद यादव की 'दोस्ती'.

जेडीयू ने इशारों-इशारों में कह दिया है कि उन्हें शरद यादव के पार्टी में बने रहने या न रहने से कोई फर्क नहीं पड़ता. यहां तक कि उन्हें पार्टी से बाहर निकालने तक की बातें हो रही हैं. जेडीयू का कहना है शरद यादव की गतिविधियां पार्टी के खिलाफ हैं. वो जो भी कर रहे हैं वो आरजेडी का सिखाया हुआ है.

यहां तक कि पार्टी के प्रवक्ता नीरज कुमार ने ये भी कह दिया कि नीतीश के आदर्श अब लालू और तेजस्वी हैं तो वो जाएं, उन्हीं से हाथ मिला लें. उनके पार्टी में रहने न रहने से हमें कोई फर्क नहीं पड़ता.

जनता दल पार्टी की स्थापना शरद यादव ने की थी और अब हालात ऐसे हैं कि नीतीश कुमार का कब्जा है और शरद यादव रूठे हुए हैं. नीतीश कुमार पूरी बाजी अपने नाम कर छठी बार बिहार के मुख्यमंत्री बन गए हैं और नीतीश से असंतुष्ट शरद यादव सोच में पड़े हुए हैं कि वो किस तरफ जाएं. अब देखना है कि पार्टी के संस्थापक और एक मजबूत नेता शरद यादव की ऐसी हालत बिहार की राजनीति में क्या कुछ सीन बनाती है.

नए तेवर में दिखाई दे रहे हैं तेजस्वी

पिछले महीनेभर चले तेजस्वी प्रताप पर लगे टेंडर घोटाले के ड्रामे का पटाक्षेप नीतीश कुमार के बीजेपी के दामन में दोबारा चले जाने के साथ हुआ. इसके साथ ही नया ड्रामा शुरू हुआ. तेजस्वी और लालू नीतीश पर एक के बाद एक आरोप लगाते हुए अब यात्रा, रैलियों और जनसभाओं में ही रास्ता तलाशने की कोशिश कर रहे हैं.

जनादेश अपमान यात्रा में तेजस्वी और तेज प्रताप यादव.

जनादेश अपमान यात्रा में तेजस्वी और तेज प्रताप यादव.

तेजस्वी ने गुरूवार को अपनी जनादेश अपमान यात्रा शुरू की. सड़कों और जनसभाओं में तेजस्वी को जनता का आक्रोश दिख रहा था. और वो ट्विटर पर लगातार सक्रिय रहे. पूरा दिन वो अपने रोड शो और जनसभाओं की तस्वीरें शेयर करते रहे. उनके समर्थन में उतरी जनता को उन्होंने नीतीश के गाल पर पड़ा तमाचा साबित करने में पूरा जोर लगाया. उन्होंने कहा कि ये भीड़ बुलाई गई भीड़ नहीं है, नीतीश कुमार द्वारा ठगी गई जनता है.

तेजस्वी यादव फिलहाल बिहार के विपक्ष के सबसे सक्रिय नेता दिख रहे हैं. लेकिन सब जानते हैं कि टेंडर घोटाले के आरोपों में घिरे तेजस्वी के लिए राह आसान नहीं होगी.

वैसै भी, शरद यादव भले ही नीतीश कुमार से असंतुष्ट और उनके फैसले से आहत हैं, फिर भी अभी तक उन्होंने कोई ठोस फैसला नहीं लिया है. अब या तो वो खुद पार्टी छोड़ दें या तो जेडीयू ही उन्हें निकाल दे, इसका फैसला भी अगले कुछ दिनों में हो जाएगा लेकिन तेजस्वी जिस सक्रियता और एकाग्रता के साथ मोर्चा संभाले हुए हैं लगता है कि आने वाले वक्त में वो बिहार की राजनीति में एक अहम चेहरे हो सकते हैं.

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