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श्रीकृष्ण की पूजा करते-करते क्यों भोले शंकर के भक्त हो गए तेज प्रताप यादव ?

तेज प्रताप बेसब्री से इंतजार कर रहे थे कि कब वो 25 साल के हो जाएं और जल्दी से जल्दी सांसद या विधायक बन जाएं

Kanhaiya Bhelari Kanhaiya Bhelari Updated On: Jun 03, 2017 06:10 PM IST

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श्रीकृष्ण की पूजा करते-करते क्यों भोले शंकर के भक्त हो गए तेज प्रताप यादव ?

कहावत है बड़ा बेटा बाप का और छोटा बेटा मां का. चर्चा है कि लालू प्रसाद के परिवार में सबकुछ उल्टा-पुल्टा है. छनकर बाहर निकल रहीं खबरों के अनुसार बड़े बेटे तेज प्रताप यादव अपनी मां राबड़ी देवी के काफी करीब हैं जबकि छोटे बेटे तेजस्वी प्रसाद यादव पिता के अधिक दुलारे हैं.

माना जाता है कि लालू यादव की इच्छा है कि उनकी ‘राजगद्दी’ के वारिस तेजस्वी हों, लेकिन राबड़ी देवी के दिल के ज्यादा करीब तेज प्रताप हैं. बचपन से मां के अधिक लाडले तेज प्रताप यादव को मां से अधिक स्नेह मिला है.

पराया हो चुके तीनों मामाओं में से एक बताते हैं कि बचपन में तेज प्रताप को बैटरी वाला हवाई जहाज के साथ खेलने में काफी मजा आता था. पढ़ाई के दिनों में भी उनका झुकाव कभी राजनीति की तरफ नहीं रहा. छात्र जीवन में साथियों के साथ घूमना-फिरना और सुबह-शाम नियमित रूप से भगवान कृष्ण की पूजा करना बिहार के वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री की दिनचर्या में शामिल है. तेज प्रताप शुरुआती दिनों में मंत्री-मुख्यमंत्री नहीं बल्कि पायलट बनकर आकाश में हवाई जहाज उड़ाना चाहते थे.

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तेज प्रताप अपनी मां और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के अधिक करीब हैं (फोटो: फेसबुक से साभार)

सरकारी फ्लाइंग इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया

इसीलिए तेज प्रताप यादव ने जून 2010 में बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (बीएसईबी) से इंटरमीडिएट पास करने के एक महीने बाद पटना के सरकारी फ्लाइंग इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया. बाकायदा लिखित और मौखिक परीक्षा पास करने के बाद उनका सेलेक्शन इस नामी संस्थान में हुआ था. इंटरव्यू पैनल में बिहार कैडर के एक सीनियर आईएएस के अलावा कई एक्सपर्ट भी शामिल थे.

जाहिर है जब दाखिला हुआ तब एक विवाद उठ खड़ा हुआ. ऐसा ही एक विवाद उस वक्त खड़ा हुआ था जब तेज प्रताप की बड़ी बहन और वर्तमान राज्यसभा सदस्य मीसा भारती का दाखिला बिहार के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में हुआ था.

तेज प्रताप यादव के दाखिले पर एक्सपर्ट ने तब पत्रकारों को कहा था, 'गजब का शार्प मांइड तेज प्रताप यादव के पास है. हमने फिजिक्स और मैथ्स के सवाल पूछे जिसका जवाब उसने फटाक से बता दिया.'

हालांकि सनातनी लालू विरोधी आरोप लगाते हैं कि राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से फोन पर पैरवी करा कर पढ़ाई-लिखाई में बेहद कमजोर तेज प्रताप यादव का दाखिला फ्लांइग इंस्टिट्यूट में कराया था.

वैसे, संस्थान में नौकरी करने वाले आदमी ने भी विरोधियों के आरोप को सही ठहराते हुए इस संवाददाता को बताया, 'पढ़ने में पूरा गोल था. उसको कुछ भी समझ में नहीं आता था. पता नहीं किस आधार पर ऐसे कैंडिडेट का सेलेक्शन हो गया.' खैर वजह चाहे जो हो तेज प्रताप कभी पायलट नहीं बन पाए और चार महीने बाद यह कोर्स छोड़कर चले गए.

बेटे को बिजनेस में लाया जाए नहीं तो यह साधु बन जाएगा

दूसरी तरफ तेज प्रताप यादव के एक बचपन के दोस्त तर्क देते हैं, 'भगवान कृष्ण के प्रति गहराता भक्ति भाव उनको सांसारिक मोह माया से विरक्त कर रहा था. जिसके बाद वो वृंदावन के रेगुलर विजिटर हो गए थे'. उनके मित्र आगे कहते हैं बेटे के स्वभाव में परिर्वतन और अध्यात्म के प्रति उसका झुकाव लालू प्रसाद को मानसिक रूप से परेशान करने लगा. इसे देखते हुए पिता लालू यादव ने मन बनाया कि बेटे को बिजनेस में लाया जाए नहीं तो यह साधु बन जाएगा.

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पिता लालू यादव से राजनीति की बारीकियां समझते हुए तेज प्रताप (फोटो: फेसबुक से साभार)

आरजेडी सांसद प्रेम गुप्ता की देख रेख में 2010 में ही लारा डिस्ट्रीब्यूटर प्राइवेट लिमिटेड फर्म बनी. फर्म के नाम के लिए लालू यादव के नाम से 'ला' राबड़ी देवी के नाम से 'रा' लिया गया.

54 लाख रुपए खर्च कर के बिहार के औरंगाबाद शहर में 45.25 डिसमिल जमीन खरीदी गई. फिर इस जमीन को मध्य बिहार ग्रामीण बैंक में गिरवी रखकर 2.29 करोड़ रुपए का लोन लिया गया. उसके बाद हीरो होंडा का शोरूम खुला. वैसे तो इस फर्म में कागजी तौर पर राबड़ी देवी, तेजस्वी प्रसाद यादव, मीसा भारती और चंदा यादव भी पार्टनर हैं.

सबसे ज्यादा 2.51 लाख शेयर तेज प्रताप यादव के पास है और वही इसके मैनेजिंग डाइरेक्टर भी बनाए गए. लारा यानि लालू-राबड़ी शोरूम के कर्मचारी ने फोन पर बताया, 'जब से खुला है तब से अब तक मुश्किल से 5-6 बार एमडी साहब औरंगाबाद आए होंगे. उनका मन यहां नहीं लगता है. हम लोगों को अनाप-शनाप बोलकर पटना वापस लौट जाते हैं'.

चुनाव जीतकर चार विभागों के मंत्री बने

उनको नजदीक से जानने वाले कहते हैं कि तुनक मिजाज तेज प्रताप यादव बेसब्री से इंतजार कर रहे थे कि कब उनकी उम्र 25 साल हो जाए ताकि वो जल्दी से जल्दी सांसद या विधायक बन जाएं. आखिरकार 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में वो वैशाली जिले की महुआ सीट से जीतकर विधायक बने. इसके बाद आरजेडी-जेडीयू गठबंधन की बनी सरकार में चार विभागों के मंत्री बन गए.

तेज प्रताप यादव खुद को कृष्णावतार मानते हैं. वो कहते हैं उनकी पसंदीदा गाड़ी बीएमडब्ल्यू है और उन्हें, वक्त-बेवक्त बांसुरी बजाना, जलेबी छानना, सूजी का हलवा बनाना खूब भाता है.

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बिहार के स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव भगवान कृष्ण की वेशभूषा में

आरएसएस से लोहा लेने के लिए तेज प्रताप ने धर्म निरपेक्ष सेवक संघ का गठन किया है. केंद्र सरकार ने कुछ महीने पहले उन्हें वाई कैटगरी की सुरक्षा प्रदान की है. बीते जनवरी में पटना में संपन्न हुए प्रकाश पर्व के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका हाल-चाल कुछ इस प्रकार पूछा था 'कहो कृष्ण-कन्हैया क्या हाल चाल हैं?'

दोनों भाइयों में शह-मात का खेल चलता रहता है

तेज प्रताप आध्यात्मिक हैं इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें अपने भाई तेजस्वी से कोई होड़ नहीं. कहा जाता है कि वर्चस्व और उत्तराधिकार को लेकर दोनों सहोदर भाइयों में शह और मात का खेल चलता रहता है, भले ही यह साफ न दिखे.

खबरों पर यकीन करें तो मांसाहारी भेाजन की ओर झुकता मन तेज प्रताप यादव को अपना भगवान बदलने के लिए मजबूर कर दिया है. कृष्ण भक्त मंत्री के लेटेस्ट भगवान हैं देवों के देव महादेव. मंत्री का एक खास सिपहसलार बम भोले की नगरी काशी से 10,000 रुपए का शिवलिंग खरीद कर लाया है. इसके साथ पीतल का त्रिशूल और एक दामी डमरू भी मंत्री के आदेश पर वृंदावन से लाया गया है.

फिलहाल शिवलिंग, त्रिशूल और डमरू राबड़ी देबी के आवास में बने मंदिर में रखा गया है. मंत्री बनने के बाद तेज प्रताप यादव ने अपनी निजता को बनाए रखने के ख्याल से अपने नाम पर एक बड़ा बंगला एलॉट करा लिया है. यहां इस साल 13 मार्च को लालू स्टाइल में कुर्ताफाड़ होली का आयोजन किया गया था.

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तेज प्रताप और तेजस्वी के बीच अघोषित रूप से शह और मात का खेल चलता रहता है (फोटो: फेसबुक से साभार)

पिता की तरह नॉन वेज खाने के शौकीन

वैसे, तेज प्रताप को अपने पिता की ही तरह नॉन वेज खाने का भी शौक है. उनके संगी-साथी बताते हैं कि उनका झुकाव बकरे के भुने हुए चाप, रोहू और कतला मछली की तरफ ज्यादा है.

एक स्वजातीय संत ने मंत्री को समझाया और सावधान किया कि भगवान कृष्ण का भक्त होकर नॉन भेज ग्रहण न करें, अनिष्ट होगा. उसने यह भी सलाह दी कि मांस भक्षण करना है तो भगवान बदल लें. मंत्री ने भगवान छोड़ने की सलाह मान ली और अपनी गर्दन से भगवान कृष्ण की प्रतीक कंठी को निकालकर उसकी जगह रुद्राक्ष की माला धारण कर ली. इसके बाद मंत्री ने कहा, 'अब मैं कुछ भी खाने के लिए स्वतंत्र हूं. लेकिन भगवान कृष्ण को भी साइड में रखना है क्योंकि वोट तो इनकी ही कृपा से बिरादरी के लोग देंगे.'

तेज प्रताप अपने आवास के अंदर एक मंदिर का निर्माण करवा रहे हैं. जमीन पहचान कर के नक्शा तैयार करवा लिया गया है. मंत्री जी के आदेश पर शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा भव्य तरीके से करने की तैयारी अभी से ही शुरू कर कर दी गई है.

लालू यादव को गीत सुनाने वाले अब उन्हें सुनाते हैं गाना 

आवास के एक कोने में गंवई अंदाज में लकड़ी का बेहतरीन मड़ई बनवाया है. इसमें एक खाट और कुछ कुर्सियां रखी हैं. शाम ढलने के बाद सरकारी संगीत विद्यालय का एक अध्यापक यहां हर दिन आता है और अपनी मधुर आवाज में भोजपुरी गीतों से मंत्री जी को मुग्ध करता है. ये संयोग की बात है कि यही गायक लालू यादव को भी एक जमाने में गीत सुनाया करते थे.

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तेज प्रताप का झुकाव बचपन से धर्म-कर्म के कामों में अधिक रहा है

सौ बात की एक बात है कि तेज प्रताप को कतई जानकारी नहीं है कि उसके नाम पर कितनी संपत्ति उसके पिता ने बनाई है. पेट के साफ तेज प्रताप यादव ने ये बात हाल ही में अपने एक घनिष्ठ मित्र को बताई है. बेनामी प्रापर्टी संग्रह करने का गहराता आरोप तेज प्रताप यादव को इस कदर परेशान किए हुए है कि एक दिन कहते सुने गए 'लगता है अब कुर्सी नहीं बचेगी.'

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