S M L

15 साल में रंक से राजा कैसे बन गए गायत्री प्रजापति?

FP Staff Updated On: Mar 07, 2017 04:16 PM IST

0
15 साल में रंक से राजा कैसे बन गए गायत्री प्रजापति?

अखिलेश सरकार में कद्दावर मंत्री गायत्री प्रजापति इन दिनों गैंगरेप के मामले में फरार चल रहे हैं. गायत्री प्रजापति सिर्फ अपने विवादों के वजह से ही सुर्खियों में नहीं रहे, उनकी अकूत संपत्ति भी सत्ता के गलियारे में खासी चर्चा में रही है.

कहा जाता है कि 2002 तक गायत्री गरीबी रेखा के नीचे यानी बीपीएल कार्ड धारक थे. लेकिन 10 साल में राजनीति उन्हें इतनी फली कि वह सीधे करोड़पतियों की श्रेणी में शुमार हो गए. यही नहीं अगले पांच साल में उनका कद ऐसा बढ़ा कि सत्ता में जहां कैबिनेट तक उनकी दखल हुई, वहीं संपत्ति में दस गुना से ज्यादा का इजाफा हो गया.

वर्ष 2002 में गायत्री प्रजापत‌ि ने विधायक का चुनाव लड़ने के लिए जो हलफनामा दिया था, उसमें उनकी कुल संपत्त‌ि 91,436 रुपए बताई गई. गरीबी में द‌िन ब‌िताते हुए गायत्री प्रजापत‌ि ने प्रॉपर्टी डीलर का काम भी क‌िया.

समय बीतता गया और गायत्री धीरे-धीरे समाजवादी पार्टी के संपर्क में आए. यहां मुलायम परिवार से उनकी करीबी बढ़ी और इसी का नतीजा रहा कि 2012 में समाजवादी पार्टी ने गायत्री प्रजापति को अमेठी से टिकट दे दिया.

पहली बार चुनाव जीते, राज्यमंत्री से कैबिनेट मंत्री बने

gayatri

किस्मत ने गायत्री का साथ दिया और समाजवादी पार्टी को उन्होंने उस जगह से जीत परोस कर दी, जिसे कांग्रेस पार्टी का गढ़ माना जाता था. यानी अमेठी. उत्तर प्रदेश में अखिलेश मुख्यमंत्री बने और अमेठी की जीत के लिए गायत्री को उन्होंने उपहार स्वरूप फरवरी 2013 में सिंचाई राज्य मंत्री का पद सौंप दिया.

गायत्री यहीं नहीं रुके, कुछ ही महीने बाद उन्हें मुलायम सिंह यादव की मेहरबानी से जुलाई में खनन मंत्री का स्वतंत्र प्रभार मिल गया. करीब छह ही महीने बाद गायत्री 2014 में कैबिनेट मंत्री के तौर पर अखिलेश सरकार में शामिल कर लिए गए.

लेकिन दिन पर दिन राजनीति में नई ऊंचाईयां हासिल कर रहे गायत्री पर अब भ्रष्टाचार के भी आरोप लगने लगे थे. अखिलेश सरकार को उस समय तगड़ा झटका लगा, जब हाई कोर्ट ने खनन विभाग में अनिमियताओं को लेकर सीबीआई जांच के आदेश दे दिए.

इसके अलावा गायत्री पर जमीनों के अवैध कब्जे, सरकारी जमीन बेच देने, पद का दुरुपयोग करने जैसे भी कई आरोप लगे. ताजा आरोप गैंगरेप का लगा है, जिसमें गायत्री कई दिनों से फरार चल रहे हैं.

ऐसे चला अर्श से फर्श तक का सफर

gayatri 1

गायत्री के कॅरियर ग्राफ को उनके ही द्वारा घोषित आय और संपत्ति के विवरण से समझा जा सकता है. जहां 2002 में उनके पास 91,436 रुपए की संपत्ति थी, वहीं 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कुल संपत्त‌ि 1.81 करोड़ रुपए बताई. पांच साल सत्ता का सुख लेने के बाद गायत्री ने इस बार के विधानसभा चुनावों में 10 करोड़ रुपए से ज्यादा संपत्ति दर्शाई है.

इसमें 1 करोड़ 17 लाख 55000 रुपये गायत्री और 1 करोड़ 68 लाख 21000 रुपये की चल संपत्ति पत्नी के नाम है. गायत्री के पास 5 करोड़ 71 लाख 13000 रुपये और उनकी पत्नी 72 लाख 91,191 रुपये की अचल संपत्ति है. गायत्री के पास 100 ग्राम, तो पत्नी के पास 320 ग्राम सोना है. इसके साथ ही एक पिस्टल, रायफल और बंदूक के साथ उन्होंने गाड़ी में एक जीप भी उन्होंने दिखाई है.

गायत्री के खिलाफ फिर से जांच के लिए लोकायुक्त से याचिका

उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त से गायत्री के खिलाफ जो श‌िकायत की गई क‌ि उसके मुताबिक गायत्री के पास 942.57 करोड़ संपत्ति होने का आरोप है. समाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रजापति के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर काफी दिनों से संघर्ष कर रही हैं. इसी क्रम में सोमवार को भी नूतन ठाकुर ने अपनी पुरानी शिकायत की फिर से जांच के लिए लोकायुक्त जस्टिस संजय मिश्रा को याचिका प्रस्तुत की है.

नूतन ने पहले शिकायतकर्ता ओम शंकर द्विवेदी द्वारा अचानक शिकायत वापस ले लेने के बाद दिसंबर 2014 में अपनी शिकायत प्रस्तुत की थी. शिकायत में कहा गया है कि गायत्री प्रजापति ने पूरे प्रदेश में अवैध खनन के जरिये अकूत संपत्ति अर्जित की है.

शिकायत के अनुसार उन्होंने यह संपत्ति अपनी पत्नी महाराजी, दो पुत्र अनिल व अनुराग, दो पुत्री सुधा व अंकिता, अन्य रिश्तेदारों, निकट सहयोगी जैसे विकास वर्मा, पिंटू यादव, पिंटू सिंह, अपने ड्राईवर राम सहाय और रामराज के नाम पर ही बनाई है.

इसमें कई कंपनियों के भी नाम हैं, जिसमें डिसेंट कंस्ट्रक्शन प्रा लि, लाइफ क्योर मेडिकल एंड रिसर्च सेंटर प्रा लि, एमजी कोलोनाइजर, शुभांग एक्सपोर्ट, ड्रीम डेस्टिनेशन इन्फ्रा-लैंड सर्विसेज प्रा लि, पावनी डेवेलोपेर्स प्रा लि और वैष्णो इन्फ्राहाइट्स शामिल हैं.

नूतन के अनुसार इस शिकायत पर गायत्री प्रजापति के परिवारवालों के अतिरिक्त अन्य सभी लोगों ने उनसे सम्बन्ध से इंकार किया था और तत्कालीन लोकायुक्त जस्टिस एन के महरोत्रा ने उनकी बात को सही मानते हुए इन लोगों और गायत्री प्रजापति में कोई सम्बन्ध नहीं होने के आधार पर आरोपों के सत्यापित नहीं होने के आधार पर शिकायत को समाप्त कर दिया था.

नूतन ने इस आदेश को इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच में चुनौती दे कर एसआईटी जाँच की मांग की थी, जहां अभी वाद प्रचलित है. अब उन्होंने जस्टिस संजय मिश्रा से निवेदन किया है कि लोकायुक्त की संस्था इस जांच के लिए पूरी तरह सक्षम है और उनके द्वारा प्रस्तुत ज्यादातर आरोपों की जांच नहीं हुई है, अतः उन आरोपों की दोबारा जांच की जाए.

करोड़ों की इन कंपनियों के जुड़े हैं गायत्री से तार

सहयोग बिल्डमेट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर, एमजीएम एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड, डीसेंट कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड, एमएसजी रियलटर्स प्राइवेट लिमिटेड, एमएसए इंफ्रा वैंचर प्राइवेट लिमिटेड, कान्हा बिल्डवैल प्राइवेट लिमिटेड, मग्स एंटरप्राजेज प्राइवेट लिमिटेड, एमजीए हासपिटैलिटी सर्विसज प्राइवेट लिमिटेड, दया बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड, नवदृष्टी टेक्नोलॉजी सल्यूशन्स, एक्सल बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड, लाइफक्योर मेडिकल एंड रिसर्च सेंटर प्राइवेट लिमिटेड गायत्री प्रसाद प्रजापति (नेता, समाजसेवी, बिजनेसमैन) प्रत्याशी— अमेठी विधानसभा, अमेठी दल— समाजवादी पार्टी राजनीतिक कॅरियर : 2012 में अमेठी से विधायक, सिंचाई राज्यमंत्री, खनन मंत्री स्वतंत्र प्रभार, खनन मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार शैक्षणिक योग्यता: ग्रेजुएट 2002 में संपत्ति : 91,436 रुपए 2009 वार्षिक आय: 3.71 लाख रुपए सालाना 2012 में संपत्ति : 1.81 करोड़ रुपए 2017 में संपत्ति : 10 करोड़ 2 लाख 51 हजार 101 रुपए

(न्यूज 18 इंडिया के लिए अजयेंद्र राजन की रिपोर्ट)

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi