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शुंगलू रिपोर्ट: केजरीवाल मानते हैं कि वही 'सरकार' हैं

शुंगलू कमेटी की जारी रिपोर्ट केजरीवाल सरकार के कारनामों से भरी पड़ी है

Sanjay Singh Updated On: Apr 08, 2017 12:25 PM IST

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शुंगलू रिपोर्ट: केजरीवाल मानते हैं कि वही 'सरकार' हैं

पूर्व सीएजी वी के शुंगलू की लंबी-चौड़ी रिपोर्ट ने एक बार फिर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कारनामों को उजागर कर दिया है. रिपोर्ट इस बात का सबूत है कि अरविंद केजरीवाल के लिए नियम-कानून वो हैं, जो वो सोचते हैं, जो वो करते हैं.

रिपोर्ट में लिखा है कि अरविंद केजरीवाल ने चुन-चुनकर सत्ता के फायदे, सरकारी पद और उससे जुड़े हुए लाभ अपनी पार्टी के नेताओं और उनके रिश्तेदारों में बांटे. उन्होंने ऐसा करने में हर सरकारी नियम और कायदे की धज्जियां उड़ाईं. नैतिकता की तो खैर कोई बात ही नहीं.

इस रिपोर्ट के आने के बाद भी केजरीवाल सीना तानकर भ्रष्टाचार के खिलाफ बयान दे सकते हैं. उनकी पार्टी के नेता अभी भी नैतिकता पर लंबे चौड़े भाषण दे सकते हैं. वो अभी भी ये दावा कर सकते हैं कि आम आदमी पार्टी (आप) के अलावा हर पार्टी के नेता पर कोई न कोई दाग है और सभी दल ये दाग छुपाने में लगे हैं.

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एलजी अनिल बैजल ने विज्ञापन विवाद में केजरीवाल की पार्टी से 97 करोड़ रुपए वसूलने के आदेश दिए हैं

कामकाज के तरीके का कच्चा-चिट्ठा

लेकिन, 264 पन्नों की शुंगलू रिपोर्ट और इससे जुड़े दस्तावेजों ने केजरीवाल के दोगलेपन को उधेड़कर रख दिया है. शुंगलू रिपोर्ट दिल्ली सरकार की 404 फाइलों को खंगालकर, मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और दूसरे विभागों के अफसरों से बातचीत कर के तैयार की गई है. ये रिपोर्ट केजरीवाल सरकार के कामकाज के तरीके का कच्चा-चिट्ठा है.

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ये सरकारी रिपोर्ट उस वक्त आई है, जब अरविंद केजरीवाल पहले ही एक और खुलासे से जूझ रहे हैं. दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल ने दिल्ली के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि, वो अरविंद केजरीवाल की आप से 97 करोड़ रुपए वसूले. आरोप है कि केजरीवाल सरकार ने खजाने का दुरुपयोग करते हुए तमाम ऐसे विज्ञापन दिए, जो उनकी पार्टी को फ़ायदा पहुंचाते थे. ये विज्ञापन खुद अरविंद केजरीवाल ने ही मुख्यमंत्री की हैसियत से जारी किए थे.

केजरीवाल के दिए हुए विज्ञापन सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बिल्कुल खिलाफ थे. उप-राज्यपाल के निर्देशों के मुताबिक दिल्ली सरकार यानी अरविंद केजरीवाल को ये 97 करोड़ की रकम 30 दिनों में खुद अरविंद केजरीवाल यानी आम आदमी पार्टी से वसूलनी है.

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केजरीवाल सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को दरकिनार कर विज्ञापन देने का आरोप है

उप-राज्यपाल का आदेश कोई इकतरफा फैसला नहीं. ये सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनी कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर दिया गया था. कमेटी ऑन कंटेंट रेगुलेशन ऑफ गवर्नमेंट एडवर्टाइजिंग का गठन सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने किया था.

हाल ही में अरविंद केजरीवाल की एक और करतूत से पर्दा उठा था. अरुण जेटली के दायर किए मानहानि का मुकदमा लड़ने के लिए अरविंद केजरीवाल ने राम जेठमलानी को वकील नियुक्त किया था. केजरीवाल अब चाहते हैं कि जेठमलानी की फीस दिल्ली सरकार भरे.

तेज रफ्तार से निपटाने की कोशिश

उनके कहने पर दिल्ली सरकार ने जेठमलानी का बिल पास करने की फाइल को तेज रफ्तार से निपटाने की कोशिश की. इसके लिए फाइल को उप-राज्यपाल के पास भेजने से बचने की कोशिश भी की गई. जाहिर है इस करतूत ने केजरीवाल की छवि पर एक और दाग लगा दिया है.

शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट बताती है कि केजरीवाल सरकार किस तरह भाई-भतीजावाद, बंदरबांट और भ्रष्टाचार कर रही थी. सरकारी पद का ऐसा नंगा दुरुपयोग देखने को कम ही मिलता है. मगर केजरीवाल ने अपनों को फायदा पहुंचाने के लिए हर हद तोड़ी, हर नियम की अनदेखी की. बंदरबांट के चक्कर में केजरीवाल सरकार ने उप-राज्यपाल को भी दरकिनार करने की कोशिश की.

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यही नहीं खुद अपने ही कानून और वित्त विभाग की सलाह को भी केजरीवाल सरकार ने अनदेखा कर दिया. जबकि हर फाइल के निपटारे के लिए इन दोनों विभाग की मंजूरी आम तौर पर जरूरी होती है.

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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अरविंद केजरीवाल पर कोर्ट में मानहानि का दावा कर रखा है

मिसाल के तौर पर आम आदमी पार्टी की सरकार ने अपने मंत्री सत्येंद्र जैन की बेटी सौम्या जैन को दिल्ली स्टेट मिशन का मिशन डायरेक्टर नियुक्त किया. सौम्या के पास आर्किटेक्चर की डिग्री थी. उनके पास मोहल्ला क्लिनिक को लेकर कोई तजुर्बा नहीं था. फाइल में इस बात की भी कोई जिक्र नहीं कि सौम्या की नियुक्ति को किसने मंजूरी दी. इसके बावजूद उसे नियुक्त कर दिया गया.

सौम्या को पद पर बिठा दिया गया

उनकी नियुक्ति से इस्तीफे तक एक लाख पंद्रह हजार के खर्च पर सौम्या को इस पद पर बैठा दिया गया. शुंगलू कमेटी ने इस बारे में लिखा है कि, 'सौम्या जैन की नियुक्ति सिर्फ इसीलिए की गई क्योंकि वो सत्येंद्र जैन की बेटी हैं. सत्येंद्र जैन दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री हैं. वो दिल्ली राज्य हेल्थ मिशन के अध्यक्ष भी हैं. वो तमाम प्रोजेक्ट लागू करने के भी प्रमुख हैं'.

ऐसी ही नियुक्ति निकुंज अग्रवाल की भी है. निकुंज अग्रवाल, अरविंद केजरीवाल के रिश्तेदार हैं. उन्हें सत्येंद्र जैन का ओएसडी नियुक्त कर दिया गया. शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट ने निकुंज की नियुक्ति के बारे में लिखा है कि, 'निकुंज अग्रवाल को उनकी इकलौती अर्जी के आधार पर सीएनबीसी अस्पताल का सीनियर रेजीडेंट मेडिकल ऑफिसर बना दिया गया. जबकि नियम ये है कि किसी भी नियुक्ति का अखबारों में विज्ञापन दिया जाना चाहिए और एक्सपर्ट पैनल के इंटरव्यू के बाद ही सही उम्मीदवार का चुनाव होना चाहिए'.

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दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन भाई-भतीजावाद के गंभीर आरोपों से घिर गए हैं

शुंगलू कमेटी ने कहा कि गोपाल मोहन की नियुक्ति तो चौंकाने वाली है. गोपाल मोहन को पहले तो एंटी करप्शन के लिए मुख्यमंत्री का सलाहकार बनाया गया. उन्हें इसके लिए एक रुपए महीने की तनख्वाह देना तय किया गया. फिर उन्हें शिकायत सेल का सलाहकार बना दिया गया.

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इस पद के लिए उनकी सलाह एक लाख पंद्रह हजार रुपए तय की गई. साथ ही उन्हें पहले के महीनों के लिए एरियर से पैसे लेने का अधिकार भी दे दिया गया. रिपोर्ट कहती है कि गोपाल मोहन को एक पद से दूसरे पद पर भेजने का मकसद उन्हें फायदा पहुंचाना था.

रिपोर्ट कारनामों से भरी पड़ी

शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट केजरीवाल सरकार के ऐसे कारनामों से भरी पड़ी है.

ये रिपोर्ट दिल्ली नगर निगम के चुनाव से ठीक पहले आई है. इसीलिए ये रिपोर्ट केजरीवाल और उनकी पार्टी के लिए चुनाव में मुश्किलें खड़ी कर सकती है. ऐसे तमाम पर्दाफाशों से केजरीवाल सरकार के साफ-सुथरी, ईमानदार सरकार के दावे पर कई दाग लग गए हैं. अब तक केजरीवाल सिर्फ दावों और बयानों के बूते काम चलाते रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने कुछ किया है तो टीवी, अखबारों और रेडियो पर विज्ञापन देने का ही काम किया है.

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फिलहाल दिल्ली के तीनों नगर निगमों में बीजेपी का राज है. आम आदमी पार्टी पहली बार नगर निगम के चुनाव में उतरी है. दो साल पहले ही आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा की 70 में से 67 सीटें जीती थीं. ऐसे में केजरीवाल के लिए नगर निगम के चुनाव में आसानी से जीत मिलनी चाहिए थी. लेकिन, ऐसे तमाम राज सामने आने से आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं का हौसला भी कमजोर हुआ है और उनके समर्थकों का जोश भी ठंडा पड़ गया है.

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