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मोदी विरोध में शरद यादव कहीं राष्ट्रप्रेम तो भुला नहीं रहे?

वो सबको यकीन दिलाना चाहते हैं कि कश्मीर समस्या का हल उनके पास है, लेकिन वो बीजेपी को इससे दूर रखना चाहते हैं

Sanjay Singh Updated On: May 24, 2017 11:05 PM IST

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मोदी विरोध में शरद यादव कहीं राष्ट्रप्रेम तो भुला नहीं रहे?

जनता दल के नेता शरद यादव आम तौर पर उन मुद्दों पर खामोश रहते हैं, जिन पर उन्हें बोलना चाहिए. जैसे वो अपने सहयोगी लालू यादव और उनके परिवार पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों पर खामोश हैं.

शरद यादव जेल में बंद डॉन शहाबुद्दीन और लालू यादव के बीच टेलीफोन पर बातचीत को लेकर भी चुप रहते हैं. सोनिया और राहुल गांधी पर जब नेशनल हेराल्ड के केस में 2000 करोड़ की संपत्ति हथियाने का आरोप लगता है तब भी शरद यादव अपना मुंह बंद रखते हैं.

किसी भी मुद्दे पर बोलने को तैयार रहते हैं

मगर शरद यादव कश्मीर से जुड़े किसी भी मुद्दे पर बोलने को तैयार रहते हैं. कश्मीर को लेकर वो अक्सर मोदी सरकार को निशाना बनाते रहते हैं. सुरक्षा बलों पर जुबानी वार करते हैं.

शरद यादव ने सेना के मेजर लीतुल गोगोई को सम्मानित करने के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी. मेजर गोगोई तब विवादों में आ गए थे, जब उन्होंने एक पत्थरबाज को अपनी गाड़ी की बोनेट से बांधकर पत्थरबाजों से बचने की कोशिश की थी.

मेजर गोगोई के इस कदम के लिए सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने उन्हें प्रशस्ति पत्र दिया है. सेना प्रमुख के फैसले पर सवाल उठाकर शरद यादव राजनीति में खुद को प्रासंगिक बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं.

जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव

शरद यादव मोदी विरोधी दलों को एकजुट करने में जुटे हैं

अहम बात यह है कि जब समाचार एजेंसी एएनआई ने शरद यादव से इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने न तो सेना प्रमुख को निशाना बनाया और न ही मेजर गोगोई पर सवाल उठाए.

दिल्ली में अपने शानदार सरकारी बंगले में बैठकर शरद यादव ने जो प्रतिक्रिया दी, वो सरकार पर हमले की थी. यादव ने कहा कि, 'इस मामले की जांच पूरी हुए बगैर सरकार का यह फैसला कश्मीर के हालात को और बिगाड़ेगा. कश्मीर के हालात बेहद खराब हैं. कोई भी कदम इस जांच के पूरा होने के बाद ही उठाया जाना चाहिए था'.

शरद यादव मोदी विरोधियों को इकट्ठा कर रहे हैं

शरद यादव काफी समय से मोदी विरोधी दलों को इकट्ठा कर के कश्मीर पर एक सम्मेलन करना चाहते हैं. शरद यादव को इस मामले में सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह, यशवंत सिन्हा और लेफ्ट के नेताओं का समर्थन हासिल है. पिछले कुछ समय से शरद यादव यह साबित करने में जुटे हैं कि वो कश्मीर मामले के एक्सपर्ट हैं. वो लोगों को यह यकीन दिलाना चाहते हैं कि कश्मीर समस्या का हल उनके पास है, मगर वो बीजेपी को इससे दूर रखना चाहते हैं.

मगर शरद यादव के लिए अफसोस की बात ये रही कि इस मुद्दे पर कांग्रेस ने अलग ही राय जाहिर की. कांग्रेस के दिग्गज नेता और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह इस मसले पर खुलकर मेजर गोगोई के समर्थन में आए. कैप्टन अमरिंदर ने कहा था कि सेना को घाटी में सख्ती से निपटना चाहिए.

कांग्रेस के कुछ नेताओं की राय इससे जुदा थी. उन्होंने पत्थरबाज को जीप से बांधने पर सवाल उठाने की कोशिश की थी. मगर अमरिंदर के सीधे बयान और सेना को खुले समर्थन के बाद कांग्रेस के भीतर भी ये आवाजें बंद हो गईं.

अमरिंदर सिंह ने सोमवार को एक टीवी चैनल पर कहा कि मेजर गोगोई के मामले में उन्होंने जो भी कहा वो उनकी निजी राय है. कांग्रेस पार्टी की इस मसले पर क्या राय है, वो नहीं जानते.

Amrinder Singh

मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह कश्मीर में पत्थरबाजों से सख्ती से निपटने को लेकर सेना के साथ हैं

बेहद मुश्किल हालात में एक साहसिक फैसला

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मेजर गोगोई को विशिष्ट सेवा मेडल दिए जाने की वकालत की. कैप्टन अमरिंदर ने लिखा कि 'मुश्किल हालात में कड़े कदम उठाने होते हैं. खतरनाक हालात में कई बार हमें साहसिक कदम उठाने होते हैं. जब मेजर गोगोई ने पत्थरबाज को जीप से बांधने का फैसला किया और यकीन जानिए ये एक पल में लिया गया फैसला रहा होगा, ताकि वो अपने आदमियों को बचा सकें, तो वो बेहद मुश्किल हालात में एक साहसिक फैसला ले रहे थे'.

कैप्टन अमरिंदर ने लिखा कि 'हमारे जवान रोजाना ऐसे जोखिम का सामना करते हैं. ऐसा सिर्फ सीमा पर नहीं होता. बल्कि कई बार देश के भीतर भी होता है. बदकिस्मती से हम इन मुश्किल हालात को समझ नहीं पाते. या शायद जान-बूझकर इस बात की अनदेखी करते हैं कि हमारी सेना के जवान ये खतरा देश के लिए उठाते हैं.'

उन्होंने आगे लिखा कि 'जब कोई आदमी इन हालात को समझकर गैर-परंपरागत कदम उठाते हैं, तो उस पर सवाल उठाए जाते हैं. उसे असंवेदनशील बताया जाता है. उस पर आरोप लगाया जाता है कि वो देश के आम नागरिकों का ख्याल नहीं करता, वो नागरिकों के मानवाधिकार का उल्लंघन करता है. बहुमत की राय से अलग फैसला लेने पर उसकी निंदा की जाती है'.

कैप्टन अमरिंदर सिंह के यह शब्द शरद यादव और डी राजा जैसे नेताओं की हरकतों पर सीधा प्रहार हैं. इन नेताओं और इनके अंग्रेजी बोलने वाले बुद्धिजीवी समर्थकों को सेना के मनोबल की जरा भी परवाह नहीं. न तो इन्हें देश की सुरक्षा की परवाह है. न इन्हें राष्ट्रवाद से सरोकार है, न देश की भावना से इन्हें फर्क पड़ता है.

Stone Pelters

पाकिस्तान की शह पर कश्मीर घाटी में स्थानीय आबादी पिछले कई महीनों से सेना पर पत्थर बरसा रही है (फोटो: पीटीआई)

मोदी सरकार का हर बात पर विरोध करना है

इन नेताओं ने ये नहीं देखा कि एक सैन्य अफसर ने बेहद खतरनाक हालात में लीक से अलग हटकर एक फैसला लिया और कई लोगों की जान बचा ली. इन लोगों को मोदी सरकार का हर बात पर विरोध करना है. सुरक्षा बलों पर सवाल उठाकर ये खुद को तरक्की पसंद साबित करने की कोशिश करते हैं. लेकिन शायद उन्हें ये एहसास नहीं कि उनके समर्थकों की जमात की तादाद घटती जा रही है.

इसी तर्क से वो अरुंधती के देश विरोधी बयान की निंदा करने पर परेश रावल पर हमला कर देते हैं. यह नेता और बुद्धिजीवी परेश रावल के ट्वीट को लेकर सवाल उठाते हैं और अरुंधती के सेना और देश के खिलाफ बयान को जायज और तरक्की पसंद ठहराते हैं.

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल प्रकाश कटोच ने कहा, 'गुलाम अहमद डार को जीप से बांधने पर सवाल उठाने वाले उस वक्त खामोश हो जाते हैं जब हमारे जवानों को गाली दी जाती है. उनसे मार-पीट होती है. पत्थरबाज जब हमारे जवानों से बदसलूकी करते हैं तो ये तरक्की पसंद नेता चुप्पी साध लेते हैं. जब पाकिस्तान की सैन्य अदालत कुलभूषण जाधव को फांसी की सजा देती है, तो भी यह खामोश ही रहते हैं.

पाकिस्तान-चीन मिलकर बढ़ावा दे रहे हैं

फ़र्स्टपोस्ट में एक लेख में जनरल कटोच ने लिखा, 'कश्मीर में ताजा हिंसा सिर्फ पाकिस्तान समर्थित हिंसा नहीं है. यह एक ऐसी मुश्किल जंग है जिसे पाकिस्तान और चीन मिलकर बढ़ावा दे रहे हैं.'

Leetul Gogoi

मेजर लीतुल गोगोई को सेना ने साहसिक कदम उठाने के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया है

भारतीय सेना ने सीमा पार स्थित पाकिस्तान के उन बंकरों पर जबरदस्त गोलीबारी की है, जहां पर आतंकवादियों के छुपे होने की आशंका थी. सेना ने इस बारे में आधिकारिक बयान भी जारी किया. पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह ने सीएनएन-न्यूज 18 को बताया कि पहले भी सेना ऐसी कार्रवाई करती रही है.

सेना समय-समय पर और जरूरत के हिसाब से ऐसी कार्रवाई करती रही है. पर आज बदलाव यह हो गया है कि सेना की कार्रवाई को सरकार का खुला समर्थन हासिल हो रहा है.

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